रीवा SGMH हाईलेवल मीटिंग खत्म : डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल का सख्त संदेश— "ओपीडी छोड़ प्राइवेट प्रैक्टिस में व्यस्त डॉक्टरों पर होगी कार्रवाई!" अधीक्षक ने मरीजों की सुविधा के लिए संभाला मोर्चा!
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) श्याम शाह मेडिकल कॉलेज (SSMC) और संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय (SGMH) को लेकर पिछले कई दिनों से प्रशासनिक गलियारों और मीडिया के एक वर्ग में चल रही डीन बदलाव की अटकलों पर विराम लग गया है। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेंद्र शुक्ल की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान ऐसा कोई भी निर्णय नहीं लिया गया। डीन डॉ. सुनील अग्रवाल अपने पद पर यथावत बने हुए हैं और बदलाव की तमाम चर्चाएं केवल अफ़वाह साबित हुई हैं।
रविवार सुबह आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में चिकित्सा शिक्षा विभाग भोपाल के वरिष्ठ अधिकारी (DME एवं CME) वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ऑनलाइन जुड़े। बैठक में हालिया विवादों या किसी धरना-प्रदर्शन पर सीधी चर्चा करने के बजाय उप मुख्यमंत्री का पूरा ध्यान अस्पताल की आंतरिक कार्यप्रणाली, चिकित्सकीय समन्वय और मरीजों को दी जाने वाली सुविधाओं को बेहतर बनाने पर केंद्रित रहा।
डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल की समीक्षा बैठक: स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने और टीम वर्क पर ज़ोर
सुबह करीब 10:30 बजे शुरू हुई इस समीक्षा बैठक में मेडिकल कॉलेज और संबद्ध अस्पतालों के सभी विभागाध्यक्ष (HOD), वरिष्ठ चिकित्सक और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने बैठक में स्पष्ट किया कि अस्पताल की साख और मरीजों के भरोसे को बनाए रखना सभी डॉक्टरों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
समीक्षा बैठक के मुख्य बिंदु:
- सामूहिक समन्वय : विभागाध्यक्षों (HODs) को निर्देश दिए गए कि वे सीनियर रेसिडेंट्स (SR) और जूनियर डॉक्टरों (JR) के साथ बेहतर तालमेल स्थापित करें ताकि ओपीडी और इमरजेंसी सेवाओं में कोई व्यवधान न आए।
- मरीजों की प्राथमिक देखभाल: अस्पताल में आने वाले हर पीड़ित को त्वरित और संवेदनशीलता के साथ इलाज मिलना चाहिए।
- मीडिया संवाद पर सतर्कता: बैठक के दौरान डिप्टी सीएम ने अस्पताल प्रशासन को सलाह दी कि वे अनधिकृत बयानों और अनावश्यक पब्लिसिटी से बचें तथा अपना पूरा ध्यान अस्पताल के सुचारू संचालन पर लगाएं।
अस्पताल अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा का अनुकरणीय सहयोग: मरीजों और व्यवस्थाओं के लिए बने सहारा
जहाँ एक ओर प्रशासनिक बैठकों में व्यवस्थाओं को लेकर मंथन जारी है, वहीं दूसरी ओर संजय गांधी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा की जनहितैषी और सहयोगी कार्यशैली की चौतरफा सराहना हो रही है। अस्पताल की व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरुस्त रखने और मरीजों की समस्याओं के त्वरित समाधान में डॉ. राहुल मिश्रा अपनी तरफ से पूरा-पूरा सहयोग प्रदान कर रहे हैं।
डॉ. राहुल मिश्रा की भूमिका और कार्यप्रणाली:
सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार: डॉ. राहुल मिश्रा हमेशा मरीजों, उनके परिजनों और अस्पताल के कर्मचारियों का विशेष ख्याल रखते हैं और हर किसी की बात ध्यानपूर्वक सुनते हैं।
प्रशासनिक सक्रियता: अस्पताल परिसर में सफाई व्यवस्था, ओपीडी की सुगमता और वार्डों में डॉक्टरों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए वे व्यक्तिगत रूप से प्रयासरत रहते हैं।
संवाद और सहयोग: कठिन परिस्थितियों में भी डॉ. राहुल मिश्रा अपनी संवाद कुशलता और सहयोग भावना से परिसर में सौहार्दपूर्ण माहौल बनाए रखते हैं, जिससे मरीजों को बड़ी राहत मिलती है।
डॉक्टरों को सख्त हिदायत: प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक और समय पर ओपीडी सेवा अनिवार्य
समीक्षा बैठक के दौरान उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने शासकीय चिकित्सकों की निजी प्रैक्टिस को लेकर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मेडिकल कॉलेज से जुड़े डॉक्टरों को अपनी प्राथमिक जिम्मेदारी सरकारी अस्पताल के प्रति निभानी होगी।
बैठकी में दिए गए कड़े निर्देश:
- प्राइवेट प्रैक्टिस पर नियंत्रण: डॉक्टर अपनी प्राइवेट प्रैक्टिस कम करें और किसी भी स्थिति में सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों को अपने निजी क्लिनिक या निजी अस्पतालों में रेफर न करें।
- निजी से सरकारी की ओर रुख: डॉक्टरों को ऐसा प्रयास करना चाहिए कि निजी क्षेत्र में भटक रहे गरीब मरीजों को भी बेहतर इलाज के लिए सरकारी अस्पताल में लाया जा सके।
- ओपीडी एवं वार्ड राउंड: सभी विभागाध्यक्ष और कंसल्टेंट्स निर्धारित समय पर ओपीडी में बैठें और नियमित रूप से भर्ती मरीजों का वार्ड राउंड लें।
सुपर स्पेशलिटी और SSMC में आधुनिक मेडिकल उपकरणों की समीक्षा और नई मांग पत्र
अस्पताल में मौजूद चिकित्सीय संसाधनों और इंफ्रास्ट्रक्चर का उल्लेख करते हुए उप मुख्यमंत्री ने कहा कि रीवा मेडिकल कॉलेज को प्रदेश के अग्रणी संस्थानों में शुमार करने के लिए सरकार कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही है।
- उपकरणों की उपलब्धता: अस्पताल में अधिकतर अत्याधुनिक मशीनें और जांच सुविधाएं उपलब्ध करा दी गई हैं।
- नया मांग पत्र : यदि किसी भी विभाग में मरीजों के इलाज के लिए किसी विशेष आधुनिक मशीन की आवश्यकता है, तो विभागाध्यक्ष तुरंत उसकी सूची और प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजें, जिसे अविलंब स्वीकृत किया जाएगा।
डिप्टी सीएम के जाने के बाद डीन ने ली विभागाध्यक्षों की समीक्षा बैठक
डिप्टी सीएम के प्रस्थान के तुरंत बाद डीन डॉ. सुनील अग्रवाल की अध्यक्षता में सभी विभागाध्यक्षों (HODs) की एक पृथक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में डिप्टी सीएम द्वारा दिए गए निर्देशों के क्रियान्वयन की रूपरेखा तय की गई। डीन ने सभी एचओडी को ओपीडी समय का कड़ाई से पालन कराने, मरीजों की शिकायतों का तत्काल निस्तारण करने और अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा के साथ समन्वय बनाकर अस्पताल प्रबंधन को और मजबूत बनाने के निर्देश दिए।