दो बार इंटरव्यू से बाहर, फिर भी नहीं मानी हार: शादी के बाद भी जारी रखा संघर्ष और अब बनीं कलेक्टर; मिलिए रीवा की लाडली समीक्षा से

 
रीवा और मऊगंज की समीक्षा द्विवेदी ने UPSC 2025 में 56वीं रैंक हासिल की। IIT कानपुर की छात्रा और डगदुआ की बहू ने बढ़ाया विंध्य का मान। पूरी सफलता की कहानी।

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/मऊगंज। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) 2025 के परिणाम घोषित होते ही विंध्य क्षेत्र खुशियों से सराबोर हो गया है। रीवा और नवगठित मऊगंज जिले की बेटी समीक्षा द्विवेदी ने इस प्रतिष्ठित परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 56वीं रैंक प्राप्त कर पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है। समीक्षा की इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने साबित कर दिया है कि यदि इरादे फौलादी हों, तो मंजिल कदम चूमती है।

हार नहीं मानी: 8 अंकों के फासले को सफलता में बदला
समीक्षा की यह जीत रातों-रात नहीं मिली है, बल्कि इसके पीछे 5 वर्षों का कड़ा संघर्ष छिपा है। उन्होंने इससे पहले भी दो बार साक्षात्कार (Interview) तक का सफर तय किया था, लेकिन अंतिम चयन सूची में जगह नहीं बना पाई थीं। पिछले वर्ष तो वे महज 8 अंकों से पीछे रह गई थीं। इस असफलता ने उन्हें तोड़ा नहीं, बल्कि और अधिक मजबूती के साथ वापस लौटने की प्रेरणा दी। आज उनकी मेहनत 'IAS' के रूप में सबके सामने है।

इंदौर से शुरू हुआ सफर, IIT कानपुर में दी नई उड़ान
समीक्षा द्विवेदी की शैक्षणिक यात्रा काफी मेधावी रही है। उनकी प्रारंभिक शिक्षा मिनी बॉम्बे कहे जाने वाले इंदौर से हुई। इसके बाद उन्होंने चेन्नई के प्रतिष्ठित SRM इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी से बी.टेक (B.Tech) की डिग्री ली। अपनी बौद्धिक क्षमता को और विस्तार देते हुए उन्होंने आईआईटी कानपुर (IIT Kanpur) से एमबीए (MBA) किया। तकनीकी और प्रबंधन की शिक्षा के बाद उन्होंने देश सेवा के लिए सिविल सेवा का रास्ता चुना।

मऊगंज का डगदुआ और रीवा का मान: परिवार में गौरव का क्षण
समीक्षा का पैतृक गांव मऊगंज जिले का डगदुआ है। उनके पिता श्रीनिवास द्विवेदी वर्तमान में मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, भोपाल में क्षेत्रीय अधिकारी (Regional Officer) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। समीक्षा शादीशुदा हैं और उनके पति बैंक ऑफ इंडिया में कार्यरत हैं। उनके मामा गोपाल कृष्ण तिवारी ने बताया कि समीक्षा बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल थीं और आज उन्होंने पूरे परिवार के साथ-साथ रीवा और मऊगंज का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।

युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत
समीक्षा की सफलता उन अभ्यर्थियों के लिए एक मिसाल है जो असफलताओं से घबराकर पीछे हट जाते हैं। शादी के बाद की जिम्मेदारियों और पिछली असफलताओं के बोझ को पीछे छोड़ते हुए उन्होंने जिस तरह 56वीं रैंक हासिल की, वह सराहनीय है।