रीवा का मशहूर 'राधा स्वामी रेस्टोरेंट' या संक्रामक बीमारियों का खुला निमंत्रण? सिरमौर चौराहे पर सरेआम जनता की सेहत का कत्ल, कुंभकर्णी नींद में सोया फूड विभाग

 

रीवा के सिरमौर चौराहे पर 'राधा स्वामी रेस्टोरेंट' में धूल और गंदगी के बीच खुलेआम बिक रहे चाउमीन, समोसा और घटिया चटनी। सोया रहा खाद्य सुरक्षा विभाग।

ऋतुराज द्विवेदी, रीवा/भोपाल। रीवा शहर का सबसे व्यस्त और धड़कता हुआ इलाका यानी सिरमौर चौराहा। यहाँ से रोजाना हजारों लोग गुजरते हैं और इसी चौराहे पर स्थित है एक नामी फूड जॉइंट—'राधा स्वामी रेस्टोरेंट'। इस रेस्टोरेंट का नाम पूरे क्षेत्र में बड़े चाव से लिया जाता है, लेकिन आज इस नाम के पीछे छिपा जो कड़वा और घिनौना सच सामने आया है, उसने पूरे रीवा वासियों को झकझोर कर रख दिया है। जिसे लोग स्वाद का ठिकाना समझ रहे थे, वह असल में संक्रामक बीमारियों का सबसे बड़ा हब बन चुका है।

अत्यंत प्रामाणिक सूत्रों और मौके से आई प्रत्यक्ष तस्वीरों से यह साफ उजागर हुआ है कि इस रेस्टोरेंट में शुद्धता, स्वच्छता और नैतिकता को पूरी तरह से डस्टबिन में फेंक दिया गया है। यहाँ आने वाले ग्राहकों को भोजन के नाम पर एक ऐसा धीमा जहर (Slow Poison) परोसा जा रहा है, जो उन्हें सीधे अस्पताल के आईसीयू (ICU) बेड तक पहुंचा सकता है। रीवा के जागरूक नागरिक अब इस बात को लेकर बेहद गुस्से में हैं कि आखिर इतने बड़े नामी प्रतिष्ठान में जनता की जान से खिलवाड़ करने की हिम्मत कैसे हुई?

धूल के गुबार और गाड़ियों के धुएं के बीच सजी चाउमीन-चाट: घंटे भर की 'धूल-पॉलिश' के बाद प्लेट में परोसने का खेल
राधा स्वामी रेस्टोरेंट की सबसे बड़ी और खौफनाक लापरवाही इसके काउंटर मैनेजमेंट में देखने को मिलती है। रेस्टोरेंट मुख्य सड़क के बिल्कुल किनारे स्थित है, जहां 24 घंटे भारी वाहनों, बसों, ऑटो और दोपहिया वाहनों का रेला लगा रहता है। इन वाहनों से निकलने वाली काली कार्बनिक गैसें और उड़ने वाली धूल सीधे रेस्टोरेंट के बाहर खुले में सजे चाउमीन, मंचूरियन, समोसा, कचौड़ी और आलू बंडा के ऊपर जाकर जमती है।

तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि फास्ट फूड और पारंपरिक स्नैक्स को ढकने के लिए किसी भी ढक्कन, कांच के कैबिनेट्स या नेट का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। कड़ाही में जो चाउमीन घंटों पहले बनकर तैयार हो जाती है, वह हवा में उड़ते बैक्टीरिया, मक्खियों और धूल कणों को सोखती रहती है। जब कोई ग्राहक ऑर्डर देता है, तो इसी 'धूल-धूसरित' और दूषित चाउमीन को थोड़ा सा गर्म करके चमचमाती प्लेट में सजाकर दे दिया जाता है। यह सीधे तौर पर जनता की आंतों में इंफेक्शन का जाल बिछाने जैसा है।

सड़ी-गली सब्जियों का इस्तेमाल और खटारा मैदे का मायाजाल: क्या खा रहा है रीवा?
अंदरूनी सूत्रों की मानें तो इस रेस्टोरेंट के किचन की हालत और भी ज्यादा बदतर है। समोसा, कचौड़ी और आलू बंडा बनाने के लिए जिस मैदे का इस्तेमाल किया जा रहा है, उसकी क्वालिटी बेहद घटिया और दोयम दर्जे की है। कई बार रात का बचा हुआ बासी मैदा सुबह के ताजे लॉट में मिलाकर खपा दिया जाता है। चाउमीन और मंचूरियन में डाली जाने वाली पत्तागोभी, शिमला मिर्च और प्याज जैसी सब्जियां मंडी के उस हिस्से से औने-पौने दाम पर खरीदी जाती हैं, जो सड़ने की कगार पर होती हैं।

सब्जियों को बिना ढंग से धोए, उसी गंदगी के बीच सीधे कतर दिया जाता है। जो ग्राहक बड़े चाव से यहाँ का स्वाद ले रहे हैं, अगर वे एक बार इस रेस्टोरेंट के बैकस्टेज यानी किचन के भीतर कदम रख लें, तो शायद जीवन में कभी यहाँ का पानी पीना भी पसंद न करें। गंदगी के इस अंबार के बीच तैयार होने वाला यह भोजन रीवा के युवाओं और बच्चों के लीवर और पाचन तंत्र को पूरी तरह से खोखला कर रहा है।

घटिया और एसिडिक 'मीठी चटनी' का जानलेवा तड़का: सैंपल की तत्काल जांच होना अनिवार्य
इस रेस्टोरेंट की एक और सबसे घिनौनी हकीकत यहाँ परोसी जाने वाली 'मीठी चटनी' है। समोसे और कचौड़ी के साथ जो लाल रंग की मीठी चटनी ग्राहकों को मुफ्त में असीमित मात्रा में दी जाती है, उसकी क्वालिटी इतनी सड़ी हुई और घटिया है कि वह सीधे पेट में एसिडिटी, अल्सर और फूड पॉइजनिंग को जन्म देती है। आरोप है कि इस चटनी को बनाने के लिए सड़े हुए अमचूर, केमिकल कलर्स (जो फूड ग्रेड के नहीं होते) और भारी मात्रा में कृत्रिम मिठास (Saccharin) का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि लागत को कम से कम रखा जा सके।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटिया और केमिकल युक्त चटनी का लगातार सेवन करने से आंतों में घाव हो सकते हैं और लंबे समय में यह कैंसर जैसी घातक बीमारियों का कारण भी बन सकती है। नागरिकों की पुरजोर मांग है कि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को इस रेस्टोरेंट में मिलने वाली मीठी चटनी, हरी चटनी और सॉस के सारे सैंपल्स को तुरंत जब्त कर उन्हें भोपाल की केंद्रीय प्रयोगशाला (Food Testing Lab) भेजना चाहिए, ताकि इसकी वैज्ञानिक सच्चाई जनता के सामने आ सके।

रीवा का खाद्य सुरक्षा विभाग (Food Dept) गहरी नींद में: क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार है?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा विलेन रीवा का खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग (Food Safety Department) नजर आ रहा है। यह विभाग शहर के व्यस्ततम चौराहों पर चल रहे इन मौत के कुओं से पूरी तरह बेखबर बना हुआ है। सवाल यह उठता है कि जब सिरमौर चौराहे जैसी वीआईपी लोकेशन पर, जहाँ से दिन में दस बार प्रशासनिक अधिकारियों की गाड़ियां गुजरती हैं, वहाँ खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, तो आरटीओ और फूड विभाग के इंस्पेक्टर कहाँ सो रहे हैं?

जनता के बीच यह चर्चा बेहद गर्म है कि फूड विभाग की यह खामोशी मुफ्त की नहीं है। आरोप लग रहे हैं कि बड़े रेस्टोरेंट संचालकों से हर महीने एक निश्चित 'सुविधा शुल्क' या मंथली का नजराना अधिकारियों की जेब तक पहुंचता है, जिसके बदले इन होटल वालों को जनता को 'कीड़ा-मकोड़ा' समझकर कुछ भी खिलाने का लाइसेंस मिल जाता है। विभाग केवल त्योहारों (जैसे दिवाली या होली) पर दो-चार दुकानों पर छापे मारकर अपनी पीठ थपथपा लेता है, लेकिन साल के बाकी 11 महीने इन रेस्टोरेंट्स की मनमानी पर पूरी तरह से आंखें मूंद लेता है।

जानिए कानूनी प्रावधान: इस घोर लापरवाही पर राधा स्वामी रेस्टोरेंट पर क्या हो सकती है कार्रवाई?
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के कड़े नियम और 'खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2006' के तहत इस प्रकार की लापरवाही एक गंभीर और गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आ सकती है। यदि रीवा प्रशासन और फूड विभाग निष्पक्षता से कार्रवाई करे, तो इस रेस्टोरेंट पर निम्नलिखित कानूनी डंडा चल सकता है:

संभावित कानूनी कार्रवाइयों की सूची:
1. धारा 54 (अस्वच्छ परिस्थितियों में भोजन का निर्माण या बिक्री): इसके तहत रेस्टोरेंट संचालक पर सीधे ₹1 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
2. धारा 59 (असुरक्षित भोजन परोसना): यदि भोजन के सैंपल फेल होते हैं और वह इंसानी सेहत के लिए 'असुरक्षित' पाया जाता है, तो संचालक को 6 महीने से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा और ₹5 लाख तक का जुर्माना हो सकता है।
3. FSSAI लाइसेंस निलंबन: स्वच्छता मानकों (Hygiene Guidelines) का पालन न करने पर रेस्टोरेंट का लाइसेंस तुरंत निरस्त कर दुकान को सील (Seize) किया जा सकता है।
4. धारा 272/273 (IPC/BNS): मिलावटी और हानिकारक खाद्य पदार्थ बेचने के जुर्म में पुलिस सीधे एफआईआर दर्ज कर संचालक को गिरफ्तार कर सकती है।

न ग्लव्स, न कैप और न ही फायर सेफ्टी: राधा स्वामी रेस्टोरेंट में खुलेआम उड़ाई जा रही हैं FSSAI गाइडलाइंस की धज्जियां!
रेस्टोरेंट की लापरवाही सिर्फ धूल और गंदगी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यहाँ काम करने वाले कर्मचारियों की कार्यप्रणाली भी बेहद हैरान करने वाली है। ग्राउंड जीरो से मिली जानकारी के अनुसार, रेस्टोरेंट के पास आग जैसी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए कोई भी फायर सेफ्टी (Fire Safety) के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं, जो यहाँ आने वाले सैकड़ों ग्राहकों की जान को सीधे जोखिम में डालता है। इतना ही नहीं, शुद्धता और स्वच्छता की हर गाइडलाइन को ताक पर रखते हुए यहाँ भोजन परोसने वाले और बनाने वाले कर्मचारी न तो हाथों में ग्लव्स (Apreon/Gloves) पहनते हैं और न ही सिर पर शेफ कैप (Topi) का इस्तेमाल करते हैं। बिना किसी साफ-सफाई के, सीधे गंदे हाथों से ही समोसे, कचौड़ी और चाउमीन जैसी खाद्य सामग्रियां ग्राहकों की प्लेटों में सर्व (Serve) कर दी जाती हैं। यह घोर लापरवाही साफ दर्शाती है कि यहाँ नियमों का पालन केवल कागजों तक सीमित है और जनता की सेहत इनके लिए कोई मायने नहीं रखती।

रीवा की जनता से अपील: "अगर अपनी और परिवार की जान है प्यारी, तो आज ही सुधारें अपनी आदत"
दैनिक रीवा न्यूज़ मीडिया और बघेली मीडिया के माध्यम से हम रीवा की सम्मानित और जागरूक जनता से यह पुरजोर अपील करते हैं कि बाहर का खाना खाते समय केवल 'नाम और शो-शा' न देखें। अगर आप या आपके बच्चे सिरमौर चौराहे के इस राधा स्वामी रेस्टोरेंट में चाउमीन, समोसा, कचौड़ी या चाट खाने जा रहे हैं, तो एक बार रुकें, सोचें और अपनी आंखों से वहां उड़ती धूल और गंदगी के अंबार को देखें। आपकी एक पल की जीभ का स्वाद आपके पूरे परिवार को मौसमी बीमारियों, टायफाइड, पीलिया (Jaundice) और गैस्ट्रोएंटेराइटिस जैसी खतरनाक बीमारियों के दलदल में धकेल सकता है।

अब समय आ गया है कि जनता खुद जागरूक हो और ऐसे गैर-जिम्मेदार रेस्टोरेंट संचालकों का पूरी तरह से सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार करे। जब तक ये लोग स्वच्छता के कड़े इंतजाम नहीं करते और ग्राहकों की सेहत को प्राथमिकता नहीं देते, तब तक इनकी दुकानों पर ताला लगा रहना ही रीवा के हित में है। अब देखना यह है कि इस गंभीर खुलासे के बाद रीवा जिला कलेक्टर और फूड कमिश्नर कब अपनी कुंभकर्णी नींद से जागते हैं और इस 'राधा स्वामी रेस्टोरेंट' पर क्या कड़ा एक्शन लेते हैं!