विंध्य में भारी आक्रोश : "घाव में पड़े कीड़े, छीन लिया मोबाइल..." रीवा SGMH में सतना की महिला की मौत पर भारी बवाल! कार्रवाई और मुआवजे की मांग को लेकर सड़क पर धरना

 

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) विंध्य क्षेत्र के सबसे बड़े चिकित्सा केंद्र संजय गांधी मेमोरियल हॉस्पिटल (SGMH), रीवा की साख पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। अस्पताल की कार्यप्रणाली और चिकित्सा व्यवस्था को लेकर उपजा विवाद अब थमने का नाम नहीं ले रहा है। हालिया मामले में सतना की निवासी अर्चना गुप्ता की दुखद मृत्यु के बाद अस्पताल परिसर छावनी में तब्दील हो गया और परिजनों ने जमकर विरोध-प्रदर्शन किया।

सड़क हादसे के बाद सामान्य थी हालत, 5 दिन में बिगड़ती गई स्थिति
घटनाक्रम के अनुसार, सतना जिले की रहने वाली अर्चना गुप्ता 30 अगस्त को एक स्कूटी दुर्घटना में घायल हो गई थीं, जिसके तुरंत बाद उन्हें इलाज के लिए रीवा के संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुरुआती दिनों में मरीज पूरी तरह होश में थीं और सामान्य रूप से बातचीत कर रही थीं।

परिजनों का कहना है कि भर्ती किए जाने के करीब पांच दिनों तक सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन अचानक उनकी हालत बिगड़ने लगी। मरीज को तुरंत आईसीयू (ICU-2) में स्थानांतरित किया गया और वेंटिलेटर सपोर्ट पर रख दिया गया। परिजनों के अनुसार, इस दौरान मरीज के स्वास्थ्य को लेकर उन्हें कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही थी।

गंभीर संक्रमण और मोबाइल छीनने पर भड़के परिजन
परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और ऑन-ड्यूटी चिकित्सकों पर देखरेख में घोर लापरवाही के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का दावा है कि लंबे समय तक सही से ड्रेसिंग न होने और अनदेखी की वजह से घाव में भयंकर संक्रमण फैल गया और मरीज के मुंह से कीड़े निकलने जैसी अमानवीय स्थिति पैदा हो गई।

जब बेटी नैंसी गुप्ता और अन्य परिजन आईसीयू के अंदर जाकर मरीज की स्थिति का वीडियो बनाने लगे, तो वहां मौजूद डॉक्टरों पर उनका मोबाइल फोन छीनने का आरोप लगा। इस घटना के बाद परिजनों का धैर्य जवाब दे गया और उन्होंने परिसर में नारेबाजी करते हुए जांच और जिम्मेदार कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग शुरू कर दी।

अस्पताल पर गहराता संकट: दो हफ्ते में सामने आए कई चौंकाने वाले मामले
संजय गांधी अस्पताल की साख पिछले कुछ हफ्तों से लगातार विवादों के घेरे में है। बीते 14 दिनों के भीतर अस्पताल की साख पर बट्टा लगाने वाले कई मामले एक के बाद एक सामने आ चुके हैं:

  • प्रसूता और नवजात की मौत: कल्पना मिश्रा नामक महिला और उनके नवजात शिशु की मौत के मामले में इलाज में देरी के आरोप लगे थे, जिसके बाद प्रशासन को सख्त कार्रवाई करनी पड़ी थी।
  • जीवित को मृत बताने का मामला: एक अन्य घटना में अस्पताल कर्मियों ने जीवित मरीज को कागजों पर मृत घोषित कर दिया था, जिससे भारी प्रशासनिक फजीहत हुई थी।
  • गलत इंजेक्शन का आरोप: एंटी-रेबीज का टीका लगवाने आए एक पीड़ित युवक को कथित तौर पर सर्पदंश (Anti-Venom) का इंजेक्शन लगाने का मामला भी तूल पकड़ चुका है।

अस्पताल प्रशासन की सफाई: मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत हुआ इलाज
दूसरी ओर, संजय गांधी अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मरीज को अत्यंत गंभीर अवस्था में लाया गया था और विशेषज्ञों की टीम लगातार मेडिकल प्रोटोकॉल के अनुसार ही उनका उपचार कर रही थी। प्रबंधन के मुताबिक, मरीज की स्थिति और इलाज की प्रक्रिया का विस्तृत ब्योरा मेडिकल रिकॉर्ड्स में दर्ज है। मामले की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। अर्चना के मामले में जांच के बाद ही आरोपों की सच्चाई और जिम्मेदारी तय हो सकेगी।