"रीवा दंगल का सच क्या? पीड़ित ने लगाया वकीलों पर पीटने का आरोप, दूसरे पक्ष ने आरोपों को बताया पूरी तरह मनगढ़ंत!"
मध्य प्रदेश के रीवा जिले से कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाली एक बेहद हैरान करने वाली घटना सामने आई है। शहर के सबसे प्रमुख और व्यस्त इलाके में स्थित सिविल लाइन थाने के ठीक सामने सरेराह एक युवक की बेरहमी से पिटाई कर दी गई। इस सनसनीखेज वारदात का एक वीडियो सोशल मीडिया पर बड़ी तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि काले कोट यानी वकीलों के पहनावे में कुछ लोग एक युवक को चारों तरफ से घेरकर उसके साथ धक्का-मुक्की कर रहे हैं और उसे जबरन पकड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
पीड़ित युवक की पहचान शिवम द्विवेदी के रूप में हुई है। पीड़ित का सीधे तौर पर आरोप है कि मारपीट करने वाले लोग स्थानीय न्यायालय के अधिवक्ता हैं, जिन्होंने अपने रसूख और पद का गलत इस्तेमाल करते हुए पुलिस थाने के ठीक बाहर इस वारदात को अंजाम दिया। घटना के दौरान काफी समय तक सड़क पर अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। इसके बाद थाने के भीतर से आए पुलिसकर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद बीच-बचाव किया और पीड़ित युवक को वकीलों के चंगुल से छुड़ाकर थाने के अंदर सुरक्षित पहुंचाया।
क्या है पूरा विवाद? कर्ज की वसूली और टालमटोल की कहानी
इस पूरे हंगामे की कहानी करीब डेढ़ साल पुरानी बताई जा रही है। पीड़ित शिवम द्विवेदी के अनुसार, आरोपी सौरभ पांडेय ने अपनी पारिवारिक कठिनाइयों और मां की गंभीर बीमारी का वास्ता देकर उससे लगभग एक लाख रुपये की बड़ी रकम उधार ली थी। पीड़ित का कहना है कि उसने इंसानियत के नाते यह मदद की थी।
समय बीतने के बाद आरोपी सौरभ पांडेय द्वारा उधार ली गई रकम में से कुछ हिस्सा तो वापस कर दिया गया, लेकिन बकाया बची हुई बड़ी राशि को चुकाने के नाम पर वह लगातार टालमटोल कर रहा था। जब भी पीड़ित अपनी रकम मांगता, उसे कोई न कोई नया बहाना सुनने को मिलता था। सोमवार के दिन शिवम द्विवेदी अपने एक साथी के साथ किसी व्यक्तिगत काम के सिलसिले में सिविल लाइन थाने के पास सड़क किनारे खड़ा था। तभी अचानक वहां सौरभ पांडेय, उसके पिता और उनके साथ मौजूद कुछ अन्य अधिवक्ता आ धमके। बकाया राशि मांगने की बात को लेकर दोनों पक्षों में तीखी नोकझोंक शुरू हो गई, जो चंद मिनटों में लात-घूंसों और मारपीट में बदल गई।
आरोपी सौरभ पांडेय पर रीवा और इंदौर में धोखाधड़ी के क्या आरोप हैं?
इस मामले में पीड़ित शिवम द्विवेदी के भाई ने कई गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि आरोपी सौरभ पांडेय की मंशा पहले से ही ठीक नहीं थी। उसने केवल रीवा में ही नहीं, बल्कि इंदौर जैसे बड़े शहरों के कई सीधे-सादे लोगों को भी अपना शिकार बनाया है।
आरोप है कि सौरभ पांडेय लोगों के सामने अपनी मां की बीमारी और अन्य घरेलू समस्याओं का झूठा हवाला देकर लाखों रुपये उधार ले लेता था। जब लोग अपनी मेहनत की कमाई वापस मांगते थे, तो वह अपने वकालत के पेशे और वकीलों के रसूख का डर दिखाकर उन्हें चुप करा देता था। सोमवार को भी पीड़ित पर हमला करके समाज में यही संदेश देने की कोशिश की गई कि उनके खिलाफ आवाज उठाने वाले का अंजाम बुरा होगा। मारपीट के दौरान पीड़ित की टी-शर्ट तक पूरी तरह फट गई थी।
क्या वकीलों पर लगाए गए मारपीट के आरोप झूठे हैं और दूसरा पक्ष क्या कह रहा है?
इस पूरे विवाद में दूसरा पहलू भी सामने आया है। आरोपी सौरभ पांडेय और उसके समर्थक वकीलों ने शिवम द्विवेदी द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार, झूठा और मनगढ़ंत बताया है। उनका कहना है कि इस घटना में उनका कोई दोष नहीं है और उन्हें जानबूझकर बदनाम करने की साजिश रची जा रही है।
दूसरे पक्ष के मुताबिक, विवाद की शुरुआत शिवम द्विवेदी की तरफ से ही की गई थी। उन्होंने किसी भी प्रकार के पैसों के अवैध लेन-देन या धोखेबाजी की बात से साफ इनकार किया है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से अपील की है कि सोशल मीडिया पर चल रहे वीडियो की एकतरफा जांच न की जाए, बल्कि पूरे मामले की निष्पक्षता से जांच हो ताकि सच सबके सामने आ सके।
पुलिस प्रशासन का एक्शन: थाना प्रभारी विजय सिंह का बड़ा बयान
थाने के ठीक बाहर मचे इस भारी बवाल के बाद पुलिस तुरंत सक्रिय हो गई। सरेआम हो रही इस मारपीट को रोकने के लिए खुद थाने के सुरक्षाकर्मियों को बीच में कूदना पड़ा। पुलिस ने दोनों ही पक्षों को शांत कराया और उन्हें थाने के भीतर ले गई।
इस मामले पर सिविल लाइन थाना प्रभारी निरीक्षक विजय सिंह ने अपना आधिकारिक बयान देते हुए कहा कि यह पूरा विवाद आपसी पैसों के लेन-देन से जुड़ा हुआ है। दोनों ही पक्षों ने अपनी-अपनी शिकायतें थाने में दर्ज कराई हैं। पुलिस विभाग सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और मौके पर मौजूद चश्मदीदों के बयानों के आधार पर निष्पक्ष रूप से जांच कर रहा है। जांच पूरी होते ही दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कानून और व्यवस्था पर सवाल: थाने की नाक के नीचे ऐसी गुंडागर्दी क्यों?
थाने के ठीक सामने हुई इस हिंसक झड़प ने रीवा के स्थानीय प्रशासन और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति पुलिस थाने के सामने भी सुरक्षित नहीं है, जहां चौबीसों घंटे सशस्त्र पुलिस बल तैनात रहता है, तो फिर आम चौराहों और कॉलोनियों में सुरक्षा की उम्मीद कैसे की जा सकती है?
इसके अलावा, न्याय के प्रहरी माने जाने वाले अधिवक्ताओं पर कानून हाथ में लेने के आरोप लगना बेहद चिंताजनक है। यदि कानून की समझ रखने वाले लोग ही सड़क पर सरेआम मारपीट करेंगे, तो आम जनता का न्याय व्यवस्था से भरोसा उठ जाएगा। फिलहाल, रीवा पुलिस इस पूरे मामले की गहनता से तफ्तीश कर रही है।