शर्मनाक: मनीष पटेल कभी था शातिर चोर, लुटेरा और फिर बना यूट्यूबर; पुराना आपराधिक रिकॉर्ड देख पुलिस ने तैयार की सख्त कार्रवाई की रूपरेखा : पढ़िए पूरी कुंडली
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश के रीवा जिले से सोशल मीडिया पर अपनी पहचान बनाने वाले यूट्यूबर मनीष पटेल को आखिरकार पुलिस हिरासत में ले लिया गया है। लगभग 40 लाख फॉलोअर्स की आभासी दुनिया में रहने वाला यह युवा कानूनी शिकंजे में बुरी तरह फंस चुका है। मनीष पटेल के पिता का नाम समीर कुमार पटेल है और उसकी उम्र 20 वर्ष है। वह मूल रूप से ग्राम खुटहा, थाना लोर, जिला मठगंज का निवासी है, जबकि वर्तमान में वह शारदापुरम, थाना समान, जिला रीवा में रह रहा था।
मनीष पर समाज में वैमनस्यता फैलाने और अभद्र टिप्पणियां करने के गंभीर आरोप लगे हैं। 29 जनवरी को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पोस्ट किए गए एक विवादित वीडियो के बाद से ही वह पुलिस की रडार पर था। गंभीर बात यह है कि सोशल मीडिया की इस सनक के पीछे मनीष का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी उजागर हुआ है, जिससे पता चलता है कि वह आदतन कानून का उल्लंघन करता रहा है।
मनीष पटेल का पूरा आपराधिक रिकॉर्ड (क्राइम हिस्ट्री)
थाना प्रभारियों और स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, आरोपी मनीष पटेल के विरुद्ध रीवा के विभिन्न थानों में गंभीर धाराओं के तहत कुल 6 प्रकरण पंजीबद्ध हैं। यह सभी मामले वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन हैं। आरोपी की इस पुरानी आपराधिक प्रवृत्ति को दृष्टिगत रखते हुए पुलिस द्वारा सख्त वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। उसके पिछले मुकदमों का विवरण इस प्रकार है:
- विश्वविद्यालय थाना (प्रकरण 1): मनीष के खिलाफ विश्वविद्यालय थाने में अपराध क्रमांक 35/16 दर्ज है, जिसमें उस पर भारतीय दंड संहिता (भादवि) की धारा 356 और 34 के तहत मामला दर्ज किया गया था। यह मामला अभी अदालत में लंबित है।
- विश्वविद्यालय थाना (प्रकरण 2): इसी थाने में उसके खिलाफ एक और मामला अपराध क्रमांक 112/16 दर्ज है। इसमें उस पर चोरी की धारा 379 भादवि लगाई गई थी, जो न्यायालय में विचाराधीन है।
- विश्वविद्यालय थाना (प्रकरण 3): विश्वविद्यालय थाने में ही मनीष के विरुद्ध तीसरा मामला अपराध क्रमांक 252/16 के तहत दर्ज है। इसमें उस पर लूट से संबंधित गंभीर धारा 392 भादवि लगाई गई थी। यह मामला भी कोर्ट में चल रहा है।
- समान थाना, रीवा (प्रकरण 4): मनीष पटेल के खिलाफ समान थाने में भी अपराध क्रमांक 66/16 दर्ज है, जिसमें चोरी की धारा 379 भादवि के तहत मुकदमा कायम किया गया था। यह प्रकरण भी न्यायालय में लंबित है।
- सिविल लाइन थाना (प्रकरण 5): सिविल लाइन थाने में मनीष के खिलाफ अपराध क्रमांक 283/16 के अंतर्गत चोरी की धारा 379 भादवि के तहत मामला दर्ज है, जिसकी सुनवाई अदालत में चल रही है।
- सिविल लाइन थाना (प्रकरण 6 - नया मामला): सोशल मीडिया विवाद के बाद सिविल लाइन थाने में मनीष के खिलाफ अपराध क्रमांक 29/26 दर्ज किया गया है। इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196(1)(ए) और 351(3) के तहत मामला दर्ज कर उसे रिमांड पर लिया गया है।
सोशल मीडिया विवाद और ब्राह्मण समाज के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट क्या है?
यह पूरा नया विवाद तब शुरू हुआ जब मनीष पटेल ने अपने यूट्यूब चैनल, इंस्टाग्राम हैंडल और फेसबुक पेज पर एक सुनियोजित वीडियो संदेश साझा किया। इस वीडियो में ब्राह्मण समाज की युवतियों को लेकर बेहद आपत्तिजनक, अमर्यादित और भड़काऊ भाषा का प्रयोग किया गया था। वीडियो जैसे ही इंटरनेट पर वायरल हुआ, समाज के लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। धार्मिक और सामाजिक ताने-बाने को ठेस पहुंचाने के आरोप में ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधियों ने रीवा के सिविल लाइन थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
फरारी के दौरान सोशल मीडिया पर सक्रियता और पुलिस को चुनौती
प्राथमिकी (FIR) दर्ज होने के बाद गिरफ्तारी के डर से मनीष पटेल लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था। हालांकि, चौंकाने वाली बात यह रही कि वह पुलिस की नजरों से छिपे रहने के दौरान भी डिजिटल दुनिया में पूरी तरह सक्रिय था। 40 लाख फॉलोअर्स वाले इस यूट्यूबर ने अपनी फरारी के दौरान कई वैवाहिक समारोहों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में शिरकत की। इतना ही नहीं, उसने कानून को ठेंगा दिखाते हुए इन आयोजनों की तस्वीरें और वीडियो भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर लगातार अपलोड किए। वह पुलिस को चकमा देने के लिए लगातार अपने मोबाइल की लोकेशन बदल रहा था।
हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत खारिज और सिविल लाइन थाने में सरेंडर की इनसाइड स्टोरी
मनीष पटेल ने कानून से बचने के लिए हर संभव कानूनी रास्ता अपनाने की कोशिश की। उसने पहले रीवा की स्थानीय जिला अदालत और बाद में माननीय उच्च न्यायालय (High Court) में अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) के लिए याचिकाएं दायर कीं। लेकिन उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कोर्ट ने उसे कोई राहत नहीं दी। 22 मई को हाई कोर्ट द्वारा उसकी अग्रिम जमानत याचिका पूरी तरह से खारिज कर दी गई।
जमानत के रास्ते बंद होने और रीवा पुलिस की बढ़ती घेराबंदी के कारण मनीष के पास कोई विकल्प नहीं बचा। सिविल लाइन थाना प्रभारी विजय सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम लगातार उसकी टावर लोकेशन को ट्रैक कर रही थी। चारों तरफ से दबाव बढ़ता देख बुधवार को मनीष पटेल खुद सिविल लाइन थाने पहुंचा और आत्मसमर्पण (Surrender) कर दिया। पुलिस ने तुरंत उसे हिरासत में लेकर कोर्ट में पेश किया, जहां से माननीय न्यायाधीश ने उसे दो दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।
डिजिटल सबूतों की जब्ती और पुलिसिया पूछताछ का अगला चरण
थाना प्रभारी विजय सिंह के मुताबिक, सरेंडर करने के तुरंत बाद आरोपी का मुख्य स्मार्टफोन जब्त कर लिया गया है, जिसका उपयोग विवादित वीडियो को अपलोड करने के लिए किया गया था। पुलिस अब मनीष के अन्य डिजिटल उपकरणों, जैसे लैपटॉप और हार्ड डिस्क की तलाश कर रही है।
पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि क्या इस विवादित और नफरत भरे कंटेंट को तैयार करने में किसी अन्य स्क्रिप्ट राइटर या वीडियो एडिटर की भूमिका थी? साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि मनीष को फरारी काटने के लिए किस स्थानीय नेटवर्क या प्रभावशाली व्यक्ति की मदद मिल रही थी। सोशल मीडिया पर केवल व्यूज और टीआरपी बटोरने के लिए क्या इस तरह के विवादित पोस्ट जानबूझकर एक रणनीति के तहत डाले जा रहे थे, इसकी भी जांच जारी है। रीवा पुलिस आरोपी की आपराधिक प्रवृत्ति और उसके पुराने मुकदमों को ध्यान में रखते हुए सख्त से सख्त वैधानिक कार्रवाई करने की तैयारी में है।