"यूजीसी नियमों के विरोध का अजब-गजब तरीका: सवर्ण नेताओं की निकाली गई प्रतीकात्मक अर्थी, सड़क पर दिखा कोहराम!"

 
रीवा में यूजीसी नियमों के खिलाफ अनोखा प्रदर्शन: सवर्ण नेताओं की निकाली अर्थी, पिंडदान कर कराया मुंडन | Rewa Protest: Unique Demonstration Against UGC Rules with Symbolic Funerals and Mundan

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो)  मध्य प्रदेश के रीवा जिले में यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के कथित विवादित नियमों के विरोध का एक बेहद अनूठा और हैरान करने वाला तरीका सामने आया है। सोमवार को शहर के भीतर सरकार और संबंधित व्यवस्था तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए प्रदर्शनकारियों ने जो मार्ग चुना, उसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। नियमों में बदलाव और इन्हें तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग को लेकर सड़कों पर उतरी भीड़ ने पारंपरिक धरने-प्रदर्शन से हटकर कुछ ऐसा किया, जिसकी चर्चा पूरे विंध्य क्षेत्र में हो रही है।

यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ अनोखा और विचलित करने वाला विरोध
हाल ही में सामने आए यूजीसी के कुछ नए दिशा-निर्देशों को लेकर समाज के एक बड़े वर्ग में गहरी नाराजगी व्याप्त है। इसी असंतोष को मुखर करने के लिए सोमवार को रीवा में तमाम लोग एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों का साफ तौर पर कहना था कि उनकी यह आपत्ति किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि उन नीतियों और नियमों के प्रति है जो शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं। सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए उन्होंने सामान्य विरोध के तरीकों को छोड़कर एक ऐसा मार्ग अपनाया जो सीधे तौर पर शासन की नींद उड़ाने के लिए काफी था।

सवर्ण नेताओं की प्रतीकात्मक अर्थी, रोना और विलाप
आक्रोश जताने के इस सिलसिले में प्रदर्शनकारियों ने सबसे पहले सवर्ण नेताओं की प्रतीकात्मक अर्थी तैयार की। इसके बाद उस अर्थी को कंधों पर उठाकर मुख्य मार्गों से होते हुए प्रदर्शन स्थल तक लाया गया। इस पूरी यात्रा के दौरान का माहौल बेहद भावुक और नाटकीय रहा। अर्थी यात्रा के साथ चल रहे कई प्रदर्शनकारी दहाड़ें मारकर और जोर-जोर से रोते-बिलखते हुए अपनी पीड़ा व्यक्त कर रहे थे। उनका रोना इस बात का प्रतीक था कि उनके अधिकारों और हितों की अनदेखी की जा रही है, जिसे वे अब और सहन करने की स्थिति में नहीं हैं।

पिंडदान और मुंडन संस्कार के जरिए जताया गया कड़ा विरोध
प्रतीकात्मक अर्थी यात्रा के अपने पड़ाव पर पहुंचने के बाद विरोध का स्तर और अधिक तीव्र हो गया। प्रदर्शन स्थल पर ही विधि-विधान के विपरीत प्रतीकात्मक रूप से पिंडदान किया गया, जो किसी नीति या व्यवस्था के अंत का संकेत माना जाता है। इसके अलावा, रोष व्यक्त करने की पराकाष्ठा तब देखने को मिली जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने मौके पर ही अपना मुंडन करा लिया। इस दौरान लगातार सरकार विरोधी और यूजीसी नियमों के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की जाती रही, जिससे पूरा इलाका गूंज उठा।

प्रदर्शनकारियों आशीष तिवारी और सुलभ मिश्रा की प्रमुख मांगें
इस अनोखे विरोध प्रदर्शन के दौरान कई प्रमुख लोगों ने अपनी बात खुलकर रखी। प्रदर्शनकारी आशीष तिवारी ने मीडिया से चर्चा करते हुए स्पष्ट किया कि यूजीसी के इन नियमों के खिलाफ लगातार विभिन्न माध्यमों से आपत्तियां दर्ज कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार और जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों तक अपनी बात प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए ही उन्हें अर्थी निकालकर, पिंडदान और मुंडन जैसे कठोर प्रतीकात्मक कदम उठाने पड़े। उनकी मुख्य मांग यही है कि यूजीसी के इन संबंधित नियमों को पूरी तरह से वापस लिया जाए और पूरे प्रकरण पर उच्च स्तर पर दोबारा विचार किया जाए।

वहीं, दूसरे प्रमुख प्रदर्शनकारी सुलभ मिश्रा ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यूजीसी के नए प्रावधानों को लेकर आमजन और युवाओं में भारी गुस्सा है। इसी जनता के दर्द और असंतोष को उजागर करने के लिए अर्थी यात्रा निकाली गई और रो-रोकर अपनी व्यथा प्रकट की गई। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि सरकार ने इस पूरे मामले को अब भी गंभीरता से नहीं लिया और समय रहते उचित निर्णय नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में यह विरोध प्रदर्शन और अधिक उग्र रूप ले सकता है।