रीवा में मौत का सौदा: बिना डिग्री के टेक्नीशियन बना रहे रिपोर्ट, CT-Scan सेंटरों की बाढ़, आयुष्मान के नाम पर लूट और प्रशासनिक चुप्पी के पीछे 'वसूली' का आरोप

 
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सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना; न फायर एनओसी, न पार्किंग, फिर भी CMHO ने बांटे लाइसेंस? जल्द सार्वजनिक होंगे उन अस्पतालों के नाम, जहाँ चल रहा है लूट और मौत का संगठित व्यापार

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा शहर आज एक ऐसे चौराहे पर खड़ा है जहाँ हर दूसरी गली और चौराहे पर एक नया अस्पताल, क्लिनिक या सीटी-स्कैन (CT-Scan) सेंटर खुल गया है। यह सुनने में विकास लग सकता है, लेकिन हकीकत में यह शहर की भोली-भाली जनता को लूटने का एक "डेथ ट्रैप" है। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के सख्त निर्देशों के बावजूद, रीवा प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की रहस्यमयी चुप्पी ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं

'वसूली' का सिंडिकेट: क्यों नहीं होती कार्रवाई?
अंदरूनी सूत्र (Sources) बताते हैं कि रीवा में अवैध अस्पतालों पर कार्रवाई न होने की वजह बहुत गहरी है। आरोप है कि CMHO कार्यालय से जुड़े कुछ खास लोग हर महीने इन अस्पतालों और सेंटरों से 'नियत राशि' की वसूली करते हैं। यही कारण है कि 2 मंजिला मकानों में, बिना पार्किंग और बिना फायर सेफ्टी के चल रहे ये अस्पताल प्रशासन की नजरों में "फिट" बने हुए हैं। जब तक 'महीने' का हिसाब सही रहता है, तब तक मरीजों की मौतें भी फाइलों में दब जाती हैं।

रिपोर्ट का 'खतरनाक' खेल: नौसिखियों के हाथ में आपकी जान
पैथोलॉजी लैब और रेडियोलॉजी सेंटरों की स्थिति और भी भयावह है। नियमों के अनुसार, हर लैब में डिग्री धारी लैब टेक्नीशियन और एक पैथोलॉजिस्ट का होना अनिवार्य है।

  • हकीकत: रीवा के गली-मोहल्लों में खुले सेंटरों में ऐसे लड़के रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं जिन्हें मेडिकल टर्म्स की बुनियादी समझ भी नहीं है।
  • नतीजा: गलत रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर गलत इलाज शुरू कर देते हैं, जिससे मरीज की स्थिति सुधरने के बजाय बिगड़ जाती है।

आयुष्मान कार्ड: गरीबों की उम्मीद या मुनाफाखोरी का जरिया?
आयुष्मान भारत योजना के नाम पर रीवा में 'ओपन स्कैम' चल रहा है। अस्पताल वाले कार्ड होने के बावजूद मरीजों से 10 से 20 हजार रुपये नकद ऐंठते हैं और फिर उसी मरीज के नाम पर सरकार से 10 से 50 गुना ज्यादा का फर्जी बिल क्लेम करते हैं। यह जनता के टैक्स के पैसे की सीधी डकैती है।

मानक बनाम मनमानी: कहाँ है पार्किंग और वेंटिलेशन?
सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइंस के मुताबिक, किसी भी अस्पताल के लिए निर्धारित स्क्वायर फीट जगह, कमर्शियल इलेक्ट्रिक कनेक्शन और उचित पार्किंग व्यवस्था जरूरी है।

  • रीवा में अस्पताल रिहायशी मकानों में चल रहे हैं।
  • एम्बुलेंस के लिए जगह नहीं है, मरीज सड़कों पर गाड़ियां खड़ी करते हैं।
  • क्या CMHO ने कभी इन "कुकुरमुत्तों" की तरह उगे सेंटरों के नक्शे और रजिस्ट्रेशन की जांच की है?

'रीवा न्यूज़ मीडिया' की अगली कड़ी: नामों का होगा खुलासा
हमारा उद्देश्य किसी विशेष डॉक्टर या संस्थान को निशाना बनाना नहीं, बल्कि रीवा की जनता को जागरूक करना और उनकी जान की रक्षा करना है। 'रीवा न्यूज़ मीडिया' अपनी अगली विशेष सीरीज में उन सभी अस्पतालों, पैथोलॉजी लैब और सीटी-स्कैन सेंटरों की सूची सार्वजनिक करेगा जो:

  • बिना वैध लाइसेंस के चल रहे हैं।
  • जहाँ योग्य MBBS डॉक्टर्स मौजूद नहीं हैं।
  • जो आयुष्मान कार्ड के नाम पर मरीजों को लूट रहे हैं।

यह लड़ाई रीवा की जनता के हक की है। हम प्रशासन से मांग करते हैं कि भ्रष्टाचार की चादर ओढ़कर बैठने के बजाय, इन अवैध संस्थानों पर तत्काल बुलडोजर चलाया जाए।

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