रीवा में शर्मनाक वारदात: ससुराल वालों ने मांगी गाड़ी, ना मिलने पर बहू को पत्थरों से मारा

 

ऋतुराज द्विवेदी, रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) रीवा शहर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र अंतर्गत रसिया मोहल्ले में शनिवार शाम हुई एक दर्दनाक घटना ने समाज की उस कड़वी सच्चाई को एक बार फिर सामने ला दिया है, जिसे हम सब जानते हुए भी अनदेखा कर देते हैं। दहेज के लोभ में इंसानियत की सारी सीमाएं लांघ दी गईं, और एक परिवार ने अपनी ही बहू पर जानलेवा हमला कर दिया। इस हिंसक झड़प में चार महिलाएं बुरी तरह घायल हो गईं, जिनमें से एक की हालत गंभीर बनी हुई है। यह घटना सिर्फ एक पारिवारिक विवाद नहीं है, बल्कि यह दर्शाती है कि समाज में दहेज जैसी सामाजिक बुराई कितनी गहरी जड़ें जमा चुकी है।

दहेज में गाड़ी की मांग: रिश्ते पर भारी पड़ा लालच
जानकारी के मुताबिक, पीड़ित महिला दुर्गा कोरी की बहन लक्ष्मी कोरी ने बताया कि उनकी बहन के ससुराल वाले लंबे समय से दहेज में एक गाड़ी की मांग कर रहे थे। एक ऐसा रिश्ता जो प्रेम और विश्वास पर आधारित होना चाहिए, वह लालच की भेंट चढ़ गया। जब दुर्गा और उसके मायके वालों ने यह अनुचित मांग पूरी नहीं की, तो ससुराल वालों का व्यवहार हिंसक हो गया। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि कुछ लोगों के लिए रिश्ते और मानवीय मूल्य, पैसे और भौतिक सुख-सुविधाओं के सामने कोई मायने नहीं रखते।

दहेज की मांग एक अपराध है, और यह अक्सर घरेलू हिंसा का कारण बनती है। दहेज निषेध अधिनियम 1961 के तहत दहेज देना और लेना दोनों ही दंडनीय अपराध हैं, लेकिन कानून के बावजूद यह कुप्रथा आज भी हमारे समाज में व्याप्त है।

दहेज के लिए प्रताड़ित करने पर क्या करें? 
अगर कोई महिला दहेज के लिए प्रताड़ित की जा रही है, तो उसे तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज करानी चाहिए। भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498-A के तहत, दहेज उत्पीड़न के मामलों में पति और उसके रिश्तेदारों को सख्त सजा का प्रावधान है। इसके अलावा, महिला आयोग और कई गैर-सरकारी संगठन (NGOs) भी ऐसे मामलों में सहायता प्रदान करते हैं।

पत्थर और डंडे से जानलेवा हमला: परिवार पर टूटा कहर
लक्ष्मी कोरी ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि शनिवार शाम दुर्गा पर ससुराल वालों ने हमला कर दिया। इस दौरान उन पर पत्थरों और डंडों से बेरहमी से वार किया गया। जब लक्ष्मी अपनी बहनों किरण और गौरी के साथ दुर्गा को बचाने आईं, तो हमलावरों ने उन पर भी हमला कर दिया। यह घटना सिर्फ शारीरिक हिंसा नहीं है, बल्कि रिश्तों के बिखरने की भी एक दर्दनाक कहानी है। एक परिवार जो दुर्गा को अपनी बहू मानता था, उसने उसे इतनी बेरहमी से मारा कि उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इस हमले में दुर्गा की हालत गंभीर है, जबकि अन्य तीनों महिलाओं को भी चोटें आई हैं।

परिवार में हिंसा से कैसे बचें? 
पारिवारिक हिंसा को रोकने के लिए, जागरूकता और संवाद सबसे महत्वपूर्ण हैं। ऐसे मामलों में पीड़ित को चुप्पी नहीं साधनी चाहिए, बल्कि तुरंत पुलिस या हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करना चाहिए। समाज को भी ऐसी घटनाओं के प्रति संवेदनशील होना चाहिए और पीड़ितों का साथ देना चाहिए।

पुलिस की कार्रवाई और न्याय की उम्मीद
घटना की सूचना मिलते ही सिविल लाइन थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने सभी घायल महिलाओं को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच जारी है। यह उम्मीद की जाती है कि पुलिस जल्द से जल्द आरोपियों को गिरफ्तार करेगी और उन्हें कानून के दायरे में लाएगी।

इस तरह के मामलों में पुलिस की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। त्वरित कार्रवाई न केवल पीड़ितों को न्याय दिलाती है, बल्कि समाज में एक सख्त संदेश भी देती है कि ऐसे अपराध बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।

रीवा पुलिस क्या कार्रवाई कर रही है? 
पुलिस ने घायलों का बयान दर्ज कर लिया है और आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए, जल्द ही गिरफ्तारी होने की संभावना है। पुलिस यह भी सुनिश्चित कर रही है कि घायलों को समुचित चिकित्सा सुविधा मिले।

निष्कर्ष: दहेज प्रथा पर एक कड़ा प्रहार जरूरी
यह घटना एक बार फिर हमें याद दिलाती है कि दहेज एक सामाजिक कलंक है, जिसे खत्म करने के लिए सिर्फ कानून ही काफी नहीं है। हमें अपनी सोच और मानसिकता को भी बदलना होगा। माता-पिता को अपनी बेटियों को इतना सशक्त बनाना चाहिए कि वे किसी भी तरह के अन्याय के खिलाफ आवाज उठा सकें।

यह हम सबकी जिम्मेदारी है कि हम दहेज का विरोध करें और ऐसे परिवारों का बहिष्कार करें जो दहेज मांगते हैं। केवल तभी हम एक ऐसे समाज का निर्माण कर पाएंगे, जहाँ महिलाओं को सम्मान और सुरक्षा मिले।