95 लाख का भ्रष्टाचार और 25 साल का 'साम्राज्य': सतना के रामपुर बाघेलान में सीएमओ विश्वजीत कुशवाहा के काले कारनामों का पर्दाफाश

 

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) मध्य प्रदेश के सतना जिले के अंतर्गत आने वाली रामपुर बाघेलान नगर पंचायत एक बार फिर से गंभीर वित्तीय घोटालों और भ्रष्टाचार के दलदल में फंस चुकी है। इस बार मामला किसी छोटे-मोटी गड़बड़ी का नहीं, बल्कि 95 लाख रुपये से अधिक की भारी-भरकम रिकवरी और बड़े पैमाने पर सरकारी धन के दुरुपयोग का है। इस सनसनीखेज खुलासे ने पूरे विंध्य क्षेत्र के प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा दिया है।

प्राप्त जानकारी और सूचना के अधिकार (RTI) के तहत सामने आए दस्तावेजों के मुताबिक, नगर पंचायत में लंबे समय से वित्तीय नियमों को ताक पर रखकर पैसों की हेराफेरी की जा रही थी। शासन द्वारा भेजी गई और स्थानीय स्तर पर की गई संपरीक्षा में जब करोड़ों के गोलमाल की परतें खुलीं, तो जिम्मेदार अधिकारियों के होश उड़ गए। लेकिन सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है कि जनता के गाढ़े पसीने की कमाई और टैक्स के रूप में मिले करोड़ों रुपयों की इस खुली लूट पर जिम्मेदार तंत्र पूरी तरह से आंखें मूंदकर बैठा हुआ है।

25 साल से एक ही कुर्सी पर कब्जा और ऑडिट रिपोर्ट के खुलासे 
इस पूरे भ्रष्टाचार के केंद्र बिंदु में एक ऐसा चेहरा सामने आया है, जिसके प्रशासनिक रसूख और लंबी पैठ ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। दस्तावेजों के अनुसार, इस मामले के मुख्य केंद्र विश्वजीत कुशवाहा हैं, जिनकी प्रथम नियुक्ति ही नगर परिषद रामपुर बघेलान में बतौर उपयंत्री (Sub-Engineer) हुई थी। हैरानी की बात यह है कि तब से लेकर आज तक, यानी लगभग 25 वर्षों के लंबे अंतराल में यह अधिकारी इसी एक स्थान पर जमे हुए हैं।

नियमों और प्रशासनिक मान्यताओं के अनुसार किसी भी शासकीय सेवक का एक निश्चित समयावधि के बाद ट्रांसफर होना अनिवार्य होता है, लेकिन विश्वजीत कुशवाहा का एक ही कुर्सी पर इतने लंबे समय तक टिके रहना कई गंभीर शंकाओं को जन्म देता है। इसी मलाईदार और लंबी पदस्थापना के दौरान उन्होंने उपयंत्री होने के साथ-साथ प्रभारी सी.एम.ओ (Chief Municipal Officer) की जिम्मेदारी भी संभाली।

RTI से मिली 80 पृष्ठ की विस्फोटक ऑडिट रिपोर्ट
इस भ्रष्टाचार की पोल तब खुली जब आरटीआई के माध्यम से क्षेत्रीय कार्यालय स्थानीय निधि संपरीक्षा, मध्य प्रदेश, रीवा से वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2023-24 तक की एक विस्तृत और प्रमाणित 80 पृष्ठ की ऑडिट रिपोर्ट हाथ लगी। इस रिपोर्ट में साफ तौर पर वित्तीय वर्षों के दौरान किए गए खर्चों, बिलों में हेरफेर और नियमों के विरुद्ध जाकर किए गए भुगतानों का कच्चा-चिट्ठा सामने आया है। इसी रिपोर्ट के आधार पर शासन स्तर पर 95 लाख रुपये से अधिक की रिकवरी के निर्देश सामने आए हैं।

अधिकारी की गैर-जिम्मेदाराना प्रतिक्रिया और राजनीतिक चुप्पी 
जब रीवा न्यूज़ मीडिया और जागरूक मंचों द्वारा इस 95 लाख रुपये के भारी-भरकम घोटाले और ऑडिट रिपोर्ट में सामने आई आपत्तियों पर प्रभारी सीएमओ विश्वजीत कुशवाहा से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो उनका जवाब बेहद चौंकाने वाला और अहंकारी था।

अपनी कुर्सी के घमंड में चूर विश्वजीत कुशवाहा ने बेहद लापरवाह अंदाज में यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि "उन्होंने अभी तक रिपोर्ट पढ़ी ही नहीं है।" जनता के करोड़ों रुपये के गबन और शासन की रिकवरी रिपोर्ट पर एक जिम्मेदार अधिकारी का यह बयान इस बात का सबूत है कि उन्हें कानून, शासन और जनता के प्रति कोई जवाबदेही महसूस नहीं होती। जब अधिकारी ही इतने बेपरवाह हो जाएं, तो भ्रष्टाचार का ग्राफ बढ़ना स्वाभाविक है।

जनप्रतिनिधियों और विपक्ष की संदिग्ध चुप्पी
इस भयंकर घोटाले के उजागर होने के बाद स्थानीय जनता, प्रबुद्ध नागरिकों और युवाओं में भारी आक्रोश व्याप्त है। सबसे बड़ा सवाल यह पूछा जा रहा है कि स्थानीय राजनीतिज्ञों, सत्ताधारी दल के नेताओं और विपक्ष के नुमाइंदों की इस मामले पर जुबान क्यों सिली हुई है? जनता के धन की हो रही इस खुली लूट पर सभी जनप्रतिनिधि गूंगे-ब बहरे क्यों बने बैठे हैं? क्या इस प्रशासनिक भ्रष्टाचार में पर्दे के पीछे राजनेताओं और अधिकारियों की कोई गहरी मिलीभगत है, जिसके चलते किसी पर भी ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है? आखिर किसके सिर पर इस भ्रष्ट अधिकारी का हाथ है?

आगे के बड़े खुलासे: 'जेसीबी घोटाला' और 'बोलेरो कांड' 
खोजी पत्रकारिता और अंदरखाने से मिल रही पुख्ता जानकारियों के अनुसार, रामपुर बघेलान नगर पंचायत में चल रहा यह वित्तीय भ्रष्टाचार तो महज एक 'झांकी' है। आने वाले दिनों में इस नगर पंचायत के काले कारनामों की एक और लंबी और भयावह फेहरिस्त जनता के सामने आने वाली है।

सूत्रों का दावा है कि जल्द ही बहुचर्चित 'जेसीबी घोटाले' और सनसनीखेज 'बोलेरो कांड' से जुड़े ऐसे पुख्ता और अकाट्य दस्तावेज़ सार्वजनिक किए जाएंगे, जो विंध्य की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में भूचाल ला सकते हैं। इन आगामी खुलासों से कई बड़े और सफेदपोश चेहरों के नकाब उतरने तय माने जा रहे हैं।