रीवा PWD में 35% कमीशन के आरोपों के बीच कार्यपालन यंत्री मुख्यालय से बाहर, कॉलेज चौक की बदहाल सड़क ने बढ़ाई मुश्किल

 
रीवा PWD के कार्यपालन यंत्री नितिन पटेल करीब 15 दिन से मुख्यालय से बाहर बताए जा रहे हैं, वहीं 35% कमीशन के आरोप और कॉलेज चौक की बदहाल सड़क पर सवाल।

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) लोक निर्माण विभाग यानी PWD की कार्यप्रणाली को लेकर रीवा में एक साथ कई सवाल सामने आए हैं। एक तरफ विभाग के कार्यपालन यंत्री नितिन पटेल के करीब 15 दिनों से मुख्यालय से बाहर रहने की जानकारी सामने आ रही है, वहीं दूसरी तरफ जिले के प्रमुख मार्गों में शामिल कॉलेज चौक की सड़क बदहाली, गड्ढों और जलभराव को लेकर लोगों में नाराजगी दिखाई दे रही है।

इसी बीच कुछ संविदाकारों की ओर से निर्माण कार्यों में 35 प्रतिशत कमीशन मांगे जाने के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और संबंधित अधिकारी का पक्ष भी सामने आना बाकी है। ऐसे में पूरे मामले में आरोपों और तथ्यों के बीच अंतर स्पष्ट करने के लिए निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।

मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू यह है कि कॉलेज चौक की सड़क और जलभराव की समस्या को लेकर प्रशासन की ओर से पहले ही संबंधित विभाग को सुधार के निर्देश दिए जाने की बात कही गई है। इसके बावजूद सड़क की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं होने के आरोप हैं।

रीवा PWD में 35 प्रतिशत कमीशन के आरोपों ने बढ़ाई हलचल

लोक निर्माण विभाग से जुड़े कुछ संविदाकारों ने कार्यपालन यंत्री पर निर्माण कार्यों के संबंध में 35 प्रतिशत कमीशन मांगने का आरोप लगाया है। यह आरोप गंभीर प्रकृति का है, लेकिन फिलहाल इसे आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

किसने कितना भुगतान किया, किस काम के बदले कथित रूप से राशि मांगी गई, कोई दस्तावेज या रिकॉर्ड उपलब्ध है या नहीं और अधिकारी की ओर से इस संबंध में क्या स्पष्टीकरण है—इन सभी बिंदुओं की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

यही वजह है कि पूरे मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय दस्तावेजी जांच, शिकायतों की पुष्टि और संबंधित पक्षों के बयान महत्वपूर्ण होंगे।

कार्यपालन यंत्री नितिन पटेल करीब 15 दिन से मुख्यालय से बाहर बताए जा रहे

विभागीय स्तर से मिली जानकारी के अनुसार कार्यपालन यंत्री नितिन पटेल मुंबई में प्रशिक्षण के लिए गए हैं और करीब 15 दिनों से मुख्यालय से बाहर बताए जा रहे हैं।

हालांकि प्रशिक्षण की अवधि, विभागीय अनुमति, वर्तमान स्थिति और उनके मुख्यालय लौटने की तारीख को लेकर स्पष्ट सार्वजनिक जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जिले में चल रहे महत्वपूर्ण सड़क संधारण कार्यों की निगरानी किस स्तर से की जा रही है। यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि इसी अवधि में शहर की महत्वपूर्ण सड़क को लेकर लोगों का विरोध सामने आया है।

कॉलेज चौक की सड़क ने खोली PWD की सड़क संधारण व्यवस्था की पोल

रीवा का कॉलेज चौक शहर के महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल है। यहां से प्रतिदिन बड़ी संख्या में वाहन और आम नागरिक गुजरते हैं। बारिश के दौरान सड़क पर पानी जमा होने से गड्ढे दिखाई नहीं देते और वाहन चालकों के लिए स्थिति और मुश्किल हो जाती है। सड़क पर जगह-जगह बने गड्ढे और जलभराव की समस्या लंबे समय से होने का दावा किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल अस्थायी मरम्मत के बजाय सड़क की स्थायी मरम्मत और पानी की निकासी की व्यवस्था जरूरी है।

बारिश के दौरान पानी सड़क पर जमा होने से दोपहिया वाहन चालकों के साथ-साथ ऑटो और अन्य वाहनों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

अंकित ने गड्ढे के पास बैठकर जताया विरोध

कॉलेज चौक की बदहाल सड़क को लेकर अंकित नामक युवक सड़क पर धरने पर बैठ गया। उसने गड्ढे के पास बैठकर सड़क की मरम्मत और जलनिकासी व्यवस्था दुरुस्त कराने की मांग की।

अंकित का कहना है कि सड़क की समस्या नई नहीं है और लंबे समय से यहां गड्ढे बने हुए हैं। बारिश होने के बाद इन गड्ढों में पानी भर जाता है, जिससे उनकी गहराई दिखाई नहीं देती।

उसने यह भी सवाल उठाया कि जब इसी रास्ते से आम नागरिकों के अलावा प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी गुजरते हैं, तो फिर सड़क की समस्या का स्थायी समाधान अब तक क्यों नहीं हुआ।

बारिश में पानी भरने से छिप जाते हैं गड्ढे

सड़क पर गड्ढा होना अपने आप में परेशानी है, लेकिन जब उसी गड्ढे में बारिश का पानी भर जाए तो खतरा और बढ़ जाता है।

कॉलेज चौक पर यही स्थिति सामने आने का दावा किया जा रहा है। सड़क पर जमा पानी के कारण वाहन चालक यह अनुमान नहीं लगा पाते कि पानी के नीचे गड्ढा कितना गहरा है।

अचानक वाहन गड्ढे में जाने से संतुलन बिगड़ने की स्थिति बन सकती है। खासकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए ऐसी सड़क अतिरिक्त जोखिम पैदा करती है।

अंकित का दावा—दो ऑटो पलट चुके

धरने पर बैठे अंकित ने दावा किया कि सड़क के गड्ढों और जलभराव के कारण दो ऑटो पलट चुके हैं। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

यदि यह दावा सही पाया जाता है तो यह केवल सड़क की गुणवत्ता का मुद्दा नहीं रहेगा, बल्कि सड़क सुरक्षा से भी जुड़ा गंभीर विषय बन जाएगा। इसलिए संबंधित विभाग द्वारा मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाना जरूरी है।

प्रशासन ने पहले ही दिए थे सुधार के निर्देश

मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया है कि करीब एक माह पहले कॉलेज चौक में जलभराव और गड्ढों की समस्या के सुधार को लेकर प्रशासन की ओर से लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिए गए थे।

इसके बावजूद यदि सड़क पर समस्या बनी हुई है तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि निर्देश के बाद कार्रवाई किस स्तर तक पहुंची।

  • क्या मौके का तकनीकी निरीक्षण हुआ?
  • क्या मरम्मत का प्रस्ताव तैयार हुआ?
  • क्या बजट या तकनीकी स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी हुई?
  • क्या जलनिकासी की समस्या को सड़क मरम्मत के साथ जोड़ा गया?

इन सवालों के जवाब विभागीय कार्रवाई से ही सामने आएंगे।

केवल गड्ढे भरने से नहीं, जलनिकासी भी जरूरी

कॉलेज चौक की समस्या को केवल सड़क के गड्ढे भरने तक सीमित नहीं किया जा सकता। यदि बारिश का पानी लगातार सड़क पर जमा होता है तो नई मरम्मत भी लंबे समय तक टिकने की चुनौती का सामना कर सकती है।

इसलिए स्थायी समाधान के लिए सड़क की तकनीकी स्थिति के साथ ड्रेनेज सिस्टम, पानी की निकासी, सड़क की ऊंचाई और ढलान की भी जांच आवश्यक है।

यदि मूल समस्या जलनिकासी है और केवल ऊपर से पैचवर्क किया जाता है, तो अगली बारिश में समस्या दोबारा पैदा होने की संभावना बनी रहती है।

35% कमीशन के आरोपों पर भी चाहिए निष्पक्ष जांच

सड़क की बदहाली के साथ सामने आए कथित 35 प्रतिशत कमीशन के आरोप ने मामले को और गंभीर बना दिया है।

हालांकि, इन आरोपों को अभी प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। संबंधित संविदाकारों से लिखित शिकायत, उपलब्ध दस्तावेज, भुगतान रिकॉर्ड, टेंडर प्रक्रिया, कार्यादेश और अन्य विभागीय रिकॉर्ड की जांच से ही यह पता चल सकता है कि आरोपों में कितना तथ्य है। यदि शिकायतें लिखित रूप में उपलब्ध हैं तो सक्षम विभाग को उनका परीक्षण करना चाहिए और यदि कोई अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

दूसरी ओर संबंधित अधिकारी को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलना भी जरूरी है।

PWD की कार्यप्रणाली पर अब जवाबदेही का सवाल

रीवा में सड़क निर्माण और संधारण सीधे आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा विषय है। सड़क खराब होने पर उसका असर वाहन चालकों, व्यापारियों, छात्रों, मरीजों और पैदल चलने वाले लोगों तक पड़ता है।

ऐसे में सवाल सिर्फ यह नहीं है कि सड़क कब बनेगी, बल्कि यह भी है कि निर्देश जारी होने के बाद कार्रवाई क्यों लंबित रही।

यदि किसी सड़क की समस्या की जानकारी विभाग और प्रशासन दोनों को पहले से थी, तो उसके समाधान के लिए समयसीमा तय होना और उसकी निगरानी होना जरूरी है।

कलेक्टर ने कहा—कॉलेज चौराहे की व्यवस्था सुधारी जाएगी

मामले को लेकर कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने कहा है कि कॉलेज चौराहे की व्यवस्था सुधारी जाएगी और इसके लिए पहले ही निर्देश दिए जा चुके हैं।

अब निगाह इस बात पर रहेगी कि इन निर्देशों के बाद मौके पर क्या कार्रवाई होती है और सड़क की समस्या का स्थायी समाधान कितने समय में किया जाता है।

साथ ही, कमीशन से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र जांच होती है या नहीं, यह भी आगे की तस्वीर स्पष्ट करेगा।

आगे क्या होना चाहिए?

कॉलेज चौक की स्थिति को देखते हुए विभागीय स्तर पर कुछ बिंदुओं पर स्पष्ट कार्रवाई की जरूरत दिखाई देती है—

  • सड़क की तत्काल तकनीकी जांच।
  • जलभराव के वास्तविक कारण का पता लगाना।
  • गड्ढों की स्थायी मरम्मत।
  • पानी की निकासी की व्यवस्था दुरुस्त करना।
  • सड़क की गुणवत्ता और पूर्व में किए गए संधारण कार्यों की जांच।
  • प्रशासन द्वारा दिए गए पुराने निर्देशों की अनुपालन रिपोर्ट।
  • 35 प्रतिशत कमीशन के आरोपों पर उपलब्ध शिकायत और दस्तावेजों की जांच।
  • संबंधित अधिकारी और संविदाकारों का पक्ष रिकॉर्ड पर लेना।
  • जांच में तथ्य मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई।

रीवा PWD से जुड़ा यह मामला फिलहाल दो अलग-अलग सवालों को एक साथ सामने लाता है—सड़क की बदहाली और निर्माण कार्यों से जुड़े गंभीर आरोप।

कॉलेज चौक की सड़क पर जलभराव और गड्ढों की समस्या का समाधान आम नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा तत्काल विषय है। वहीं 35 प्रतिशत कमीशन के आरोपों की सच्चाई दस्तावेजी और स्वतंत्र जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।

कार्यपालन यंत्री नितिन पटेल के मुख्यालय से बाहर रहने की स्थिति, प्रशिक्षण की अवधि, विभागीय कामकाज की निगरानी और लंबित सड़क कार्यों पर भी विभाग को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

अब देखना होगा कि कॉलेज चौक की सड़क पर सिर्फ आश्वासन मिलता है या जमीन पर स्थायी सुधार दिखाई देता है, और कमीशन के आरोप महज शिकायत बनकर रह जाते हैं या जांच के बाद कोई ठोस तथ्य सामने आता है।