सज्जन सिंह वर्मा का तंज: "शिवराज से लेकर राजेंद्र शुक्ल तक... अधिकारी किसी की नहीं सुनते!" कैलाश विजयवर्गीय को दी अनोखी सलाह
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर नौकरशाही (ब्यूरोक्रसी) और राजनेताओं के बीच तालमेल का मुद्दा गरमा गया है। पूर्व मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता सज्जन सिंह वर्मा ने रीवा दौरे के दौरान प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी सरकार पर तीखा प्रक्षेप किया है। उनका यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब शासन व्यवस्था के भीतर मंत्रियों और अधिकारियों के बीच खींचतान की खबरें अक्सर सुर्खियों में रहती हैं। वर्मा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मौजूदा समय में सूबे के भीतर प्रशासनिक अमला इतना बेलगाम हो चुका है कि अब खुद सरकार के मंत्री भी खुलकर यह शिकायत करने लगे हैं कि अधिकारी उनकी बात सुनने को तैयार नहीं हैं।
शिवराज से लेकर राजेंद्र शुक्ल तक का जिक्र: सरकार के भीतर खींचतान का दावा
अपनी बात को वजन देने के लिए कांग्रेस नेता ने मध्य प्रदेश के कई कद्दावर और वरिष्ठ नेताओं का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से लेकर वर्तमान उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल तक का हवाला देते हुए राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए।
सज्जन वर्मा ने कहा कि जब पार्टी के पूर्व मुखिया और वर्तमान में इतने अहम पदों पर बैठे वरिष्ठ नेता तक संगठन या मंचों पर अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर अपनी पीड़ा व्यक्त कर चुके हैं, तो आम मंत्रियों की क्या ही बिसात होगी। उनके अनुसार, यह स्थिति इस बात का प्रमाण है कि शासन चलाने वाले राजनेताओं के मुकाबले प्रशासनिक अधिकारी ज्यादा ताकतवर महसूस कर रहे हैं और वे जनप्रतिनिधियों के निर्देशों को नजरअंदाज कर रहे हैं।
कैलाश विजयवर्गीय पर तंज: मंत्री की बात अनसुनी होने पर ली चुटकी
इस दौरान सज्जन सिंह वर्मा ने प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का नाम लेकर एक तीखा और सियासी तंज भी कसा। उन्होंने कहा कि विजयवर्गीय जैसे प्रभावशाली मंत्री भी सार्वजनिक तौर पर कई बार अपनी ही सरकार के भीतर अधिकारियों द्वारा अनदेखी किए जाने का दर्द बयां कर चुके हैं।
वर्मा ने तंज कसते हुए कहा, “कैलाश जी भी तीन बार अपनी शिकायत दर्ज करा चुके हैं और जनता व पार्टी के सामने अपना रोना रो चुके हैं। यदि इतने वरिष्ठ और ताकतवर मंत्री की भी कोई अधिकारी सुध नहीं ले रहा है, तो उन्हें अब राजनीति छोड़कर अपने द्वारा बनाए गए पितृ पर्वत स्थित मंदिर में जाकर महामंडलेश्वर की गद्दी संभाल लेनी चाहिए।” उनके इस व्यंग्य भरे बयान ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है।
अफसरशाही बनाम जनप्रतिनिधि: मध्य प्रदेश की राजनीति में नया भूचाल
सज्जन सिंह वर्मा के इन बयानों ने एक बार फिर उस बहस को हवा दे दी है, जिसमें यह सवाल उठाया जाता है कि क्या मध्य प्रदेश में चुनी हुई सरकार पर नौकरशाही हावी हो रही है। जब सत्ता पक्ष के ही दिग्गज नेता और मंत्री दबी जुबान या खुलकर प्रशासनिक असहयोग की बात स्वीकार करते हैं, तो विपक्ष को सरकार को घेरने का पूरा मौका मिल जाता है। अब देखना यह होगा कि कांग्रेस नेता के इस तीखे कटाक्ष पर भाजपा के इन वरिष्ठ नेताओं या पार्टी संगठन की ओर से क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है।