कलेक्टर को चेतावनी देने के 18 दिन बाद किराए के मकान में जली मिली महिला, डॉक्टर पर लगे थे गंभीर आरोप
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) मध्य प्रदेश के रीवा जिले में एक हैरान कर देने वाला और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। रीवा के विश्वविद्यालय थाना अंतर्गत अजगरहा रोड पर किराए के मकान में संदिग्ध परिस्थितियों में आग लगने से मिथिलेश सिंह नामक महिला की दर्दनाक मौत हो गई है। खास बात यह है कि इस हादसे से ठीक 18 दिन पहले मृतका ने रीवा कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा था, जिसमें उसने संजय गांधी अस्पताल के डॉक्टर शुभम मिश्रा पर कंधे के ऑपरेशन में गंभीर लापरवाही बरतने और आर्थिक शोषण का आरोप लगाया था। इस मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक और चिकित्सीय हलकों में हड़कंप मच गया है।
दरवाजा काटकर निकाला गया शव, आग लगने से हुई मौत
पुलिस से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, यह घटना 9 और 10 अक्टूबर की दरमियानी रात की है। अजगरहा रोड स्थित एक किराए के मकान से अचानक धुआं उठने और आग लगने की सूचना विश्वविद्यालय थाना पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी हितेंद्र नाथ शर्मा अपनी टीम और दमकल वाहनों के साथ फौरन मौके पर पहुंचे।
मौके पर पहुंचने पर पाया गया कि मकान का मुख्य दरवाजा अंदर से पूरी तरह बंद था। स्थिति की नजाकत को देखते हुए पुलिस ने कटर की मदद से लोहे के दरवाजे को कटवाया और अंदर प्रवेश किया। अंदर का दृश्य बेहद भयावह था, जहाँ तिलखन निवासी मिथिलेश सिंह बुरी तरह झुलस चुकी थीं। पुलिस ने उन्हें बाहर निकाला, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और उनकी मौत हो चुकी थी। प्रारंभिक जांच में पुलिस आशंका जता रही है कि महिला ने खुद आग लगाई होगी, हालांकि वास्तविक कारणों का खुलासा विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगा।
कंधे के ऑपरेशन और 50 हजार रुपये की मांग का आरोप
सामने आए तथ्यों के अनुसार, मृतका मिथिलेश सिंह ने गत 24 सितंबर को जिला कलेक्टर को दिए गए शिकायती आवेदन में अपनी दर्दभरी दास्तान बयां की थी। महिला का आरोप था कि संजय गांधी अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर शुभम मिश्रा ने करीब दस महीने पहले उसके कंधे का एक बड़ा ऑपरेशन किया था। ऑपरेशन के दौरान कंधे में नट-बोल्ट और अन्य मेडिकल उपकरण भी लगाए गए थे, लेकिन इतने समय बाद भी उसे दर्द से जरा भी राहत नहीं मिली और उसकी तकलीफ दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही चली गई।
महिला ने अपने ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया था कि जब वह दोबारा अपनी इस गंभीर समस्या को लेकर अस्पताल पहुंची और आयुष्मान कार्ड के जरिए इलाज कराने का अनुरोध किया, तो उससे लगभग 50 हजार रुपये की मांग की गई। उसका कहना था कि इसमें से 40 हजार रुपये उच्च गुणवत्ता की रॉड और प्लेट मंगवाने के नाम पर तथा 10 हजार रुपये डॉक्टर के शुल्क के रूप में मांगे जा रहे थे। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह इतने पैसे चुकाने में असमर्थ थी।
एम्स भोपाल के डॉक्टरों के दावे और आत्महत्या की चेतावनी
कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में महिला ने एम्स भोपाल के डॉक्टरों का हवाला देते हुए एक और बड़ा दावा किया था। उसने शिकायत में जिक्र किया था कि कंधे का दर्द असहनीय होने पर वह इलाज के लिए एम्स भोपाल गई थी, जहाँ के डॉक्टरों ने कथित तौर पर यह कहा कि उसके कंधे का पिछला ऑपरेशन जानबूझकर गलत तरीके से किया गया है। महिला का यह भी दावा था कि एम्स के डॉक्टरों ने यहां तक कह दिया था कि अब स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि कंधा काटना तक पड़ सकता है।
इन तमाम परेशानियों से घिरी मिथिलेश सिंह ने कलेक्टर को दिए गए ज्ञापन के अंत में साफ तौर पर चेतावनी दी थी कि यदि उसकी इस समस्या का कोई समाधान या न्याय नहीं मिला, तो वह आत्मघाती कदम उठाने यानी आत्महत्या करने को मजबूर हो जाएगी। और ठीक इसके 18 दिन बाद संदिग्ध आगजनी की घटना में उसकी जान चली गई।
डॉक्टर का पक्ष और पुलिस की कार्रवाई
इस पूरे घटनाक्रम और गंभीर आरोपों के सामने आने के बाद जब डॉक्टर शुभम मिश्रा से संपर्क किया गया, तो उन्होंने महिला द्वारा लगाए गए तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें पूरी तरह निराधार बताया। हालांकि, इस मामले में उन्होंने विस्तार से कुछ भी कहने से परहेज किया।
दूसरी ओर, विश्वविद्यालय थाना प्रभारी हितेंद्र नाथ शर्मा ने बताया कि पुलिस हर एक पहलू और एंगल से गहराई से छानबीन कर रही है। महिला द्वारा पूर्व में दिए गए ज्ञापन, मेडिकल दस्तावेजों और घटनास्थल की परिस्थितियों को आपस में जोड़कर देखा जा रहा है। पुलिस का कहना है कि मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है और जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही मौत के असली कारणों और अन्य तथ्यों पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।