सिद्धार्थ तिवारी की मांग और अभय मिश्रा की 'आस्था' पर चला बुलडोजर, रीवा के अमहिया में चर्चित मजार का अतिक्रमण जमींदोज

 
रीवा के अमहिया मार्ग पर नगर निगम का बड़ा एक्शन। चर्चित मजार के पास से हटाया गया अवैध अतिक्रमण। सिद्धार्थ तिवारी और अभय मिश्रा के बीच गरमाया था यह मामला।

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा शहर के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण व्यापारिक इलाकों में शुमार अमहिया मार्ग को सुगम और चौड़ा बनाने की दिशा में सोमवार शाम को नगर निगम ने एक बड़ी और कड़क कार्रवाई को अंजाम दिया। अमहिया मार्ग पर लंबे समय से यातायात की सुगमता में बाधक बन रहे अवैध ढांचों को हटाने के लिए नगर निगम की टीम दलबल के साथ जमीन पर उतरी। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सड़क के दोनों ओर बढ़े हुए अतिक्रमण को साफ करना है ताकि शहर के इस मुख्य मार्ग पर लगने वाले भीषण जाम से जनता को निजात दिलाई जा सके।

प्रशासन की इस मुस्तैदी से साफ है कि विकास कार्यों की राह में आने वाले किसी भी अवरोध को अब बख्शा नहीं जाएगा। सोमवार को हुई इस कार्रवाई के बाद से पूरे अमहिया क्षेत्र के व्यापारियों और भू-माफियाओं के बीच हड़कंप का माहौल है। नगर निगम की पीली मशीन (बुलडोजर) ने जैसे ही मुख्य मार्ग पर अपने पंजे चलाए, वैसे ही सड़कों को घेरकर बनाए गए अस्थाई और स्थाई निर्माण ताश के पत्तों की तरह ढह गए।

चर्चित मजार की बाउंड्रीवॉल जमींदोज, बिना किसी विरोध के शांत रही जमीन
इस पूरी कार्रवाई का सबसे संवेदनशील और प्रमुख केंद्र अमहिया मार्ग पर स्थित एक बेहद चर्चित मजार के पास का इलाका था। नगर निगम के अधिकारियों ने पूरी सावधानी और योजनाबद्ध तरीके से मजार के ठीक सामने सड़क की तरफ किए गए अवैध अतिक्रमण को हटाना शुरू किया। इसके साथ ही, मजार के चारों तरफ खींची गई उस बाहरी बाउंड्रीवॉल को भी ध्वस्त कर दिया गया जो लोक निर्माण विभाग (PWD) और नगर निगम की सड़क की सीमा के भीतर आ रही थी।

आमतौर पर धार्मिक या संवेदनशील स्थलों पर होने वाली ऐसी कार्रवाइयों के दौरान तनाव या विवाद की स्थिति बन जाती है, लेकिन अमहिया में नज़ारा पूरी तरह उलट था। नगर निगम के प्रशासनिक अमले ने कानून सम्मत तरीके से बिना किसी पक्षपात के काम किया। इस पूरी कार्रवाई के दौरान स्थिति पूरी तरह सामान्य और शांतिपूर्ण बनी रही। स्थानीय स्तर पर न तो कोई विरोध प्रदर्शन देखने को मिला और न ही किसी समुदाय की तरफ से कोई आपत्ति दर्ज कराई गई। प्रशासन ने बेहद सूझबूझ से काम लेते हुए शांति व्यवस्था बनाए रखी।

राहगीरों के लिए मुसीबत बना था कब्जा, स्थानीय जनता ने ली राहत की सांस
अमहिया मार्ग पर इस मजार की बाउंड्रीवॉल और उसके सामने फैले अतिक्रमण की वजह से पिछले कई महीनों से सड़क बेहद संकरी हो गई थी। स्थानीय निवासियों, दुकानदारों और यहाँ से गुजरने वाले राहगीरों का कहना था कि इस अवैध निर्माण के कारण पीक ऑवर्स (व्यस्त समय) में यहाँ पैदल चलना भी दूभर हो जाता था। दोपहिया और चारपहिया वाहनों के आपस में फंसने के कारण हर दिन छोटी-मोटी दुर्घटनाएं और विवाद होना आम बात हो गई थी।

इस संबंध में स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और वाहन चालकों द्वारा पूर्व में कई बार नगर निगम और जिला प्रशासन को लिखित शिकायतें और आपत्तियां भेजी जा चुकी थीं। जनता की इसी पुरानी मांग और सुगम यातायात की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए सोमवार शाम को यह बड़ी कार्रवाई की गई। बाउंड्रीवॉल हटने और मलबा साफ होने के बाद सड़क का वह हिस्सा पूरी तरह खुल गया है, जिससे स्थानीय जनता और राहगीरों ने राहत की गहरी सांस ली है।

2 साल पुराना सियासी इतिहास: जब सिद्धार्थ तिवारी और अभय मिश्रा में ठन गई थी
भले ही सोमवार को यह कार्रवाई बेहद शांतिपूर्ण ढंग से निपट गई हो, लेकिन इतिहास के पन्नों में यह मजार भारी सियासी रस्साकशी का केंद्र रह चुकी है। करीब दो साल पहले इस मजार को लेकर रीवा से लेकर भोपाल तक की राजनीति गरमा गई थी। उस वक्त त्योंथर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक सिद्धार्थ तिवारी ने इस मजार के अवैध निर्माण को लेकर तीखे सवाल उठाए थे और इसे जनहित में सड़क से तत्काल हटाने की पुरजोर मांग प्रशासनिक स्तर पर की थी। विधायक सिद्धार्थ तिवारी के इस बयान के बाद रीवा के राजनीतिक गलियारों में जमकर बवाल हुआ था।

भाजपा विधायक के इस आक्रामक रुख के जवाब में तत्कालीन समय में कांग्रेस के कद्दावर विधायक अभय मिश्रा मैदान में उतर आए थे। अभय मिश्रा ने इस विवाद के बीच बकायदा एक आधिकारिक पत्र जारी कर सनसनी फैला दी थी। उन्होंने अपने पत्र में खुलकर लिखा था कि यह मजार उनकी व्यक्तिगत और गहरी आस्था का केंद्र है और वह इसे किसी भी कीमत पर टूटने या हटने नहीं देंगे। इस दोतरफा सियासी दंगल की वजह से उस दौरान यह मामला बेहद संवेदनशील हो गया था और प्रशासन को अपने कदम पीछे खींचने पड़े थे। लेकिन बदलते समय के साथ, सोमवार को आखिरकार कानून और जनहित की जीत हुई।

नगर निगम की चेतावनी: चौड़ीकरण की राह में आने वाले सभी अवैध निर्माण हटेंगे
नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि अमहिया मार्ग का चौड़ीकरण रीवा शहर के मास्टर प्लान और विकास के लिए बेहद अनिवार्य प्रोजेक्ट है। इस मार्ग पर यातायात के दबाव को कम करने के लिए आने वाले दिनों में अतिक्रमण विरोधी अभियान को और अधिक आक्रामक और तेज किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई किसी व्यक्ति या विशेष स्थल को टारगेट करके नहीं की जा रही है, बल्कि सड़क की जद में आने वाले हर एक बाधक निर्माण पर कानून का डंडा चलेगा।

नगर निगम प्रशासन ने मुख्य मार्गों पर दुकान लगाने वाले व्यापारियों और मकान मालिकों को सख्त हिदायत दी है कि वे नाली और फुटपाथ के आगे किए गए अपने अवैध कब्जों को स्वतः ही हटा लें। यदि दोबारा सड़कों पर अतिक्रमण पाया गया या मलबे को साफ नहीं किया गया, तो न केवल जब्ती की कार्रवाई होगी बल्कि संबंधित व्यक्ति से बुलडोजर का हर्जाना और भारी जुर्माना भी वसूला जाएगा।

रीवा के अमहिया मार्ग पर हुई यह हालिया कार्रवाई इस बात का साफ संदेश है कि जब बात सार्वजनिक कल्याण और शहर के विकास की आती है, तो प्रशासनिक इच्छाशक्ति के आगे पुराने राजनीतिक विवाद भी ठंडे पड़ जाते हैं। जिस मजार को लेकर दो साल पहले भारी तनाव और सियासी तलवारें खिंच गई थीं, आज उसी स्थान पर कानून के दायरे में आकर शांतिपूर्वक सड़क चौड़ीकरण का काम पूरा किया गया। शहर को स्मार्ट और जाम-मुक्त बनाने के लिए रीवा नगर निगम और जिला प्रशासन का यह कदम वाकई सराहनीय है, बशर्ते यह निष्पक्षता आगे भी बरकरार रहे।