"APSU में घपला! 16 कर्मचारियों को बांटे जा रहे फर्जी प्रमोशन, विरोध करने पर जांच अधिकारी ही हटाई गईं—पढ़ें अंदर की पूरी कहानी!"
अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय (एपीएसयू) रीवा में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की विभागीय पदोन्नति (DPC) की प्रक्रिया गंभीर विवादों और धांधली के साए में आ गई है। गड़बड़ियों को अंजाम देने के लिए विवि प्रशासन ने नियमों को ताक पर रखकर जांच समिति की संरचना ही बदल दी है। बताया जा रहा है कि फर्जी अंकसूचियों और नियम विरुद्ध पदोन्नतियों पर सख्त रुख अपनाने वाली समिति की कमान संभाल रही वरिष्ठ प्रोफेसर को अचानक हटाकर मेडिकल लीव पर भेज दिया गया और उनके स्थान पर कुलपति के करीबी माने जाने वाले प्राध्यापकों को जिम्मेदारी सौंप दी गई है।
सख्ती दिखाते ही कमेटी की संयोजक प्रो. शुभा तिवारी की छुट्टी
राज्य शासन के दिशा-निर्देशों के तहत कर्मचारियों की पदोन्नति जांच के लिए कुलपति प्रो. राजेंद्र प्रसाद कुड़रिया के निर्देशानुसार कुलसचिव द्वारा एक विशेष छानबीन समिति गठित की गई थी। इस समिति का नेतृत्व अंग्रेजी विभाग की आचार्य प्रो. शुभा तिवारी को सौंपा गया था।
जांच के दौरान जब 16 कर्मचारियों के दस्तावेजों की पड़ताल हुई, तो कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। प्रो. शुभा तिवारी ने गलत और अवैध तरीके से दिए जाने वाले प्रमोशन की अनुशंसा करने से स्पष्ट मना कर दिया और आपत्ति दर्ज कराई। पदोन्नति की फाइल अटकते देख विवि प्रबंधन ने आनन-फानन में रणनीति बदलते हुए प्रो. शुभा तिवारी को समिति से बाहर कर दिया। उनके स्थान पर रसायन शास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. आर.एन. पटेल को नया संयोजक बनाया गया है, जबकि शारीरिक शिक्षा विभाग के संचालक डॉ. रामभूषण मिश्र को नए सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। कैंपस में चर्चा है कि नई समिति के अधिकांश सदस्य विवि प्रशासन की पसंद के हैं, ताकि पूर्व में जताई गई आपत्तियों को दरकिनार कर विवादास्पद फाइलों को हरी झंडी दी जा सके।
उर्दू बोर्ड की फर्जी मार्कशीट और बिना अनुमति ली गई डिग्रियों का खेल
जांच रिपोर्ट में सबसे बड़ा खुलासा कर्मचारियों की शैक्षणिक योग्यता को लेकर हुआ है:
- संदिग्ध अंकसूचियां: दावेदारी पेश करने वाले लगभग 16 कर्मचारियों ने 12वीं कक्षा की अंकसूची फर्जी/अमान्य उर्दू बोर्ड से संलग्न की है।
- अवैध उच्च शिक्षा: कई चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों ने नौकरी में रहते हुए स्नातक और अन्य डिग्रियां हासिल कर लीं, लेकिन इसके लिए विवि प्रशासन से न तो नियमानुसार अनुमति ली गई और न ही अध्ययन के लिए अवकाश स्वीकृत कराया गया।
इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पदोन्नति ऐंठने की कोशिश की जा रही थी, जिसे पूर्व संयोजक ने खारिज कर दिया था।
डिप्टी रजिस्ट्रार का अपमान करने वाले कर्मचारी नेता को भी फायदा पहुंचाने की तैयारी
प्रमोशन की इस रेस में सबसे चौंकाने वाला नाम विवि के उस चर्चित कर्मचारी नेता (बुद्धसेन) का है, जिस पर सेवानिवृत्ति के दिन तत्कालीन डिप्टी रजिस्ट्रार लाल साहब सिंह का गंभीर अपमान करने और जूतों की माला पहनाने का आरोप लगा था।
तत्कालीन अपर मुख्य सचिव (ACS) के निर्देश पर इस शर्मनाक घटना की जांच प्रो. सी.डी. सिंह से कराई गई थी। जांच रिपोर्ट वर्षों पहले सौंप दी गई थी, लेकिन प्रशासनिक शह के कारण आज तक लिफाफा खोला ही नहीं गया। अब कार्रवाई करने के बजाय ऐसे दागी कर्मचारी नेता को भी पदोन्नत करने की पृष्ठभूमि तैयार की जा चुकी है।