शराब माफियाओं का 'जीएम' कौन? रीवा में बिक रही मौत: वीडियो में नाम, फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं? क्या रीवा में भी चलता है 'शराब-प्रशासन' का गठबंधन?

 

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) मऊगंज जिले में शराब माफियाओं का आतंक चरम पर है, जहां गांवों और गलियों में खुलेआम शराब बेची जा रही है। इसका ताजा और सबसे चौंकाने वाला मामला शाहपुर थाना क्षेत्र के करह पहाड़ी गांव से सामने आया है। यहां सतर्क ग्रामीणों ने अवैध तरीके से लाई जा रही 6 पेटी शराब पकड़ी है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है, जिसमें ग्रामीणों का आक्रोश और व्यवस्था के प्रति उनकी हताशा साफ दिखाई दे रही है।

खुलेआम हो रही शराब की पैकारी
वीडियो में, कुछ ग्रामीणों ने मिलकर एक मोटरसाइकिल सवार व्यक्ति को रोका जिसके पास 6 पेटियां थीं। जब ग्रामीणों ने उससे पूछा कि वह क्या ले जा रहा है, तो उसने बिना किसी झिझक के स्वीकार किया कि वह शराब लेकर जा रहा था। जब उससे यह पूछा गया कि यह शराब उसे किसने दी, तो उसने सीधे तौर पर दो लोगों के नाम लिए: राजू सिंह परिहार और बबलू मिश्रा। व्यक्ति ने राजू सिंह परिहार को "सेठ" और बबलू मिश्रा को "जीएम" कहकर संबोधित किया। इस बातचीत से यह साफ होता है कि यह अवैध कारोबार सिर्फ छोटी-मोटी तस्करी नहीं है, बल्कि एक संगठित रैकेट है जो बड़े नामों के संरक्षण में चल रहा है।

ग्रामीणों का दर्द: "हम परेशान हो चुके हैं, इतनी शिकायत आती है"
वीडियो में एक ग्रामीण का बयान इस पूरी स्थिति की भयावहता को दर्शाता है। वह गुस्से में कहते हैं कि वे इस अवैध शराब की पैकारी से बेहद परेशान हैं। उन्होंने बताया कि ये माफिया कभी काली कांच वाली फोर-व्हीलर गाड़ियों में तो कभी मोटरसाइकिल पर शराब लेकर आते हैं। सबसे गंभीर आरोप यह है कि इस संबंध में वे लगातार पुलिस और प्रशासन को शिकायतें कर रहे हैं, लेकिन कोई भी ठोस कार्रवाई नहीं होती। उनके अनुसार, "इतनी शिकायत आती है, पूरा हम लोग परेशान हो चुके हैं।" यह बयान सीधे तौर पर स्थानीय प्रशासन, पुलिस और आबकारी विभाग की लापरवाही पर सवाल उठाता है कि आखिर क्यों इतने बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध कारोबार को रोका नहीं जा रहा है।

पूरे सिस्टम और सरकार पर सवाल
यह घटना केवल एक छोटा सा आपराधिक मामला नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम और सरकार की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है।

  • पुलिस की चुप्पी: ग्रामीणों के बार-बार शिकायत करने के बाद भी पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई न करना उनकी भूमिका पर संदेह पैदा करता है। क्या पुलिस इस अवैध कारोबार को नजरअंदाज कर रही है या फिर उन्हें रोकने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं?
  • राजनीतिक संरक्षण का संदेह: वीडियो में खुलेआम नाम लिए जाने से इस बात की आशंका बढ़ जाती है कि इन माफियाओं को किसी बड़े राजनीतिक व्यक्ति या प्रभावशाली समूह का संरक्षण प्राप्त है।
  • सामाजिक प्रभाव: गांव-गांव और गली-गली में बिक रही शराब से न केवल कानून-व्यवस्था बिगड़ रही है, बल्कि यह युवाओं को नशे की लत का शिकार बना रही है और परिवारों को आर्थिक व सामाजिक रूप से बर्बाद कर रही है।
  • सरकार की जिम्मेदारी: यह मुख्यमंत्री और गृहमंत्री की जिम्मेदारी है कि वे सुनिश्चित करें कि ऐसे अवैध कारोबारियों पर सख्त कार्रवाई हो। गडकरी द्वारा बेहतर सड़कों के वादे के बीच, यह जरूरी है कि उन सड़कों का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों के लिए न हो।

ग्रामीणों का इस तरह खुद मोर्चा लेना दर्शाता है कि प्रशासन पर उनका भरोसा खत्म हो चुका है। जब जनता को अपनी सुरक्षा के लिए खुद ही आगे आना पड़े, तो यह शासन-प्रशासन की सबसे बड़ी विफलता है।

निष्कर्ष
मऊगंज का यह वायरल वीडियो एक गंभीर चेतावनी है। यह बताता है कि किस तरह माफिया खुलेआम सत्ता और सिस्टम को धता बता रहे हैं। सरकार को इस मामले का संज्ञान लेकर न केवल पकड़े गए व्यक्ति पर, बल्कि इसमें शामिल राजू सिंह परिहार और बबलू मिश्रा जैसे बड़े नामों पर भी कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। यह सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि एक सामाजिक और प्रशासनिक संकट है, जिसका तत्काल समाधान करना बेहद जरूरी है।