रीवा में 'वर्दी बनाम काला कोट': ट्रैफिक इंचार्ज अनीमा शर्मा पर वकीलों का फूटा गुस्सा; फर्जी मुकदमे और मारपीट के गंभीर आरोप
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा शहर में कानून के रखवालों और कानून के जानकारों के बीच एक बड़ी जंग छिड़ गई है। शहर की ट्रैफिक व्यवस्था संभालने वाली थाना प्रभारी (TI) अनीमा शर्मा पर अधिवक्ताओं ने द्वेषपूर्ण कार्रवाई और तानाशाही का आरोप लगाया है। इस विवाद ने तब उग्र रूप ले लिया जब जिले के सैकड़ों अधिवक्ताओं ने लामबंद होकर पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय का घेराव किया।
द्वेषपूर्ण कार्रवाई और टारगेट करने का आरोप
मध्य प्रदेश बार काउंसिल के सदस्य अखंड प्रताप सिंह और जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष राजेंद्र पांडे के नेतृत्व में वकीलों ने आरोप लगाया कि ट्रैफिक इंचार्ज अनीमा शर्मा जानबूझकर अधिवक्ताओं को निशाना बना रही हैं। उनका कहना है कि यह कोई सामान्य ट्रैफिक चेकिंग नहीं बल्कि वकीलों के खिलाफ एक व्यक्तिगत 'एंटीपैथी' (नफरत) का परिणाम है।
फर्जी मुकदमा और मारपीट का सनसनीखेज मामला
अधिवक्ताओं ने विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ मुख्य घटनाओं का उल्लेख किया:
- वकील के साथ मारपीट: आरोप है कि एक अधिवक्ता के साथ ट्रैफिक इंचार्ज ने न केवल बदतमीजी की, बल्कि उनके साथ मारपीट भी की गई। इस घटना के बाद उक्त अधिवक्ता को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
- फर्जी FIR: वकीलों का दावा है कि अपनी गलती छुपाने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने पीड़ित वकील के खिलाफ ही फर्जी मुकदमा दर्ज कर दिया है।
- प्रकाश चौराहा विवाद: हाल ही में प्रकाश चौराहे पर भी एक वकील के साथ सरेआम अभद्रता की गई, जिससे पूरे वकील समुदाय में रोष है।
"गाली दो और सायरन बजाओ": तानाशाही के निर्देश?
अधिवक्ताओं ने बेहद चौंकाने वाला आरोप लगाया कि ट्रैफिक इंचार्ज ने अपने मातहतों को यह निर्देश दे रखा है कि यदि कोई वकील सवाल पूछे या नियम की बात करे, तो उसे गाली दी जाए और सायरन बजाकर उसकी आवाज दबा दी जाए। वकीलों के अनुसार, कोर्ट परिसर के आसपास भी तनाव पैदा करने के पीछे ट्रैफिक इंचार्ज की कार्यप्रणाली ही जिम्मेदार है।
एसपी कार्यालय में प्रदर्शन और मांगें
सैकड़ों की संख्या में अधिवक्ताओं ने नारेबाजी करते हुए एसपी कार्यालय को घेरा और एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
- निलंबन: ट्रैफिक इंचार्ज अनीमा शर्मा को तत्काल सस्पेंड या लाइन अटैच किया जाए।
- मुकदमा वापसी: अधिवक्ताओं के खिलाफ दर्ज किए गए फर्जी मुकदमों को तुरंत निरस्त किया जाए।
- जांच कमेटी: पूरे प्रकरण की निष्पक्ष न्यायिक या उच्च स्तरीय पुलिस जांच कराई जाए।
प्रशासन की प्रतिक्रिया: जांच का आश्वासन
अधिवक्ताओं के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए एसपी कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने ज्ञापन स्वीकार किया। प्रशासन ने वकीलों को आश्वस्त किया है कि उनके द्वारा लगाए गए सभी आरोपों की गंभीरता से जांच की जाएगी और किसी भी दोषी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि, वकीलों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि कुछ दिनों के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे जिला न्यायालय में काम बंद कर अनिश्चितकालीन आंदोलन की शुरुआत करेंगे।