रीवा: '15 दिन में दुकान हटाओ वरना अनशन!' दुआरी में आधी रात शराब दुकान का घेराव: नाबालिग से शराब बिकवाने का आरोप, CCTV जांच की मांग
ऋतुराज द्विवेदी (राज्य ब्यूरो) मध्य प्रदेश के रीवा जिले से जनआक्रोश की एक बड़ी खबर सामने आई है। जिला मुख्यालय से सटे गुढ़ थाना अंतर्गत आने वाले ग्राम दुआरी में संचालित मदिरा दुकान को लेकर स्थानीय निवासियों का सब्र आखिरकार जवाब दे गया है। लंबे समय से चल रही परेशानी और बार-बार की उपेक्षा के बाद ग्रामीणों ने सीधे मोर्चा खोल दिया है। शासकीय स्कूल और आरक्षित वर्ग की घनी आबादी के बीच स्थित इस दुकान को तुरंत प्रभाव से हटाने की मांग को लेकर लोगों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा।
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा: रात में शराब दुकान का घेराव और जोरदार प्रदर्शन
बीती 30 जुलाई की देर रात दुआरी गांव का माहौल उस समय तनावपूर्ण हो गया जब सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण लामबंद होकर शराब दुकान के सामने जमा हो गए। उग्र ग्रामीणों ने पूरी दुकान को घेर लिया और शासन-प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों की केवल एक ही मुख्य मांग थी—इस शराब दुकान को गांव के शैक्षणिक वातावरण और रिहाइशी इलाके से तत्काल दूर किया जाए। हंगामा बढ़ता देख स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची गुढ़ थाना पुलिस ने किसी तरह आक्रोशित लोगों को समझा-बुझाकर स्थिति पर काबू पाया और शांति स्थापित की। हालांकि, इसके बाद ग्रामीणों ने कानूनी लड़ाई और प्रशासनिक दबाव बनाने का रास्ता चुना।
छात्र-छात्राओं और महिलाओं की सुरक्षा पर मंडराया संकट
दुआरी गांव के रहवासियों का स्पष्ट आरोप है कि इस दुकान के खुलने के बाद से गांव का सामाजिक ढांचा पूरी तरह छिन्न-भिन्न हो चुका है। सुबह के वक्त जब बच्चे स्कूल जाते हैं, तब से लेकर देर रात तक यहाँ पियक्कड़ों और असामाजिक तत्वों का तांता लगा रहता है।
ग्रामीणों की मुख्य चिंताएं:
- असुरक्षित वातावरण: शराब पीकर हुड़दंग मचाने वाले लोग राह चलती महिलाओं और छात्राओं पर फब्तियां कसते हैं।
- आपराधिक गतिविधियां: दुकान परिसर के आसपास रोजाना गाली-गलौज, आपसी मारपीट और विवाद की घटनाएं आम हो चुकी हैं।
- मानसिक प्रभाव: छोटे बच्चों और विद्यार्थियों पर इस प्रकार के माहौल का अत्यंत नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
नाबालिग से अवैध शराब बिकवाने का संगीन आरोप: CCTV व कॉल डिटेल जांच की मांग
इस पूरे विवाद में एक नया और गंभीर मोड़ तब आया जब ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक (SP) रीवा को सौंपे गए अपने शिकायती पत्र में ठेकेदार पर कानूनी उल्लंघन का बड़ा आरोप लगाया।
ग्रामीणों ने शिकायत में उल्लेख किया है कि बीते 29 जुलाई की रात को एक अनुसूचित जाति वर्ग के नाबालिग बालक के जरिए अवैध रूप से मदिरा की बिक्री करवाई जा रही थी। जब स्थानीय लोगों ने इस अनैतिक और गैरकानूनी कार्य का विरोध किया, तो ठेकेदार और उसके करिंदों ने ग्रामीणों के साथ बदसलूकी की, उन्हें जान से मारने की धमकी दी और मारपीट पर उतारू हो गए।
मामले को पारदर्शी बनाने हेतु ग्रामीणों की प्रमुख मांगें:
- शराब दुकान परिसर में स्थापित सभी CCTV कैमरों की फुटेज की सूक्ष्मता से जांच की जाए।
- आरोपी ठेकेदार और उसके कर्मचारियों के मोबाइल कॉल डिटेल्स (CDR) निकाले जाएं।
- नाबालिग से श्रम और अवैध कार्य करवाने के जुर्म में पृथक से प्राथमिकी दर्ज हो।
आबकारी नियमों की धज्जियां: स्कूल और SC/ST बस्ती के पास दुकान संचालन
मामले का नेतृत्व कर रहे अजीत साकेत एवं बाबूलाल कोल ने आबकारी विभाग (Excise Department) की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। उनका तर्क है कि मध्य प्रदेश आबकारी नीति के अनुसार किसी भी मदिरा दुकान को शैक्षणिक संस्थानों, धार्मिक स्थलों और घनी आवासीय बस्तियों के एकदम समीप संचालित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
दुआरी में शासकीय माध्यमिक विद्यालय और अनुसूचित जाति-जनजाति (SC/ST) बस्ती के बिल्कुल करीब यह दुकान संचालित हो रही है, जो सीधे तौर पर स्थापित नियमों का उल्लंघन है। ग्रामीणों का कहना है कि वे पूर्व में भी कई बार जिम्मेदार अधिकारियों को ज्ञापन दे चुके हैं, परंतु अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
प्रशासन को 15 दिनों की मोहलत: मांग पूरी न होने पर अनशन की चेतावनी
प्रशासनिक उदासीनता से नाराज दुआरी के वासियों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। ज्ञापन के माध्यम से शासन-प्रशासन को स्पष्ट 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया गया है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर मदिरा दुकान को इस स्थल से स्थानांतरित नहीं किया गया, तो अनुसूचित जाति एवं जनजाति समाज के लोग पूरे गांव के साथ मिलकर अनिश्चितकालीन आमरण अनशन और तीव्र धरने पर बैठने को मजबूर होंगे। उन्होंने साफ कहा कि यदि इस आंदोलन के दौरान क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बिगड़ती है, तो उसकी संपूर्ण जवाबदेही जिला प्रशासन एवं आबकारी विभाग की होगी।
कलेक्टर और एसपी का रुख: मामले की जांच के लिए गठित हुई टीम
ग्रामीणों का प्रतिनिधिमंडल जिला मुख्यालय पहुंचकर कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी से भी मिला और उन्हें वस्तुस्थिति से अवगत कराया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए शीर्ष अधिकारियों ने त्वरित प्रतिक्रिया दी है।
कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने मामले को संज्ञान में लेते हुए संबंधित विभाग को तत्काल निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं।
पुलिस अधीक्षक (SP) गुरुकरण सिंह ने आश्वस्त किया है कि ग्रामीणों की सुरक्षा और शिकायतों पर प्राथमिकता से काम किया जाएगा।
प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि स्थल निरीक्षण और स्थिति का आकलन करने के लिए विशेष जांच टीम (Investigation Team) गठित कर दी गई है, जो मौके पर जाकर रिपोर्ट तैयार करेगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।