रीवा का 'हेल्थ स्कैम': नियम गए तेल लेने, यहाँ तो बिना डिग्री के डॉक्टर और बिना लाइसेंस के अस्पताल चला रहे हैं यमराज की फ्रैंचाइजी
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा से एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है जो स्वास्थ्य विभाग के दावों की धज्जियां उड़ाने के लिए काफी है। शहर और आसपास के इलाकों में संचालित निजी अस्पताल (Nursing Homes) अब सेवा केंद्र नहीं, बल्कि वसूली के अड्डे बन चुके हैं। सरकारी आदेश रद्दी की टोकरी में पड़े हैं और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) का नियंत्रण पूरी तरह गायब नजर आ रहा है।
आदेशों की अनदेखी: रेट लिस्ट का कहीं पता नहीं
भोपाल से जारी आदेश क्रमांक 548 (दिनांक 14.12.2024) में स्पष्ट निर्देश थे कि सभी निजी नर्सिंग होम को अपनी रेट सूची (Rate List) काउंटर पर अनिवार्य रूप से लगानी होगी। मरीजों को निर्धारित दरों से अधिक चार्ज नहीं किया जा सकता। लेकिन हकीकत यह है कि रीवा के अधिकांश अस्पतालों में रेट लिस्ट केवल फाइलों में है। मरीज जब बिल मांगता है, तो उसे मनगढ़ंत आंकड़े थमा दिए जाते हैं। सीएमएचओ ने न तो इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई की और न ही औचक निरीक्षण किया।
झोलाछाप डॉक्टरों का साम्राज्य: 2017 से अब तक सिर्फ कागजी घोड़े
आदेश क्रमांक 248 (15 जुलाई 2024) के तहत झोलाछाप डॉक्टरों को चिन्हित कर कार्रवाई करनी थी। हैरानी की बात यह है कि 2017 से लगातार निर्देश मिल रहे हैं, लेकिन धरातल पर एक भी बड़ी कार्रवाई नहीं हुई। ये अयोग्य लोग मरीजों के जीवन से खेल रहे हैं और स्वास्थ्य विभाग 'गांधारी' बनकर बैठा है। अधिनियम के अनुसार, बिना पात्रता के 'डॉक्टर' शब्द का इस्तेमाल करना 3 साल की जेल की सजा का हकदार बनाता है, मगर यहां तो इन्हें संरक्षण मिल रहा है।
नर्सिंग होम रजिस्ट्रेशन में फर्जीवाड़ा: बेड ज्यादा, कागजात कम
नर्सिंग होम रजिस्ट्रेशन अधिनियम 1973 की धारा 3 को धता बताते हुए कई नर्सिंग होम बिना वैध लाइसेंस के चल रहे हैं। पत्र क्रमांक 533 (19.06.2024) के अनुसार, अस्पतालों को अपने बेड की संख्या ऑनलाइन आवेदन में स्पष्ट करनी थी। जांच में पाया गया कि कागजों पर 10 बेड दिखाने वाले अस्पताल असल में 30-40 मरीजों को ठूंस-ठूंस कर भर रहे हैं। यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि आगजनी जैसी घटनाओं में मरीजों की मौत का सीधा निमंत्रण है।
अवैध पैथोलॉजी लैब: बिना डिग्री के हो रही है जांच
सबसे भयानक खेल पैथोलॉजी के नाम पर चल रहा है। मध्यप्रदेश आयुर्वेद परिषद अधिनियम 1987 की धारा 13 एवं 14 के अनुसार, लैब का संचालन केवल पंजीकृत पैथोलॉजिस्ट ही कर सकता है। लेकिन रीवा की गलियों में ऐसी लैब खुल गई हैं जहां केवल तकनीशियन (Technicians) ही रिपोर्ट साइन कर रहे हैं। मरीजों को गलत रिपोर्ट दी जा रही है, जिससे गलत इलाज हो रहा है और मौतें हो रही हैं। सीएमएचओ को निर्देश दिए गए थे कि वे समय-समय पर निरीक्षण करें, लेकिन शायद 'साहब' को फुर्सत नहीं है।
सीएमएचओ की भूमिका पर बड़े सवाल
आखिर क्यों स्वास्थ्य विभाग इन निजी संस्थाओं के सामने नतमस्तक है? क्या अधिकारियों की जेबें गरम की जा रही हैं? जब विभाग को पता है कि फायर सेफ्टी ऑडिट नहीं हुआ है, जब पता है कि रेट लिस्ट नहीं लगी है, फिर भी लाइसेंस रद्द क्यों नहीं किए जाते? यह लापरवाही नहीं, बल्कि मरीजों के साथ की जा रही संगठित लूट में भागीदारी है।
जनता अब जाग चुकी है
रीवा की जनता अब इस लूट को बर्दाश्त नहीं करेगी। अगर स्वास्थ्य विभाग ने जल्द ही इन 'मौत के सौदागरों' पर नकेल नहीं कसी, तो यह आक्रोश सड़कों पर उतरेगा। निजी अस्पतालों को यह समझना होगा कि वे सेवा के लिए हैं, शोषण के लिए नहीं।
"दैनिक रीवा न्यूज़ मीडिया" की महा-चेतावनी: जल्द जारी होगी फर्जी अस्पताल-डॉक्टर-लैब की 'ब्लैकलिस्ट'
"दैनिक रीवा न्यूज़ मीडिया" इस "हेल्थ स्कैम" को जड़ से उखाड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। मरीजों की जान और जेब से हो रहे इस खिलवाड़ को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हमारे पत्रकार और खोजी टीम शहर के हर एक फर्जी अस्पताल, फर्जी डॉक्टर और बिना योग्यता वाली अवैध लैब का कच्चा चिट्ठा तैयार कर रही है।
हम शहर के सभी फर्जी अस्पतालों, फर्जी डॉक्टरों और फर्जी लैब्स को यह अंतिम चेतावनी देते हैं कि वे अपनी अनैतिक गतिविधियां तुरंत बंद कर दें।
- बहुत जल्द, "दैनिक रीवा न्यूज़ मीडिया" एक विशेष अंक प्रकाशित करेगा, जिसमें:
- शहर में बिना लाइसेंस के चल रहे फर्जी अस्पतालों की सूची।
- बिना किसी डिग्री के मरीजों का इलाज करने वाले झोलाछाप डॉक्टरों के नाम और पते।
- बिना पंजीकृत पैथोलॉजिस्ट के चल रही अवैध लैब्स का ब्यौरा।
यह सूची नाम-दर-नाम और प्रमाण-दर-प्रमाण जारी की जाएगी। यह स्वास्थ्य विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती होगी और मरीजों के लिए एक बहुत बड़ी राहत।
शहर के हर नागरिक को यह जानने का हक है कि कौन उनकी जान से खिलवाड़ कर रहा है।
सावधान रहें, जागरूक रहें!