रीवा में सनसनी! प्रसूता की मौत पर बर्खास्त डॉ. सोनल अग्रवाल को हाईकोर्ट से बड़ा झटका; 20 नवंबर तक बढ़ी मुश्किलें!

 

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान रीवा स्थित श्याम शाह मेडिकल कॉलेज (Shyam Shah Medical College) से बर्खास्त की गईं स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ. सोनल अग्रवाल की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अपनी सेवा समाप्ति के आदेश को चुनौती देते हुए उन्होंने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहां सुनवाई के दौरान अदालत ने उन्हें फिलहाल किसी भी प्रकार की राहत देने से इनकार कर दिया है। इसके चलते 16 सितंबर को जारी किया गया उनका बर्खास्तगी आदेश अभी भी पूरी तरह प्रभावी बना हुआ है। इस संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल मामले में अदालत ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है और अगली सुनवाई के लिए आगामी 20 नवंबर की तारीख निर्धारित की है।

क्या है पूरा मामला और क्यों की गई थी सेवा समाप्ति की कार्रवाई?
यह पूरा कानूनी विवाद रीवा के सुप्रसिद्ध संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल में हुई एक दुखद घटना से जुड़ा है। कुछ समय पूर्व अस्पताल में इलाज के दौरान प्रसूता कल्पना मिश्रा और उनके नवजात शिशु की अचानक मौत हो गई थी। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद अस्पताल की चिकित्सकीय व्यवस्था, कार्यप्रणाली और ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों की भूमिका पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए थे।

परिसर में उपजे भारी आक्रोश और प्रशासनिक दबाव के बाद, श्याम शाह मेडिकल कॉलेज की कार्यकारिणी समिति की उच्चस्तरीय बैठक में लिए गए निर्णय के आधार पर 16 सितंबर को डॉ. सोनल अग्रवाल की सेवाएं पूरी तरह समाप्त कर दी गईं। कॉलेज प्रशासन द्वारा जारी किए गए आदेश में यह भी विशेष रूप से उल्लेख किया गया था कि उन्हें भविष्य में किसी भी प्रकार की शासकीय या स्वशासी सेवा के लिए पूरी तरह अयोग्य घोषित किया जाता है।

2023 के विभागीय मामलों और निलंबन की पृष्ठभूमि
प्राप्त प्रशासनिक जानकारियों के अनुसार, डॉ. सोनल अग्रवाल के खिलाफ की गई यह कड़ी कार्रवाई केवल हालिया घटना तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसके पीछे साल 2023 में सामने आए कुछ पुराने विभागीय मामले और शिकायतें भी जुड़ी हुई थीं। पूर्व में प्राप्त शिकायतों की गहन जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया था, जिसने डॉ. सोनल अग्रवाल के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की स्पष्ट सिफारिश की थी।

तत्पश्चात, 26 अगस्त को संजय गांधी अस्पताल में हुई प्रसूता कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की मृत्यु के उपरांत अस्पताल प्रबंधन ने फौरी कदम उठाते हुए उन्हें पहले निलंबित कर दिया था। इसके बाद अनुशासनात्मक और प्रशासनिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए उनकी सेवा समाप्त करने का बड़ा कदम उठाया गया। उल्लेखनीय है कि डॉ. सोनल अग्रवाल ने 10 नवंबर 2015 को संस्थान में नियुक्ति प्राप्त की थी और उसी वर्ष 20 नवंबर 2015 को उन्होंने आधिकारिक रूप से अपना कार्यभार संभाला था।

हाईकोर्ट में चुनौती और वर्तमान कानूनी स्थिति
अपनी सेवा समाप्ति के इस कठोर आदेश से आहत होकर डॉ. सोनल अग्रवाल ने अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में रिट याचिका (डब्ल्यूपी संख्या 41219/2026) दायर की। याचिका में मांग की गई थी कि सेवा समाप्ति के आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए और उन्हें पुनः सेवा में बहाल किया जाए।

हाल ही में जब इस याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई, तो अदालत ने याचिकाकर्ता को फौरी राहत देने से साफ मना कर दिया। अदालत का मानना था कि मामले के सभी पहलुओं और दस्तावेजों का अध्ययन करना आवश्यक है। तदनुसार, उच्च न्यायालय ने शासन और श्याम शाह मेडिकल कॉलेज प्रशासन को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। अब शासन और कॉलेज प्रबंधन की ओर से औपचारिक जवाब पेश किए जाने के बाद ही मामले की विस्तृत सुनवाई आगे बढ़ेगी। फिलहाल, डॉ. सोनल अग्रवाल को न्याय के लिए 20 नवंबर तक का इंतजार करना होगा।