रीवा में नियमों का 'कत्ल': KCC के भारी वाहनों के लिए बिछी रेड कारपेट, जनता के लिए सड़कों पर बिछाए 'खाई' के जाल

 

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा शहर के यातायात प्रबंधन में एक बड़ा भेदभाव सामने आया है। जहाँ शहर के व्यापारियों और आम भारी वाहनों के लिए नो-एंट्री के नियम पत्थर की लकीर हैं, वहीं रतहरा-चोरहटा बायपास का निर्माण कर रही केसीसी (KCC) कंपनी के लिए प्रशासन ने अपनी आंखें मूंद ली हैं। साढ़े तीन सौ करोड़ के प्रोजेक्ट की आड़ में कंपनी के हैवी व्हीकल्स शहर की लाइफलाइन को तबाह कर रहे हैं।

नियमों का खुला उल्लंघन: डायवर्जन दरकिनार, शहर में सीधा प्रवेश
बायपास पर बीहर नदी के पुल की मरम्मत के चलते प्रशासन ने भारी वाहनों के लिए 30 से 40 किलोमीटर लंबा डायवर्जन रूट तय किया है। लेकिन केसीसी कंपनी इस लंबे रास्ते के बजाय करहिया-बोदाबाग मार्ग से शहर के बीचों-बीच अपने ट्रक घुसा रही है। हैरानी की बात यह है कि यह आवाजाही केवल रात में नहीं, बल्कि दिन के व्यस्त समय में भी बेरोकटोक जारी है।

सड़कों का 'खून' चूस रहे ओव्हरलोड ट्रक
कंपनी के ये भारी वाहन केवल चल नहीं रहे, बल्कि सड़कों को मलबे में तब्दील कर रहे हैं।

  • बोदाबाग से अजगरहा मार्ग: इस मार्ग की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि यहाँ अब सड़क कम और खाइयां ज्यादा नजर आती हैं।
  • करहिया से नीम चौराहा: इस महत्वपूर्ण सड़क का निर्माण सालों के इंतजार और डिप्टी सीएम के कड़े निर्देशों के बाद हुआ था। अब इन ट्रकों के तांडव से इसके भी अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। सवाल यह है कि जब केसीसी अपना काम पूरा कर चली जाएगी, तब इन सड़कों की मरम्मत कौन करवाएगा?

सुरक्षा से खिलवाड़: बिना नंबर प्लेट के भागते 'मौत के सौदागर'
एक बड़ी साजिश की बू इस बात से आती है कि कंपनी के अधिकांश ओव्हरलोड वाहनों के पीछे नंबर प्लेट ही नहीं होती। यह सीधे तौर पर किसी भी दुर्घटना के बाद पहचान छुपाकर भागने की तैयारी लगती है। घनी कॉलोनियों के बीच से ये वाहन जिस तेज रफ्तार से गुजरते हैं, उससे हर पल किसी बड़े हादसे का डर बना रहता है।

विवि थाना की 'रहस्यमयी' खामोशी
रीवा-सिरमौर मार्ग, जहाँ न्यायालय और कई प्रतिष्ठित कॉलेज स्थित हैं, वहां से ये ट्रक धड़धड़ाते हुए निकलते हैं। विवि थाना के ठीक सामने से गुजरने के बावजूद इन पर कोई कार्रवाई न होना पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। यह केवल यातायात नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि प्रशासनिक मिलीभगत का एक बड़ा उदाहरण प्रतीत होता है।