SP vs कांग्रेस नेत्री : लुटेरे फरार, लेकिन रीवा में रिश्तों पर छिड़ी जंग, FIR के लिए लेना पड़ा पूर्व CM का नाम! धरने की चेतावनी

 

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) रीवा शहर में कांग्रेस की महिला नेत्री और स्टेट जनरल सेक्रेटरी कुमुदिनी सिंह के साथ हुई लूट की घटना ने अब एक बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। घटना के चौथे दिन भी जब आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं, तो नाराज कुमुदिनी सिंह ने सीधे रीवा के एसपी विवेक सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पुलिस अपराधियों को पकड़ने के बजाय उनके पारिवारिक रिश्तों पर भ्रामक टिप्पणी कर रही है।

वारदात और FIR में टालमटोल
यह पूरी घटना बुधवार की सुबह की है जब कुमुदिनी सिंह मथुरा-वृंदावन से लौटी थीं। वे अपनी सहेलियों और महिला पार्षदों के साथ रेलवे स्टेशन से बस स्टैंड जाने के लिए ऑटो में बैठी थीं। इसी दौरान, एजी कॉलेज के पास बदमाशों ने उनके ऑटो को रोका, बल प्रयोग कर लूटपाट की और फरार हो गए। इस वारदात से महिलाएं बुरी तरह डर गईं और कुमुदिनी सिंह चलते ऑटो से गिरते-गिरते बचीं।

कुमुदिनी सिंह ने पुलिस पर एक बेहद गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि दिनदहाड़े लूट के बाद जब वे थाने पहुंचीं, तो उनकी रिपोर्ट लिखने में टालमटोल की गई। उनका दावा है कि पुलिस ने तब तक कोई कार्रवाई नहीं की जब तक उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री और अपने बड़े पिताजी गोविंद नारायण सिंह का नाम नहीं लिया। यह घटना रीवा पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है।

एसपी का बयान और पारिवारिक रिश्तों पर विवाद
यह विवाद तब और बढ़ गया जब एसपी विवेक सिंह ने मीडिया में एक बयान देते हुए गलती से कुमुदिनी सिंह को पूर्व सीएम गोविंद नारायण सिंह का "दूर का रिश्तेदार" बता दिया। कुमुदिनी सिंह इस पर भड़क उठीं। उन्होंने कहा कि गोविंद नारायण सिंह उनके सगे बड़े पिता थे, जिन्होंने उन्हें पाला-पोसा और बड़ा किया। वे सिर्फ उनके पिता ही नहीं, बल्कि उनके हीरो थे। उनकी शादी भी उन्हीं की मर्जी से हुई थी।

उन्होंने पुलिस पर लुटेरों को पकड़ने के बजाय उनके पारिवारिक रिश्तों में दरार डालने का काम करने का आरोप लगाया और इसे बेहद शर्मनाक बताया। कुमुदिनी सिंह ने यहां तक कहा कि एसपी को पहले रामपुर बघेलान जाकर यह पता करना चाहिए कि वे किस परिवार से हैं।

धरने की चेतावनी और पुलिस का जवाब
इस पूरे मामले से नाराज होकर कुमुदिनी सिंह ने सीधे तौर पर प्रशासन को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई, तो वे उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के बंगले के बाहर धरना देंगी। यह चेतावनी इस बात का संकेत है कि अब यह मामला राजनीतिक रूप ले चुका है।

दूसरी ओर, एसपी विवेक सिंह ने इन आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है और घटना की गंभीरता को समझती है। हालांकि, घटना के चौथे दिन भी आरोपियों का फरार रहना पुलिस के दावों पर सवाल उठाता है। यह स्थिति शहर की कानून-व्यवस्था पर भी कई सवाल खड़े कर रही है कि आखिर दिनदहाड़े ऐसी घटनाएं कैसे हो रही हैं और अपराधियों को पकड़ने में पुलिस क्यों नाकाम है।

निष्कर्ष
कांग्रेस नेत्री कुमुदिनी सिंह के साथ हुई लूट की घटना एक साधारण अपराध नहीं, बल्कि एक गंभीर मुद्दा बन गई है। पुलिस की टालमटोल, एसपी का विवादित बयान और अपराधियों की गिरफ्तारी में देरी ने इस मामले को राजनीतिक रंग दे दिया है। यह घटना सिर्फ एक नेता की सुरक्षा का मामला नहीं है, बल्कि यह रीवा शहर में कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति और पुलिस-प्रशासन के रवैये को भी दर्शाती है। अब देखना यह है कि क्या पुलिस जल्द से जल्द आरोपियों को गिरफ्तार कर पाएगी या यह मामला भी सिर्फ बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप तक ही सीमित रहेगा।