रीवा की बेपटरी होती ट्रैफिक व्यवस्था: बिना रूट और रजिस्ट्रेशन के दौड़ रहे ऑटो-ई-रिक्शा, यातायात कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल?

 

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) मध्य प्रदेश के विंध्य अंचल के प्रमुख केंद्र रीवा शहर की यातायात व्यवस्था इन दिनों पूरी तरह से चरमरा चुकी है। त्योहारों का सीजन हो या आम दिन, शहर के प्रमुख चौराहों: विशेषकर स्टैचू चौराहा,सिरमौर चौराहा, खन्ना चौराहा, पुराना और नया बस स्टैंड मुख्य बाजार शहर का हदय शिल्पी प्लाजा का हाल किसी से छिपा नहीं है। सड़कों पर वाहनों का अनियंत्रित रेला, नियमों की अनदेखी और प्रशासनिक उदासीनता ने आम जनता का जीना मुहाल कर दिया है। दिल्ली या अन्य महानगरों की तर्ज पर यातायात के नियमों का सख्ती से पालन कराने के बजाय रीवा में व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है। आरटीओ (RTO) और यातायात विभाग की लचर कार्यप्रणाली के कारण शहर की सड़कें अराजकता का अखाड़ा बन चुकी हैं, जिसका खामियाजा रोजाना आम नागरिकों, महिलाओं और विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। 

शहर में यातायात पुलिस की कार्यशैली अब पूरी तरह से सवालों के घेरे में आ चुकी है। जय स्तंभ चौक से लेकर समान थाने तक का इलाका इन दिनों नियमों के पालन का नहीं, बल्कि अवैध वसूली और खुली लूट का मुख्य केंद्र बन चुका है। शहरभर में ई-चालान और चेकिंग के नाम पर आम चालकों को प्रताड़ित किया जा रहा है, जबकि दूसरी ओर बड़े और भारी वाहनों को शहर के भीतर बेधड़क पार्क कराने और संचालन की एवज में हर महीने मोटी रकम वसूली जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे व्यवस्थागत भ्रष्टाचार को संरक्षण देने वाले कुछ खास लोग पर्दे के पीछे से खेल चला रहे हैं: अपनी फर्जी वाहवाही लूटने और प्रशासनिक नाकामी को छिपाने के लिए कुछ 'छुटभैया तत्वों' और दलालों का भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है। यातायात महकमे की कमान संभाल रहीं अनिमा शर्मा पर गंभीर आरोप हैं कि वे शहर के बड़े और वरिष्ठ पत्रकारों से पूरी तरह दूरी बनाकर रखती हैं ताकि उनकी कारगुजारियों की असल परतें मीडिया के सामने न खुल सकें। इस पूरे भ्रष्टाचार, वसूली रैकेट और विभाग की अंदरूनी मिलीभगत का पर्दाफाश करने के लिए दैनिक रीवा न्यूज़ मीडिया जल्द ही लाने जा रहा है अब तक का सबसे बड़ा और हिला देने वाला खुलासा!

ट्रांसपोर्ट नगर में रोड पर क्रेन, यात्री बस, जेसीबी का कब्ज़ा 

ऑटो और ई-रिक्शा का संचालन: बिना रूट और रजिस्ट्रेशन के दौड़ते वाहन
रीवा शहर में मौजूदा समय में सबसे बड़ी समस्या ऑटो-रिक्शा और ई-रिक्शा का बेलगाम संचालन है। स्थिति यह है कि: शहर में न तो ऑटो के लिए कोई तय रूट है और न ही ई-रिक्शा के संचालन का कोई स्पष्ट नियम। कौन सा वाहन किस नंबर से किस रूट पर चलेगा, इसका कोई रिकॉर्ड प्रशासन के पास नहीं है।

वही बड़ी संख्या में ऐसे ई-रिक्शा और ऑटो धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं जिनका कोई वैध रजिस्ट्रेशन ही नहीं है। बता दें की मुख्य सड़कों से लेकर तंग गलियों तक हर रूट पर एक साथ ऑटो, ई-रिक्शा, भारी बाइक, ट्रक और बसें बेतरतीब तरीके से दौड़ती नजर आती हैं, जिससे हर वक्त जाम की स्थिति बनी रहती है।

सुरक्षा पर बड़ा सवाल: शहर के बंद पड़े सीसीटीवी कैमरे और बढ़ता अपराध
यातायात व्यवस्था के कमजोर होने का सीधा असर शहर की कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर पड़ रहा है। एक समय था जब रीवा शहर में जगह-जगह बड़े-बड़े बोर्ड पर लिखा होता था— "आप तीसरी आँख की नजर में हैं", लेकिन आज वे तीसरी आंखें (CCTV Cameras) या तो खराब हैं या पूरी तरह बंद पड़ी हैं।

आपको बता दें की बिना रजिस्ट्रेशन और बिना नंबर प्लेट के दौड़ रहे ई-रिक्शा व ऑटो असामाजिक तत्वों के लिए शरणस्थली बनते जा रहे हैं। वही अगर शहर में यदि मोबाइल चोरी, महिलाओं के बैग पार होने या अन्य छोटी-मोटी घटनाएं होती हैं, तो वाहन का नंबर या पहचान न होने के कारण पुलिस के लिए अपराधियों तक पहुंचना लगभग असंभव हो जाता है।

जिम्मेदारी किसकी?: यदि शहर की सड़कों पर सुरक्षा और यातायात नियंत्रण की जिम्मेदारी पुलिस और प्रशासन की नहीं है, तो फिर आम जनता अपनी सुरक्षा के लिए किससे गुहार लगाए?

यातायात पुलिस की कार्यशैली और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
शहर की खस्ताहाल ट्रैफिक व्यवस्था के पीछे विभागीय सुस्ती और भ्रष्टाचार को सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। स्थानीय नागरिकों और सूत्रों के अनुसार: शहर में लगाए गए ट्रैफिक सिग्नल केवल शोपीस बनकर रह गए हैं। उनका कोई पालन नहीं होता और न ही यातायात कर्मी अपनी ड्यूटी पर मुस्तैद दिखते हैं। यातायात थाने के ठीक सामने शराबखोरी के अड्डे संचालित होने की बातें सामने आती हैं। आरोप है कि यातायात पुलिस के जवान मुख्य चौराहों पर ट्रैफिक सुधारने के बजाय बाईपास और अन्य स्थानों पर वसूली और उगाही में व्यस्त रहते हैं। 

सूत्रों का दावा है कि बड़ी पुल क्षेत्र में सुबह से शाम तक अलग-अलग बसें खड़ी रहती हैं, जिनसे रोजाना अवैध रूप से पैसों की वसूली की जाती है। यह पैसा किसके पास जा रहा है, यह जांच का गंभीर विषय है। जनता सवाल उठा रही है कि अपने कार्य के प्रति लापरवाह अधिकारियों और थाना प्रभारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है? सुबेदार स्तर के अधिकारियों द्वारा बरती जा रही लापरवाही के कारण ही आज रीवा की ट्रैफिक व्यवस्था आईसीयू में पहुंच चुकी है।

ई-चालान की वैधता कैसे जाँचें? (ऑनलाइन और ऑफलाइन सत्यापन प्रक्रिया)
रीवा में यातायात नियमों के अनुपालन और पुलिस कार्रवाई को लेकर अक्सर असमंजस की स्थिति बनी रहती है। यदि पुलिसकर्मी ने मशीन से आपका चालान काटा है, और आपको यह संदेह है कि वह चालान सरकारी रिकॉर्ड में सही तरीके से दर्ज हुआ है या नहीं, तो निम्नलिखित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करें:

चालान नंबर की जाँच और रिकॉर्ड मिलान

  • सबसे पहले पुलिसकर्मी द्वारा दी गई रसीद पर दर्ज चालान नंबर (Challan Number) को ध्यान से देखें या नोट कर लें।
  • आधिकारिक परिवहन या ई-चालान पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन रिकॉर्ड में चालान की जानकारी का मिलान करें।
  • यदि ऑनलाइन रिकॉर्ड में चालान शो नहीं होता है, तो अपनी रसीद के साथ रीवा यातायात पुलिस कार्यालय में जाकर उसका भौतिक सत्यापन (Verification) करवा सकते हैं।

भुगतान की रसीद हमेशा सुरक्षित रखें। ऑनलाइन भुगतान की सुविधा और शिकायत दर्ज करने का विकल्प आधिकारिक सरकारी पोर्टल पर उपलब्ध रहता है। किसी भी तकनीकी सहायता के लिए केंद्रीय ई-चालान हेल्पडेस्क नंबर (0120-4925505) पर संपर्क किया जा सकता है।

व्यवस्था सुधारने के लिए कड़े प्रशासनिक कदमों की जरूरत
रीवा शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए अब सतही दावों से काम नहीं चलेगा, बल्कि ठोस और कड़े प्रशासनिक कदमों की आवश्यकता है: सभी ऑटो और ई-रिक्शा का शत-प्रतिशत रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया जाए और उनके लिए रूट चार्ट तय हो। दिल्ली की तर्ज पर डिजिटल और सख्त चालान प्रणाली लागू की जाए ताकि नियम तोड़ने वालों में खौफ हो। शहर के सभी प्रमुख चौराहों और मार्गों पर बंद पड़े सीसीटीवी कैमरों को तुरंत दुरुस्त किया जाए। 

यातायात संचालन में लापरवाही बरतने वाले कर्मियों और अवैध वसूली में लिप्त लोगों पर सख्त विभागीय कार्रवाई की जाए। यदि समय रहते प्रशासन ने कदम नहीं उठाया, तो रीवा की ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी, जिसका नुकसान अंततः शहर की आम जनता को उठाना पड़ेगा।