लाइक्स के चक्कर में करियर पर लगा दाग! रीवा के मनीष पटेल पर FIR, पुलिस की चेतावनी- 'नहीं चलेगा भावनाओं का अपमान'

 
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ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा के चर्चित यूट्यूबर मनीष पटेल एक बार फिर अपनी विवादित सामग्री (Content) के कारण कानूनी पचड़े में फंस गए हैं। वैलेंटाइन डे के अवसर पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में मनीष ने ब्राह्मण समाज की युवतियों और बहनों के लिए बेहद आपत्तिजनक और अमर्यादित शब्दों का उपयोग किया। वीडियो के वायरल होते ही समाज में भारी आक्रोश फैल गया, जिसके बाद सिविल लाइन पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की है।

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शाम 4 बजे का वो वीडियो और समाज का पलटवार
अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के प्रदेश सचिव सतीश चौबे और वरिष्ठ अधिवक्ताओं के एक बड़े समूह ने पुलिस को सौंपे शिकायती पत्र में बताया कि मनीष पटेल का कृत्य न केवल एक जाति विशेष का अपमान है, बल्कि यह महिला गरिमा और सामाजिक सौहार्द पर सीधा हमला है। शिकायतकर्ताओं में RTI एक्टिविस्ट बी.के. माला, रीवा न्यूज़ मीडिया के संपादक ऋतुराज द्विवेदी और लॉ एजेंसी के संचालक शिवेश गौतम सहित वरिष्ठ अधिवक्ता: प्रदीप पांडेय, हरीश पांडेय, विवेक मिश्रा, तरुणेंद्र शेखर पांडेय, प्रदीप बघेल, अमित सिंह, कमलेश्वर तिवारी, राजेंद्र शर्मा और राममणि मिश्रा शामिल रहे।

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कानूनी शिकंजा: नई धाराओं के तहत मामला दर्ज
अधिवक्ताओं के समूह ने स्पष्ट किया कि अब पुराने कानून की जगह भारतीय न्याय संहिता (BNS) प्रभावी है। इसी के तहत मनीष पटेल पर गंभीर धाराएं लगाई गई हैं:

  • BNS धारा 195 व 196: विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता बढ़ाना और सद्भाव बिगाड़ना।
  • BNS धारा 299: धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर ठेस पहुँचाना।
  • BNS धारा 352 व 353: किसी विशिष्ट वर्ग या लिंग (महिला) का अपमान करना और उनकी गरिमा को निशाना बनाना।

विवादों का पुराना नाता: माफी से काम नहीं चला
यह पहली बार नहीं है जब मनीष पटेल विवादों में आए हों। इससे पहले भी उन्होंने भारतीय सैनिकों और करवा चौथ जैसे धार्मिक पर्वों पर अभद्र टिप्पणियां की थीं। पिछले मामलों में मनीष ने माफी मांगकर मामले को रफा-दफा कर दिया था, लेकिन इस बार समाज और पुलिस, दोनों का रुख काफी सख्त है। अभी तक मनीष पटेल की ओर से कोई आधिकारिक सफाई सामने नहीं आई है।

पुलिस की चेतावनी: "रील के चक्कर में न बिगाड़ें सौहार्द"
रीवा पुलिस ने जिले के सभी कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को स्पष्ट शब्दों में हिदायत दी है। पुलिस का कहना है कि अभिव्यक्ति की आज़ादी का मतलब किसी के धर्म, जाति या भावनाओं का अपमान करना कतई नहीं है। जो भी रील या वीडियो के माध्यम से सामाजिक एकता को तोड़ने का प्रयास करेगा, उसके खिलाफ सख्त वैधानिक कदम उठाए जाएंगे।

जिम्मेदारी बनाम लोकप्रियता
डिजिटल दौर में 'फॉलोअर्स' और 'लाइक्स' की दौड़ ने नैतिकता को पीछे छोड़ दिया है। मनीष पटेल का यह मामला एक बड़ा उदाहरण है कि सोशल मीडिया की ताकत का गलत इस्तेमाल आपको बड़ी मुश्किल में डाल सकता है। कानून की चौखट पर अब यह तय होगा कि लोकप्रियता की आड़ में अपमानजनक कंटेंट पर लगाम कैसे लगेगी।

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