भोपाल में संविदा कर्मियों का महाशक्ति प्रदर्शन: 10 सूत्रीय मांगों पर झुकी सरकार! CM ने किया कमेटी का ऐलान, क्या अब सबको मिलेगा नियमितीकरण?
भोपाल में संविदा कर्मियों का विशाल जमावड़ा; नियमितीकरण, DA और बीमा सहित 10 बड़ी मांगों पर सीएम ने दिया आश्वासन।
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का न्यू दशहरा मैदान आज संविदा अधिकारियों और कर्मचारियों के नारों से गूंज उठा। सालों से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हजारों कर्मचारियों ने एकजुट होकर 'संविदा महासम्मेलन' के माध्यम से सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाई। इस सम्मेलन की सबसे बड़ी उपलब्धि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी रही, जिन्होंने कर्मचारियों के महत्व को रेखांकित करते हुए उनकी तुलना 'हनुमान' से कर दी।

जैसे श्रीराम को हनुमान की जरूरत थी, वैसे ही सरकार को आपकी" – सीएम
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए भावुक और प्रेरक अंदाज में कहा कि किसी भी सरकारी योजना को जमीन पर उतारने का असली श्रेय संविदा कर्मियों को जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संविदा कर्मचारी सरकार के अभिन्न अंग हैं। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार उनकी मांगों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और जल्द ही सकारात्मक नतीजे सामने आएंगे।

संविदा संयुक्त संघर्ष मंच का नेतृत्व और आयोजन
इस ऐतिहासिक आयोजन की रूपरेखा संविदा संयुक्त संघर्ष मंच द्वारा तैयार की गई थी। प्रदेश संयोजक दिनेश तोमर, डी.के. उपाध्याय, और महामंत्री सजल भार्गव जैसे दिग्गजों के साथ-साथ के.के. शर्मा और अरविंद यादव के संयुक्त प्रयासों ने प्रदेश भर के संविदा कर्मियों को एक मंच पर ला खड़ा किया। मंच का मुख्य उद्देश्य संविदा नीति 2023 का पूर्ण क्रियान्वयन और शोषण मुक्त कार्यप्रणाली सुनिश्चित करना है।
किन विभागों ने दिखाई ताकत? (सर्व शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य तक)
मंच के जिला अध्यक्ष कृष्ण कुमार उपाध्याय के अनुसार, इस सम्मेलन में शासन के लगभग हर विभाग के संविदा कर्मी शामिल हुए।
- प्रमुख विभाग: स्वास्थ्य विभाग, सर्व शिक्षा अभियान, आजीविका मिशन, मनरेगा।
- अन्य क्षेत्र: महिला एवं बाल विकास, वाटरशेड, कृषि (आत्मा योजना) और सामाजिक न्याय विभाग। इन सभी विभागों के कर्मचारियों की एक ही मांग है— समान कार्य, समान वेतन और स्थायी भविष्य।
भारतीय मजदूर संघ की 10 सूत्रीय माँगें: एक नजर में
भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश महामंत्री कुलदीप सिंह गुर्जर ने मुख्यमंत्री के समक्ष 10 प्रमुख मांगों का चार्टर रखा, जिनमें से कुछ मुख्य हैं:
- संविलियन: 10 साल से अधिक अनुभवी कर्मियों को नियमित पदों पर समायोजित करने हेतु समिति।
- महंगाई भत्ता (DA): CPI इंडेक्स के बजाय नियमित कर्मचारियों की तरह DA का लाभ।
- अवकाश सुविधा: नियमित कर्मियों की तरह मेडिकल और अर्जित अवकाश की पात्रता।
- सामाजिक सुरक्षा: 20 लाख रुपये का सामूहिक बीमा और अनुकंपा नियुक्ति का स्पष्ट आदेश।
- पदोन्नति: अनुभवी संविदा कर्मियों को वरिष्ठ पदों पर प्रमोशन और प्रतिनियुक्ति की सुविधा।
- आवास: शासकीय आवास का आवंटन अथवा मकान किराया भत्ता (HRA)।
मुख्यमंत्री का बड़ा ऐलान: मांगों के समाधान के लिए बनेगी 'विशेष समिति'
कर्मचारियों की जायज मांगों को सुनने के बाद सीएम ने मंच से घोषणा की कि जिन मांगों को तत्काल पूरा किया जा सकता है, उन पर सरकार तुरंत निर्णय लेगी। जटिल तकनीकी और वित्तीय मामलों के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित की जाएगी। इस समिति की खास बात यह होगी कि इसमें कर्मचारियों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे, ताकि निर्णय पारदर्शी और सर्वसम्मत हो सके।