सिंगरौली में 'आयुष्मान' के नाम पर महालूट: गरीबों के हक पर डाका, करोड़ों की फर्जी बिलिंग और अवैध वसूली का खुलासा; जाँच की आंच में जिले के 4 दिग्गज अस्पताल

 

करोड़ों की फर्जी बिलिंग और अवैध वसूली का खुलासा; जाँच की आंच में जिले के 4 दिग्गज अस्पताल

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। प्रधानमंत्री की सबसे महत्वाकांक्षी योजना 'आयुष्मान भारत', जिसका उद्देश्य गरीबों को मुफ्त और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है, सिंगरौली जिले में कुछ निजी अस्पतालों के लिए 'कमाई का जरिया' बन गई है। यहाँ स्वास्थ्य सेवाओं की आड़ में एक ऐसा संगठित खेल चल रहा है जहाँ मरीजों का इलाज नहीं, बल्कि सरकार के खजाने का 'ऑपरेशन' किया जा रहा है। जिले के चार प्रमुख अस्पतालों पर लगे आरोपों ने पूरे प्रशासनिक अमले और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आरोपों के घेरे में सिंगरौली के ये 4 प्रमुख अस्पताल
स्थानीय शिकायतों और प्राथमिक रिपोर्टों के अनुसार, निम्नलिखित अस्पतालों की कार्यप्रणाली संदिग्ध पाई गई है:

  • सिंगरौली हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर
  • मिश्रा पॉली क्लिनिक एंड नर्सिंग होम (जिसे भ्रष्टाचार का प्रमुख केंद्र बताया जा रहा है)
  • वंदना हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर
  • विंध्य हॉस्पिटल, एनटीपीसी विन्ध्यनगर

सिंगरौली में आयुष्मान कार्ड से पैसे कैसे लूटे जा रहे हैं? 
इन अस्पतालों ने लूट के ऐसे तरीके ईजाद किए हैं जो आम आदमी की समझ से परे हैं। मरीजों और उनके परिजनों ने जो तथ्य साझा किए हैं, वे रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं:

  • कार्ड को 'बंधक' बनाना: अस्पताल पहुँचते ही सबसे पहले मरीज का आयुष्मान कार्ड जमा करा लिया जाता है। इसके बाद मरीज किसी दूसरे अस्पताल में जाने के लिए स्वतंत्र नहीं रहता।
  • इलाज मुफ्त, पर बिल निजी: योजना के तहत दंत, हड्डी, और सर्जरी जैसी सेवाएं मुफ्त हैं, लेकिन ये अस्पताल मरीजों को अलग से हजारों रुपये के निजी बिल थमा देते हैं।
  • बिना भर्ती किए भुगतान: पोर्टल पर ऐसे दर्जनों मामले मिले हैं जहाँ मरीज कभी अस्पताल पहुँचा ही नहीं, लेकिन उसके नाम पर लाखों रुपये का भुगतान सरकार से उठा लिया गया।
  • फर्जी सर्जरी का खेल: छोटी बीमारियों को बड़ी सर्जरी दिखाकर पोर्टल पर भारी-भरकम क्लेम किए जा रहे हैं।

सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक कैसे लगेगी?
इस पूरे घोटाले की जड़ें बहुत गहरी हैं। आरोप है कि जिला मुख्यालय स्थित ट्रॉमा सेंटर के सरकारी डॉक्टर अपनी सरकारी ड्यूटी छोड़कर इन निजी क्लीनिकों और अस्पतालों में सेवाएं दे रहे हैं। सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल निजी मुनाफे के लिए किया जा रहा है। जनता का सवाल है कि क्या प्रशासन को यह नहीं दिखता कि सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों की कमी क्यों है और वे निजी अस्पतालों में भीड़ क्यों लगा रहे हैं?

मिश्रा पॉली क्लिनिक: रसूख और भ्रष्टाचार का गठजोड़?
सिंगरौली की जनता के बीच 'मिश्रा पॉली क्लिनिक' को लेकर सबसे ज्यादा आक्रोश है। बताया जाता है कि यहाँ नियम केवल कागजों पर हैं। स्थानीय रसूख इतना प्रबल है कि अब तक किसी भी अधिकारी ने इस अस्पताल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं दिखाई। यहाँ तक कि मीडिया का एक बड़ा वर्ग भी इस पर मौन साधे हुए है।

जांच के नाम पर 'क्लीन चिट' का पुराना रिवाज
सिंगरौली में यह पहली बार नहीं है जब किसी घोटाले की गूँज उठी है। लोगों का मानना है कि यहाँ जांच शुरू तो होती है, सुर्खियां भी बनती हैं, लेकिन अंत में एक सोची-समझी स्क्रिप्ट के तहत अस्पतालों को 'क्लीन चिट' दे दी जाती है। क्या इस बार भी केवल फाइलों का पेट भरा जाएगा या फिर गरीबों को न्याय मिलेगा?

कलेक्टर गौरव सिंह से है आखिरी उम्मीद
सिंगरौली के वर्तमान कलेक्टर गौरव सिंह की छवि एक ईमानदार और सख्त अधिकारी की है। जिले की जनता अब उनकी ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रही है। लोगों का मानना है कि यदि कलेक्टर साहब इस मामले का निष्पक्ष 'थर्ड पार्टी ऑडिट' करवाएं, तो जिले के चिकित्सा जगत का यह काला चेहरा पूरी तरह बेनकाब हो जाएगा।