प्रदेशभर में चर्चा का विषय बना "मुझे बचा लो" वाली प्रसूता के मामले में डॉ. सोनल अग्रवाल की सेवा जीवन भर के लिए समाप्त
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) विंध्य क्षेत्र के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल यानी रीवा के संजय गांधी अस्पताल (Sanjay Gandhi Hospital Rewa) में हुई गर्भवती कल्पना मिश्रा और उसके नवजात शिशु की मौत का मामला अब एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दा बन चुका है। घटना के 21 दिन बीत जाने के बाद श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय (SSMC Rewa) प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए विवादों में घिरी डॉ. सोनल अग्रवाल की सेवा समाप्त कर दी है। दूसरी ओर, अपनी बेटी और नाती को न्याय दिलाने के लिए पिछले 15 दिनों से रीवा के व्यस्ततम सिरमौर चौराहे पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे मृतका के पिता रामशरण मिश्रा को पुलिस ने बलपूर्वक हटा दिया है। इस पूरी घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
25-26 अगस्त की वह काली रात: जब अस्पताल में उठी मदद की गुहार
यह पूरा दर्दनाक मामला 25 अगस्त का है, जब रीवा की रहने वाली गर्भवती कल्पना मिश्रा को प्रसव पीड़ा के बाद संजय गांधी अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में भर्ती होने के बाद डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने समय पर उचित इलाज नहीं किया, जिससे मरीज की हालत लगातार बिगड़ती चली गई।
26 अगस्त की रात इलाज के दौरान पहले नवजात शिशु और फिर कुछ ही देर बाद कल्पना मिश्रा की भी दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में कोहराम मच गया और परिजनों ने डॉक्टर तथा स्टाफ पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए। मामले ने उस वक्त और अधिक तूल पकड़ लिया जब प्रसव से ठीक पहले का कल्पना मिश्रा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस वीडियो में वह अस्पताल के बिस्तर पर दर्द से कराहते हुए परिजनों से अपनी जान बचाने और मदद की गुहार लगाती हुई साफ नजर आ रही थी। वीडियो सामने आने के बाद यह मामला रीवा जिले से निकलकर पूरे मध्य प्रदेश में चर्चा का मुख्य विषय बन गया।
डॉ. सोनल अग्रवाल की सेवा समाप्त: प्रशासनिक आदेश के मायने
घटना के बाद से ही लगातार डॉक्टरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की जा रही थी। इसी कड़ी में श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय ने आदेश जारी करते हुए डॉ. सोनल अग्रवाल को सेवा से पृथक (Terminated) कर दिया है। कॉलेज प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, डॉ. अग्रवाल के खिलाफ पहले से ही विभागीय जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित थी।
सूत्रों के मुताबिक, वर्ष 2023 में चिकित्सा शिक्षा विभाग ने एक उच्चस्तरीय चार सदस्यीय समिति का गठन किया था, जिसकी जांच में यह बात सामने आई थी कि मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पतालों के डॉक्टर मरीजों को बहला-फुसलाकर निजी नर्सिंग होम में भेजते हैं। इस मामले में डॉ. सोनल अग्रवाल को भी आरोपी पाया गया था। 9 मार्च 2023 को उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, जिसके जवाब में उन्होंने 17 मार्च को अपना पक्ष रखा था। इसके बाद 29 मार्च 2023 की कार्यकारिणी समिति की बैठक में उन्हें सेवा से हटाने का प्रस्ताव पास हुआ था, जिस पर अब मोहर लगाते हुए आधिकारिक रूप से सेवा समाप्ति का आदेश जारी कर दिया गया है।
कल्पना मिश्रा मामले में अब तक की गई प्रमुख प्रशासनिक कार्रवाई
घटना के तूल पकड़ने के बाद जिला प्रशासन और चिकित्सा शिक्षा विभाग ने डैमेज कंट्रोल करते हुए कई बड़े प्रशासनिक फेरबदल और निलंबन की कार्रवाई की है:
- स्वास्थ्यकर्मियों का निलंबन: शुरुआत में लापरवाही के आरोप में दो नर्सिंग स्टाफ को निलंबित किया गया था। इसके बाद ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर सोनल अग्रवाल और डॉ. निधि पांडे को भी निलंबित कर दिया गया था। कुल मिलाकर इस मामले में चार स्वास्थ्यकर्मियों पर गाज गिर चुकी है।
- अस्पताल अधीक्षक पर कार्रवाई: मामले की गंभीरता को देखते हुए संजय गांधी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा को उनके पद से हटा दिया गया था।
- डीन का तबादला: 7 सितंबर को श्याम शाह मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. सुनील अग्रवाल का तबादला कर उन्हें सतना मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया।
भोपाल से विशेष जांच टीम का दौरा: मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए राजधानी भोपाल से एक विशेष उच्चस्तरीय टीम रीवा पहुंची थी, जिसने अस्पताल के डॉक्टरों, ड्यूटी पर मौजूद नर्सिंग स्टाफ और मृतका के परिजनों के आमने-सामने बयान दर्ज किए।
रामशरण मिश्रा का 15 दिन का अनशन और पुलिस का हस्तक्षेप
एक तरफ जहां प्रशासन एक के बाद एक डॉक्टरों पर विभागीय गाज गिरा रहा है, वहीं मृतका के पिता रामशरण मिश्रा अपनी बेटी और नवजात को न्याय दिलाने के लिए अकेले ही संघर्ष कर रहे थे। वे पिछले 15 दिनों से रीवा के मुख्य सिरमौर चौराहे पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हुए थे। लगातार डेढ़ हफ्ते से अधिक समय तक अन्न-जल त्यागने के कारण उनकी शारीरिक स्थिति काफी ज्यादा बिगड़ चुकी थी।
बुधवार को प्रशासनिक अमला और पुलिस बल हरकत में आया और सिरमौर चौराहे पर पहुंचकर रामशरण मिश्रा को धरना स्थल से जबरन हटा दिया। पुलिस उन्हें अपने साथ सुरक्षित स्थान या अस्पताल ले गई। तहसीलदार शिवशंकर शुक्ला ने इस कार्रवाई के पीछे का कारण बताते हुए कहा कि सिरमौर चौराहा रीवा शहर का अत्यधिक व्यस्त और संवेदनशील यातायात क्षेत्र है। वहां लंबे समय तक इस तरह धरना प्रदर्शन चलने से आम जनता को भारी असुविधा हो रही थी और यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई थी, इसलिए प्रशासनिक नियमों के तहत यह कदम उठाना जरूरी हो गया था।
राजनीतिक प्रतिक्रिया: कांग्रेस ने उठाए तीखे सवाल
बुधवार को पुलिस द्वारा बुजुर्ग पिता को धरना स्थल से हटाए जाने के बाद रीवा की राजनीतिक गलियारों में भूचाल आ गया है। विपक्षी दल कांग्रेस ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता डॉ. विनोद शर्मा ने प्रशासन के इस कदम को अमानवीय करार दिया है।
उन्होंने तीखा वार करते हुए कहा कि एक वृद्ध पिता अपनी बेटी और नवजात बच्चे की संदिग्ध मौत के बाद न्याय की भीख मांगते हुए 15 दिनों से शांतिपूर्ण तरीके से भूख हड़ताल पर बैठा था। उसकी सुध लेने के बजाय पुलिस ने उसे जबरन उठा लिया, जो शासन-प्रशासन की तानाशाही रवैया को दर्शाता है। परिवार और समर्थकों का साफ कहना है कि सिर्फ एक डॉक्टर की सेवा समाप्त कर देने मात्र से न्याय नहीं मिल जाएगा। जब तक इस घटना के लिए प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार सभी लोगों के खिलाफ संगीन धाराओं में एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष और विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।