कलेक्टर साहिबा! फाइलों से बाहर निकलकर देखिए, आपकी नाक के नीचे 'बेलन' का सीना छलनी कर रहे रेत चोर
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश के रीवा जिले का त्योंथर विधानसभा क्षेत्र इन दिनों विकास के दावों के बीच एक काले सच से जूझ रहा है। सोहागी थाना क्षेत्र के अंतर्गत बहने वाली जीवनदायिनी बेलन नदी माफियाओं के लिए सोने की खान बन चुकी है। यहाँ अवैध रेत उत्खनन (Illegal Sand Mining) का खेल किसी अंधेरे कमरे में नहीं, बल्कि खुलेआम दिन के उजाले में चल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ट्रैक्टरों की गूँज और मशीनों की गड़गड़ाहट अब यहाँ की दिनचर्या का हिस्सा बन गई है।
हैरानी की बात यह है कि रेत निकालने के लिए अब सिर्फ पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल नहीं हो रहा। माफिया अब नाव (Boats) और भारी मशीनों का उपयोग कर नदी के बीचों-बीच से रेत निकाल रहे हैं। इससे न केवल पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुँच रही है, बल्कि नदी का प्राकृतिक स्वरूप भी बिगड़ रहा है। प्रशासन की नाक के नीचे सैकड़ों डंपर रेत बेखौफ होकर परिवहन की जा रही है, जिससे सड़कों की हालत भी जर्जर हो चुकी है।
नेता ललित मिश्रा का तीखा प्रहार: 'यह हत्या है, दुर्घटना नहीं'
स्थानीय नेता ललित मिश्रा ने इस गंभीर मुद्दे पर खनिज विभाग और जिला प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया है। मिश्रा का आरोप है कि खनिज विभाग के अधिकारियों की शह के बिना इतना बड़ा कारोबार संचालित होना नामुमकिन है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि नदी में बन रहे जानलेवा गड्ढों के कारण आए दिन ग्रामीणों की डूबने से मौत हो रही है। मिश्रा इन मौतों को केवल दुर्घटना मानने से इनकार करते हैं; उनके अनुसार, "यह सरकारी तंत्र की लापरवाही से की गई सुनियोजित हत्याएं हैं।"
बेलन नदी के किनारे मौत का जाल: गहराते गड्ढे और भूस्खलन
अवैज्ञानिक तरीके से किए जा रहे उत्खनन ने बेलन नदी के तटों को खोखला कर दिया है। नदी के तल में कहीं-कहीं 20 से 30 फीट गहरे गड्ढे बन गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जो लोग वर्षों से यहाँ नहाने या पशुओं को पानी पिलाने आते थे, अब वे डर के साये में जीने को मजबूर हैं। किनारे की मिट्टी धंसने (Landslide) के कारण भी कई हादसे हो चुके हैं। प्रशासन द्वारा इन संवेदनशील इलाकों में चेतावनी बोर्ड तक नहीं लगाए गए हैं।
खनिज विभाग की 'रस्म अदायगी' और माफियाओं के बुलंद हौसले
सोहागी के स्थानीय निवासियों ने बार-बार इस अवैध धंधे की शिकायतें उच्च अधिकारियों से की हैं। आरोप है कि जब भी दबाव बढ़ता है, खनिज विभाग की टीम मौके पर पहुँचकर एक-दो खाली ट्रैक्टरों को पकड़कर औपचारिकता पूरी कर लेती है। मुख्य सरगना और भारी मशीनें कभी भी पुलिस या प्रशासन की पकड़ में नहीं आतीं। यही कारण है कि माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे अधिकारियों को भी चुनौती देने से नहीं कतराते।
कलेक्टर प्रतिभा पाल का एक्शन मोड: क्या वाकई बदलेगी तस्वीर?
मामले की गंभीरता और बढ़ते जन आक्रोश को देखते हुए रीवा कलेक्टर प्रतिभा पाल (Collector Pratibha Pal) ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने संबंधित अनुविभागीय अधिकारियों (SDM) और खनिज विभाग को तत्काल मौके पर जाकर जांच करने और सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि यदि अवैध उत्खनन में किसी अधिकारी की संलिप्तता पाई गई, तो उन पर भी गाज गिरेगी। हालांकि, स्थानीय जनता का मानना है कि जब तक जमीनी स्तर पर बड़ी मशीनों की जब्ती और माफियाओं की गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक ये निर्देश केवल कागजी ही रहेंगे।
पर्यावरण और जनजीवन पर मंडराता खतरा
अवैध रेत खनन का असर केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है। बेलन नदी का जलस्तर लगातार गिर रहा है। जलीय जीवों का अस्तित्व खतरे में है और आसपास के गांवों का वाटर लेवल (Water Table) नीचे जा रहा है। यदि इसे जल्द नहीं रोका गया, तो आने वाली गर्मियों में त्योंथर क्षेत्र को भीषण जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
समाधान की राह: जनभागीदारी और पारदर्शी निगरानी
अवैध उत्खनन को रोकने के लिए केवल पुलिसिया कार्रवाई काफी नहीं है। इसके लिए ड्रोन निगरानी (Drone Surveillance) और चेक पोस्टों पर सीसीटीवी कैमरों की आवश्यकता है। साथ ही, ग्रामीणों की एक निगरानी समिति बनानी चाहिए जो सीधे कलेक्टर कार्यालय को रिपोर्ट कर सके।
सोहागी में अवैध रेत उत्खनन एक नासूर बन चुका है। ललित मिश्रा द्वारा उठाए गए सवाल सीधे तौर पर शासन की नियत पर प्रहार करते हैं। अब गेंद प्रशासन के पाले में है। क्या कलेक्टर प्रतिभा पाल के निर्देश माफिया राज का अंत कर पाएंगे, या बेलन नदी इसी तरह अपनों का ही खून पीती रहेगी? यह समय की मांग है कि भ्रष्टाचार की इस चेन को तोड़ा जाए और प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित किया जाए।