"प्यार, परिवार और मौत का मुहाना: रीवा की बेटी ने जब हार मान ली, तब खाकी ने याद दिलाया मां-बाप का चेहरा!"
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। विंध्य की वादियों में स्थित पुरवा वाटरफॉल शुक्रवार को एक खौफनाक मंजर का गवाह बना, जहाँ एक युवती और मौत के बीच महज चंद इंच का फासला रह गया था। लेकिन, सेमरिया पुलिस की संवेदनशीलता और 'संवाद' के जादू ने एक बुझते हुए चिराग को फिर से रोशन कर दिया।

शुक्रवार की दोपहर पुरवा वाटरफॉल पर घूमने आई एक युवती अचानक सुरक्षा घेरा तोड़कर झरने की आखिरी सरहद (डेड लाइन) पर जा खड़ी हुई। नीचे हजारों फीट गहरी खाई और मुहाने पर खड़ी जिंदगी। जब युवती ने नीचे कूदने के इरादे से हाथ हिलाकर लोगों को 'अलविदा' कहा, तो वहाँ मौजूद हर शख्स की धड़कनें रुक गईं। मंजर ऐसा था कि कोई भी चूक युवती को सीधा मौत की आगोश में धकेल सकती थी।
वर्दी के पीछे का 'मसीहा' जाग उठा
घटना की सूचना मिलते ही सेमरिया थाना प्रभारी विकास कपीस अपनी टीम के साथ मौके पर पहुँचे। यहाँ पुलिस ने पारंपरिक तरीके छोड़कर 'भावनात्मक सुरक्षा' का रास्ता अपनाया। जब युवती कूदने पर अड़ी थी, तब पुलिस टीम ने उसे डांटने के बजाय एक बड़े भाई और अभिभावक की तरह उससे बात करना शुरू किया।
ढाई घंटे तक चली 'इमोशनल' काउंसलिंग
झरने के शोर के बीच पुलिस लगातार युवती को उसके माता-पिता और सुनहरे भविष्य का वास्ता देती रही। लगभग 150 मिनट (ढाई घंटे) तक पुलिस और स्थानीय लोगों ने युवती के मन में जीने की उम्मीद जगाई। आखिरकार, पुलिस के प्यार भरे संवाद और समझाइश के आगे युवती की जिद हार गई और उसने पीछे मुड़कर पुलिस का हाथ थाम लिया।
वजह: अपनी पसंद की शादी और पारिवारिक दबाव
सुरक्षित रेस्क्यू के बाद पता चला कि युवती रीवा की ही रहने वाली है। वह अपनी पसंद से शादी करना चाहती थी, लेकिन परिवार के दबाव और जबरन शादी के फैसले ने उसे इस कदर तोड़ दिया कि उसने मौत को चुनना बेहतर समझा।
परिजनों को हिदायत और युवती को सहारा
थाना प्रभारी ने न केवल युवती की जान बचाई, बल्कि उसके परिजनों को भी बुलाकर उनकी काउंसलिंग की। उन्हें समझाया गया कि बच्चों के फैसलों पर दबाव बनाने के परिणाम कितने आत्मघाती हो सकते हैं। युवती को सुरक्षित परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया है।