रीवा से भोपाल तक सनसनी! रीवा में लाचार व्यवस्था और वसूली का खुला खेल, अनीमा शर्मा और अंजलि गुप्ता पर उठे तीखे सवाल, कब सुधरेगी शहर की बदहाल व्यवस्था?

 

रीवा में ट्रैफिक और वसूली का खेल: अनीमा शर्मा और अंजलि गुप्ता पर उठे तीखे सवाल, कब सुधरेगी शहर की बदहाल व्यवस्था?

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) मध्य प्रदेश के रीवा शहर में इन दिनों यातायात व्यवस्था पूरी तरह से दम तोड़ चुकी है। हालात इस कदर बदतर हो चुके हैं कि शाम ढलते ही शहर के मुख्य मार्गों पर आम नागरिकों का चलना तो दूर, आपातकालीन सेवाओं जैसे एंबुलेंस तक के लिए निकलने की जगह नहीं बचती। यहां यह स्पष्ट कर देना आवश्यक है कि रीवा न्यूज़ मीडिया किसी भी व्यक्ति पर व्यक्तिगत रूप से कोई निराधार आरोप नहीं लगा रहा है, बल्कि हमारी यह ग्राउंड रिपोर्ट शहर के उन हालातों को बयां कर रही है जिन्हें मौके पर जाकर खुद देखा जा सकता है। यदि शहर में सब कुछ ठीक है और किसी प्रकार का अवैध लेन-देन या लापरवाही नहीं है, तो फिर प्रशासनिक सख्ती के बावजूद शहर की व्यवस्था क्यों नहीं सुधर रही है?  शहर के बीचों-बीच बेखौफ घुस रहे भारी ट्रक और अनियंत्रित ऑटो के कारण आए दिन गंभीर सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं, वहीं शहर में चोरियों और लूटपाट की घटनाओं से जनता में खौफ का माहौल है, जबकि कभी शहर में वाहनों की जांच और ऑटो चालकों के लिए खाकी वर्दी के कड़े नियम हुआ करते थे।

अनीमा शर्मा के नेतृत्व में यातायात व्यवस्था पूरी तरह फेल
शहर की ट्रैफिक कमान संभाल रही कार्यवाहक रक्षित निरीक्षक अनीमा शर्मा के कार्यक्षेत्र की हकीकत किसी से छिपी नहीं है। जयस्तंभ चौक से लेकर नया बस स्टैंड और सिरमौर चौराहा तक हर रोज लगने वाला भयंकर जाम इस बात की गवाही दे रहा है कि ट्रैफिक विभाग सिर्फ कागजों पर सक्रिय है।

ग्राउंड पर जाकर देखने पर साफ पता चलता है कि चेकिंग के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। जनता के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि अवैध वसूली या मिलीभगत नहीं है, तो फिर सड़कों पर मनमाने ढंग से खड़े होने वाले वाहन, अवैध ठेले और जाम की समस्या का स्थायी समाधान क्यों नहीं निकाला जा रहा? केवल छोटे वाहनों और मिनी ट्रकों को रोककर कार्रवाई के नाम पर औपचारिकता पूरी करना और बड़े माफियाओं को छोड़ देना इस बात की ओर इशारा करता है कि सिस्टम में कहीं न कहीं बड़ी चूक या संरक्षण का खेल चल रहा है।

सिरमौर चौराहा और शराब दुकानों के बाहर बेनकाब होती पुलिसिया कार्यप्रणाली
सिरमौर चौराहा जैसे व्यस्त इलाकों की स्थिति तो और भी दयनीय हो चुकी है। वहां खुली शराब दुकानों के बाहर सड़क पर लगने वाली भीड़, ठेले और अवैध पार्किंग के कारण हर वक्त दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। जब खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई जाती हैं और कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती, तो जनता पूछने पर मजबूर है कि आखिर ऐसी चेकिंग का क्या फायदा जो आम आदमी के लिए परेशानी का सबब बन जाए?

शराब की हउली के सामने जाम का खेल, कार्रवाई आखिर कहां?
रीवा न्यूज़ मीडिया को प्राप्त स्थानीय शिकायतों में यह आरोप भी लगाया गया है कि कुछ स्थानों पर शराब की दुकानों के आसपास ठेलों पर शराब के साथ खाने-पीने का सामान बिकता है और इसके कारण सड़क पर भीड़ जमा होती है।
लेकिन यदि किसी शराब दुकान के सामने सड़क घेरकर ठेले लग रहे हैं, वाहन खड़े हो रहे हैं और इससे यातायात बाधित हो रहा है, तो संबंधित विभागों की जिम्मेदारी बनती है कि मौके पर जाकर स्थिति की जांच करें।

यहां सवाल किसी एक अधिकारी को दोषी ठहराने का नहीं है।

सवाल यह है कि—

  • क्या मौके पर नियमित निरीक्षण होता है?
  • क्या अवैध पार्किंग पर कार्रवाई होती है?
  • क्या सड़क पर शराब पीने या खुले में शराब बिक्री की शिकायतों की जांच होती है?
  • क्या ठेले और दुकान के बाहर की गतिविधियों के लिए कोई वैध अनुमति है?

अगर नियम टूट रहे हैं तो कार्रवाई होनी चाहिए और अगर नियम नहीं टूट रहे तो प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। शाम 6 बजे के बाद बीच बाजार से गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं होता। सड़क पर अतिक्रमण और प्रशासनिक ढिलाई के कारण एंबुलेंस जैसी जरूरी गाड़ियों को भी रास्ता नहीं मिल पाता।

अंजली गुप्ता के नाम से जुड़ी वसूली के चर्चे और प्रशासनिक चुप्पी
शहर में इन दिनों अंजली गुप्ता के नाम से चल रही कथित अवैध वसूली की चर्चाओं ने तूल पकड़ लिया है। स्थानीय लोगों और व्यापारियों का कहना है कि विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियों और अवैध अड्डों से जुड़ी गतिविधियों को लेकर बाजार में तरह-तरह की चर्चाएं आम हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि इस तरह की बातें लगातार सामने आ रही हैं और स्थानीय स्तर पर असंतोष है, तो उच्च प्रशासनिक अधिकारी इस पर खामोश क्यों हैं? क्या प्रशासनिक स्तर पर इन विषयों की निष्पक्ष जांच कराकर स्थिति साफ नहीं की जानी चाहिए? यदि सब कुछ वैध और पारदर्शी है, तो जनता के सामने सच लाने से प्रशासन क्यों कतरा रहा है?

रीवा को बहाने नहीं, सख्त और पारदर्शी प्रशासनिक बदलाव चाहिए
रीवा न्यूज़ मीडिया की यह ग्राउंड रिपोर्ट किसी पर आरोप लगाने के लिए नहीं, बल्कि शहर की जमीनी हकीकत आईने की तरह सामने रखने के लिए है। 
यदि वर्तमान यातायात प्रभारी अनीमा शर्मा शहर की बिगड़ी हुई ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने में असमर्थ हैं, और यदि शहर की व्यवस्था जस की तस बनी हुई है, तो क्यों न इसकी उच्च स्तरीय समीक्षा की जाए? जनता सिर्फ यह जानना चाहती है कि अगर सब कुछ नियमों के तहत चल रहा है, तो हर रोज जाम, हादसे और अव्यवस्था क्यों देखने को मिल रही है?

रीवा में यातायात व्यवस्था को लेकर सवाल नए नहीं हैं। नए बस स्टैंड की अव्यवस्था पर पहले भी रिपोर्टें सामने आ चुकी हैं और हाल में यातायात पुलिस का चेकिंग अभियान भी शुरू हुआ है। समान थाना पुलिस द्वारा नशे के खिलाफ कार्रवाई का रिकॉर्ड भी मौजूद है। इसलिए रीवा न्यूज़ मीडिया का सवाल किसी अधिकारी को पहले से दोषी घोषित करना नहीं, बल्कि यह है कि कार्रवाई के बावजूद जमीन पर समस्या क्यों दिखाई देती है।

रीवा न्यूज़ मीडिया के 15 सीधे सवाल

  • 1. नए बस स्टैंड की पार्किंग में ठेले लगाने की अनुमति किसके आदेश से है?
  • 2. ठेला संचालकों से ली जाने वाली राशि की अधिकृत दर क्या है?
  • 3. प्रत्येक भुगतान की रसीद कौन जारी करता है?
  • 4. क्या नगर निगम के रिकॉर्ड में इन वसूलीकर्ताओं के नाम दर्ज हैं?
  • 5. बसों को सड़क पर खड़ा करके सवारी भरने से रोकने की जिम्मेदारी किसकी है?
  • 6. ऑटो के लिए निर्धारित स्टैंड कहां है?
  • 7. पार्किंग क्षेत्र का वास्तविक इस्तेमाल पार्किंग के लिए क्यों नहीं हो रहा?
  • 8. यातायात पुलिस की नियमित पेट्रोलिंग रिपोर्ट क्या कहती है?
  • 9. अनीमा शर्मा के नेतृत्व में हाल के दिनों में नए बस स्टैंड पर कितनी कार्रवाई हुई?
  • 10. कितने वाहन चालान किए गए और कितने हटाए गए?
  • 11. समान थाना क्षेत्र में नशीली दवाओं और गांजे की शिकायतों पर कितनी FIR हुईं?
  • 12. शराब दुकानों के आसपास सड़क पर लगने वाले ठेलों की वैधता कौन जांचता है?
  • 13. किसी शिकायतकर्ता ने यदि किसी अवैध गतिविधि की जानकारी पुलिस को दी, तो उस शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई?
  • 14. नगर निगम और यातायात पुलिस के बीच संयुक्त कार्रवाई की कोई नियमित व्यवस्था है?
  • 15. क्या प्रशासन नए बस स्टैंड और समान थाना क्षेत्र की संयुक्त ग्राउंड जांच कराएगा?

अनीमा शर्मा से सवाल है कि शहर की यातायात व्यवस्था को स्थायी रूप से सुधारने का प्लान क्या है।

नगर निगम से सवाल है कि पार्किंग और ठेला व्यवस्था का अधिकृत रिकॉर्ड क्या है।

अंजली गुप्ता से जुड़े वसूली के आरोपों पर संबंधित विभाग से सवाल है कि यदि शिकायतें हैं तो उनकी जांच कब होगी।

और समान थाना प्रभारी आशीष मिश्रा से सवाल है कि जिन इलाकों में नशे या अवैध गतिविधियों की शिकायतें आती हैं, वहां नियमित निगरानी और कार्रवाई का रिकॉर्ड क्या है।

क्योंकि जनता को सिर्फ यह नहीं देखना कि पुलिस ने आज कितने चालान काटे या कितने आरोपी पकड़े। जनता यह देखना चाहती है कि कल वही समस्या दोबारा सड़क पर दिखाई देती है या नहीं। रीवा में व्यवस्था तभी सुधरेगी जब कार्रवाई कागज और कैमरे से निकलकर रोजमर्रा की जमीन पर दिखाई देगी। अब समय आ गया है कि प्रशासन अपनी आंखें खोले, जमीनी हकीकत को स्वीकार करे और रीवा शहर को जाम तथा व्यवस्था के नाम पर चल रहे खेल से पूरी तरह मुक्ति दिलाए।