"2 बजे रात को भी दोबारा आऊंगा..." रीवा संजय गांधी अस्पताल में आधी रात रेड, कलेक्टर-SP की दबिश से सहम उठा स्टाफ!
रीवा के संजय गांधी अस्पताल में देर रात कलेक्टर और एसपी का छापा। गंदगी देखकर भड़के डीएम, इंचार्ज की सैलरी काटने और सख्त कार्रवाई के आदेश।
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) विंध्य अंचल के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान संजय गांधी मेमोरियल हॉस्पिटल (SGMH), रीवा में स्वास्थ्य सुविधाओं, स्वच्छता व्यवस्था और प्रशासनिक कसावट को बहाल करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने बेहद कड़ा कदम उठाया है। लगातार मिल रही जनशिकायतों, मौतों के मामलों और अव्यवस्थाओं को संज्ञान में लेते हुए जिला प्रशासन की टीम ने अस्पताल परिसर में देर रात दबिश दी। इस कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने न केवल सफाई व्यवस्था का निरीक्षण किया, बल्कि ड्यूटी पर तैनात कर्मियों और आउटसोर्स कंपनियों की कार्यशैली पर कड़ा ऐतराज जताते हुए मौके पर ही दंडात्मक निर्देश जारी किए।
रीवा संजय गांधी अस्पताल में कलेक्टर ने क्यों किया निरीक्षण?
रीवा कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी और पुलिस अधीक्षक गुरू करण सिंह देर रात करीब 10 बजे बिना किसी पूर्व सूचना के संजय गांधी अस्पताल पहुंचे। दोनों अधिकारियों का काफिला सीधे इमरजेंसी वार्ड और अस्पताल के आंतरिक परिसर में रुका।
अधिकारियों ने इमरजेंसी यूनिट, ट्रॉमा सेंटर, ऑर्थोपेडिक्स वार्ड और सामान्य गलियारों का बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने भर्ती मरीजों और उनके परिजनों से संवाद स्थापित कर यह जानने का प्रयास किया कि उन्हें स्वास्थ्य सुविधाएं समय पर मिल पा रही हैं या नहीं। अचानक हुई इस छापामार कार्रवाई से अस्पताल प्रबंधन और ऑन-ड्यूटी स्टाफ में अफरा-तफरी मच गई।
रीवा अस्पताल में गंदगी देख आपा खो बैठे कलेक्टर: क्या बोले अफसर?
निरीक्षण के दौरान जैसे ही प्रशासनिक टीम इमरजेंसी और अन्य वार्डों के बाहर पहुंची, वहां चारों तरफ कचरा, अस्वच्छता और बदहाली का मंजर दिखाई दिया। अस्पताल की इस स्थिति को देखकर कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी खासे नाराज हो गए। सफाई व्यवस्था की ज़िम्मेदारी संभाल रही आउटसोर्स एजेंसी के प्रतिनिधि और अस्पताल प्रबंधन को फटकार लगाते हुए कलेक्टर ने साफ कहा कि मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ और सरकार के पैसों की बर्बादी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि व्यवस्थाओं को तत्काल दुरुस्त किया जाए, क्योंकि प्रशासन द्वारा रात को 2 बजे भी दोबारा औचक निरीक्षण किया जा सकता है।
संजय गांधी अस्पताल रीवा में लापरवाही पर वेतन काटने के निर्देश
सफाई में ढिलाई के अलावा ऑर्थोपेडिक्स वार्ड के आसपास पुराने गद्दे खुले में बिखरे मिलने पर कलेक्टर ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने परिसर की देखरेख में घोर लापरवाही बरतने वाले संबंधित इंचार्ज के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश देते हुए उनका 7 दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए।
इसके साथ ही आउटसोर्सिंग एजेंसी के कर्मियों की उपस्थिति की जांच में पाया गया कि स्वीकृत क्षमता के मुकाबले काफी कम कर्मचारी मौके पर उपस्थित थे। इस फर्जीवाड़े और ढिलाई पर एजेंसी के प्रतिनिधियों को सख्त लहजे में चेतावनी दी गई और अनुबंध रद्द करने तक की बात कही गई।
रीवा अस्पताल में मरीज के साथ अटेंडर के नियम कैसे बदलेंगे?
अस्पताल के वार्डों में बेवजह जुटने वाली भीड़ को नियंत्रित करने और संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए कलेक्टर ने सुरक्षा संबंधी कड़े निर्देश जारी किए। प्रभारी डीन डॉ. मनोज इंदुरकर को निर्देशित किया गया कि:
- एक मरीज-एक अटेंडर: प्रत्येक भर्ती मरीज के पास केवल एक ही परिजन/अटेंडर को रुकने की अनुमति दी जाए।
- प्रवेश पर सख्त चेकिंग: वार्डों के प्रवेश द्वारों पर सुरक्षाकर्मियों की तैनाती बढ़ाई जाए और बिना अनुमति या बिना पास के किसी भी बाहरी व्यक्ति का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहे।
- सुरक्षा प्रोटोकॉल: अस्पताल की आतंरिक सुरक्षा प्रणाली को मजबूत किया जाए ताकि मरीजों के इलाज में कोई बाधा न उत्पन्न हो।
SGMH Rewa में SDM और ADM की ड्यूटी क्यों लगाई गई?
संजय गांधी अस्पताल की व्यवस्थाओं को स्थायी रूप से सुधारने के उद्देश्य से संभागायुक्त और जिलाध्यक्ष स्तर पर एक विशेष निगरानी योजना तैयार की गई है। इसके तहत अगले एक सप्ताह (7 दिन) तक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों का रोस्टर लागू किया गया है।
इस व्यवस्था के अंतर्गत:
एसडीएम (SDM) और एडीएम (ADM): प्रतिदिन विभिन्न शिफ्टों में अस्पताल का औचक दौरा कर व्यवस्थाओं का ऑडिट करेंगे।
जिला पंचायत सीईओ एवं नगर निगम आयुक्त: अस्पताल परिसर में कचरा निष्पादन, जलापूर्ति, प्रकाश व्यवस्था और आउटसोर्स स्टाफ की कार्यप्रणाली पर नजर रखेंगे।
दैनिक रिपोर्टिंग: सभी तैनात अधिकारी प्रतिदिन की निरीक्षण रिपोर्ट सीधे कलेक्टर को सौंपेंगे, ताकि त्वरित सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें।