Samvidhan Divas 2025 : 'औपनिवेशिक मानसिकता छोड़ो, राष्ट्रीय सोच अपनाओ' - राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का देश को संदेश
संविधान दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने Samvidhan Sadan से किया आह्वान: Colonial Mindset त्यागकर nationalistic thinking अपनाएँ। Article 370 और नए कानूनों पर बात।
26 नवंबर, 2025 को संविधान दिवस (Constitution Day) के अवसर पर, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पुराने संसद भवन (जिसे अब 'संविधान सदन' कहा जाता है) के सेंट्रल हॉल से देश को संबोधित किया। उनके संबोधन का मुख्य स्वर राष्ट्रीय पहचान और औपनिवेशिक विरासत (colonial legacy) को त्यागने पर केंद्रित रहा। राष्ट्रपति मुर्मू ने स्पष्ट रूप से कहा कि हमारा संविधान न केवल देश की पहचान का एक प्रतीक है, बल्कि यह औपनिवेशिक मानसिकता (Colonial Mindset) को छोड़ने और राष्ट्रीय सोच (Nationalistic Thinking) को अपनाने वाला एक मार्गदर्शक दस्तावेज़ (guiding document) भी है।
संविधान: राष्ट्रीय पहचान और औपनिवेशिक मानसिकता को त्यागने का मार्ग
- राष्ट्रपति ने ज़ोर देकर कहा कि भारत दुनिया के सामने विकास का एक नया मॉडल (new model of development) प्रस्तुत कर रहा है। यह संभव हो पाया है क्योंकि देश ने लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम (significant steps) उठाए हैं।
- उन्होंने कहा, "हमारा संविधान राष्ट्रीय गौरव (national pride) का दस्तावेज़ है। यह राष्ट्र की पहचान का दस्तावेज़ है। यह औपनिवेशिक मानसिकता को त्यागने और राष्ट्रीय दृष्टिकोण को अपनाने और देश को आगे ले जाने का दस्तावेज़ है।"
राष्ट्रपति ने यह भी याद दिलाया कि संविधान निर्माताओं की इच्छा थी कि हर भारतीय के व्यक्तिगत और लोकतांत्रिक अधिकारों (personal and democratic rights) को हमेशा सुरक्षित रखा जाए।
नए आपराधिक कानून: न्याय प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव
राष्ट्रपति मुर्मू ने औपनिवेशिक मानसिकता को त्यागने के अपने दृष्टिकोण को मजबूत करते हुए, हाल ही में लागू किए गए तीन नए आपराधिक कानूनों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इसी दृष्टिकोण के साथ देश ने इन कानूनों को अपनाया है:
- भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita): इसने औपनिवेशिक काल के भारतीय दंड संहिता (IPC) का स्थान लिया।
- भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita): इसने आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) का स्थान लिया।
- भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Bharatiya Sakshya Adhiniyam): इसने 1872 के भारतीय साक्ष्य अधिनियम का स्थान लिया।
ये तीनों नए कानून 1 जुलाई, 2024 से प्रभावी हो चुके हैं, जो देश की न्याय प्रणाली में भारतीय मूल्यों (Indian values) और राष्ट्रीय दृष्टिकोण को समाहित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
पिछले दशक के बड़े विधायी कदम: Article 370 और GST
राष्ट्रपति ने पिछले एक दशक में संसद द्वारा उठाए गए महत्वपूर्ण कदमों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इन कदमों ने लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने में मदद की है।
- अनुच्छेद 370 का निरसन (Abrogation of Article 370): उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले इस प्रावधान को समाप्त करके, राष्ट्र को एक राजनीतिक बाधा (political obstacle) से मुक्त किया गया है।
- तीन तलाक पर प्रतिबंध (Banning Triple Talaq): इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया।
- जीएसटी व्यवस्था (GST Regime): इसे देश की वित्तीय मजबूती और आर्थिक एकीकरण (financial empowerment and economic integration) के लिए एक बड़ा कदम माना गया।
आर्थिक और सामाजिक प्रगति: विकास का नया मॉडल
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि देश दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था (third largest economy) बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने देश की एक सबसे बड़ी उपलब्धि का भी उल्लेख किया।
- गरीबी उन्मूलन: उन्होंने कहा कि 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं, जो देश की सबसे बड़ी उपलब्धि में से एक है।
- लोकतांत्रिक मजबूती: उन्होंने ज़ोर दिया कि देश की महिलाएं, युवा, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), किसान, मध्य वर्ग और नया मध्य वर्ग, सभी मिलकर लोकतांत्रिक व्यवस्था (democratic system) को मजबूत कर रहे हैं।
संविधान का डिजिटल विमोचन और विपक्ष का पलटवार
कार्यक्रम के दौरान, राष्ट्रपति ने संविधान के डिजिटल संस्करण (digital version) को नौ भाषाओं में जारी किया। इन भाषाओं में मलयालम, मराठी, नेपाली, पंजाबी, बोडो, कश्मीरी, तेलुगु, उड़िया और असमिया शामिल हैं।
राष्ट्रपति ने कार्यक्रम का नेतृत्व करते हुए संविधान की प्रस्तावना (Preamble) का वाचन भी किया। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी समेत दोनों सदनों के कई गणमान्य सदस्य शामिल हुए।
हालांकि, कांग्रेस नेता रमेश (Ramesh) ने कार्यक्रम से अलग बयान देते हुए आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री जानबूझकर संवैधानिक सिद्धांतों (constitutional principles) को कमजोर कर रहे हैं।
निष्कर्ष: नए भारत के लिए संविधान की भूमिका
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का संविधान दिवस पर दिया गया यह संदेश स्पष्ट है: भारत को अपनी औपनिवेशिक बेड़ियों को तोड़कर, आत्मनिर्भरता (self-reliance) और राष्ट्रीयता के सिद्धांतों पर आधारित एक विकसित राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ना है। संविधान इस यात्रा में हमारा सर्वोच्च मार्गदर्शक (supreme guide) है, और हाल के विधायी बदलाव इस बात के प्रमाण हैं कि देश अपने मूल मूल्यों की ओर लौट रहा है।