"रीवा वालों सावधान! वरदान अस्पताल जाने से पहले ये खबर देख लें, बिना अनुभव के चीर दिया मरीज का जबड़ा, डॉ. मुकेश और वंदना यादव की गुंडागर्दी का होगा अंत, FIR का आदेश!

 

डॉ. मुकेश यादव और वंदना यादव पर गंभीर धाराओं में FIR का आदेश। बिना अनुभव के किया मरीज का ऑपरेशन, पैसे ऐंठने के बाद दी जान से मारने की धमकी।

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) मध्य प्रदेश के रीवा जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सफेद कोट पहनने वाले डॉक्टरों के चेहरे से नकाब उतार दिया है। रीवा के वरदान अस्पताल में इलाज के नाम पर न केवल लाखों रुपये ऐंठे गए, बल्कि बिना अनुभव के मरीज पर गलत सर्जरी कर उसे जीवन भर का दर्द दे दिया गया। डॉक्टर मुकेश यादव और डॉक्टर वंदना यादव पर लगे आरोपों ने चिकित्सा जगत को शर्मसार कर दिया है।

मामला क्या है? ₹5 लाख की धोखाधड़ी और गलत इलाज 
पीड़ित वीरेंद्र त्रिपाठी अपने खराब दांतों के इलाज के लिए वरदान अस्पताल पहुंचे थे। वहाँ उन्हें 'फुल माउथ डेंटल इंप्लांट' की सलाह दी गई। डॉक्टरों ने खुद को एक्सपर्ट बताते हुए पीड़ित से ₹5 लाख की भारी-भरकम राशि वसूली। लेकिन 21 जनवरी 2024 को हुआ यह ऑपरेशन पीड़ित के लिए एक डरावना सपना बन गया। डॉक्टरों ने बिना किसी पूर्व अनुभव के यह जटिल प्रक्रिया अपनाई, जिससे स्थिति सुधरने के बजाय और बिगड़ गई।

इलाज में लापरवाही: बिना अनुभव के किया गया ऑपरेशन 
ऑपरेशन के बाद पीड़ित को असहनीय दर्द रहने लगा। इंप्लांट के कैप फिट नहीं हो रहे थे और वे बार-बार हिल रहे थे। जब पीड़ित ने शिकायत की, तो डॉक्टरों ने स्वीकार किया कि यह उनका पहला फुल माउथ इंप्लांट केस था।

  • हड्डियों को नुकसान: भोपाल के विशेषज्ञों ने जाँच में पाया कि रीवा में किए गए गलत ऑपरेशन से पीड़ित की जबड़े की हड्डी (कोर्टेक्स) पूरी तरह डैमेज हो चुकी है।
  • धमकी और गाली-गलौज: जब मरीज ने अपना हक मांगा, तो डॉक्टरों ने इलाज करने के बजाय राजनीतिक संबंधों की धौंस दिखाकर उसे डराया और अपशब्द कहे।
  • न्यायालय का कड़ा रुख: गंभीर धाराओं में केस दर्ज करने का आदेश 

जब पुलिस और प्रशासन ने पीड़ित की गुहार नहीं सुनी, तो उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। अधिवक्ता अनूप प्रताप सिंह की दलीलों और साक्ष्यों के आधार पर, न्यायालय ने मामले को बेहद गंभीर माना। कोर्ट ने डॉ. मुकेश यादव, डॉ. वंदना यादव और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ निम्नलिखित धाराओं में मामला दर्ज करने का आदेश दिया है:

  • धारा 318: धोखाधड़ी (पूर्व की धारा 420 का संशोधित रूप)
  • धारा 296: गंभीर चोट पहुँचाना
  • धारा 351: धमकी देना
  • धारा 125, 125A, 125B: अपराध में साजिश और संलिप्तता

प्रशासनिक विफलता और पीड़ित का संघर्ष 
यह मामला केवल एक डॉक्टर की गलती नहीं है, बल्कि सिस्टम की विफलता भी है। पीड़ित ने कलेक्टर, आईजी और सीएमएचओ तक गुहार लगाई, लेकिन डॉक्टरों के 'ऊंचे रसूख' के कारण कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह न्याय की लड़ाई पीड़ित के अटूट साहस का परिणाम है, जिसने भ्रष्ट तंत्र के खिलाफ हार नहीं मानी।

राजनीतिक रसूख की धौंस और धमकियां: पीड़ित का संघर्ष
हैरानी की बात यह है कि जब पीड़ित ने अपना पैसा वापस माँगा, तो डॉक्टरों ने अपनी पहुँच का हवाला देकर उसे गालियां दीं और जान से मारने की धमकी दी। उन्होंने सोचा था कि ऊँचे संबंधों के दम पर वे बच निकलेंगे, लेकिन कानून के हाथ लंबे होते हैं। अधिवक्ता अनूप प्रताप सिंह ने कोर्ट में डॉक्टरों के इस काले कारनामे के सारे सबूत पेश कर दिए, जिससे अब उनका बचना नामुमकिन है।

कानूनी धाराओं का जाल: अब नहीं बचेंगे दोषी
न्यायालय ने इन पर धारा 318 (धोखाधड़ी), धारा 296 (गंभीर चोट), धारा 351 (धमकी) और धारा 125 (साजिश) जैसी कठोर धाराएं लगाई हैं। ये धाराएं स्पष्ट करती हैं कि यह मामला केवल डॉक्टरी लापरवाही का नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश और धोखाधड़ी का है।

निष्कर्ष: चिकित्सा क्षेत्र के लुटेरों से सावधान 
वरदान अस्पताल का यह मामला एक सबक है कि निजी अस्पतालों में इलाज कराते समय डॉक्टरों की साख और अनुभव की जाँच करना कितना जरूरी है। चिकित्सा जैसा पवित्र पेशा अब कुछ लोगों के लिए केवल पैसा कमाने की मशीन बन गया है। न्यायालय का यह आदेश रीवा के अन्य निजी अस्पतालों के लिए भी एक कड़ी चेतावनी है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) 
प्रश्न 1: रीवा वरदान अस्पताल का मामला क्या है?
उत्तर: यह मामला डॉ. मुकेश यादव और वंदना यादव द्वारा ₹5 लाख लेकर बिना अनुभव के गलत डेंटल इंप्लांट सर्जरी करने और मरीज को धमकाने का है।
प्रश्न 2: कोर्ट ने किन धाराओं में केस दर्ज करने को कहा है?
उत्तर: कोर्ट ने धारा 125, 296, 351 और 318 (धोखाधड़ी) समेत कई अन्य आपराधिक धाराओं में केस दर्ज करने का आदेश दिया है।
प्रश्न 3: क्या डॉक्टरों के पास इस सर्जरी का अनुभव था?
उत्तर: नहीं, डॉक्टरों ने खुद स्वीकार किया कि यह उनका पहला फुल माउथ इंप्लांट केस था, जिसके लिए वे प्रशिक्षित नहीं थे।
प्रश्न 4: पीड़ित को भोपाल में क्या जानकारी मिली?
उत्तर: भोपाल के डॉक्टर ने बताया कि रीवा में गलत तरीके से इंप्लांट लगाने के कारण जबड़े की हड्डी को गंभीर नुकसान पहुँचा है।
प्रश्न 5: क्या यह मामला केवल लापरवाही का है या धोखाधड़ी का भी?
उत्तर: यह दोनों है। डॉक्टरों ने खुद को विशेषज्ञ बताकर पैसे लिए (धोखाधड़ी) और फिर गलत सर्जरी की (लापरवाही)।