रीवा संभाग का सबसे बड़ा शिक्षा घोटाला: मैहर में 17 प्राचार्य और बीईओ ने मिलकर डकारे 4.37 करोड़, रीवा में दबाई गई जांच रिपोर्ट
बिना काम किए भुगतान: फाइलों में स्कूल चमक गए, हकीकत में खंडहर रह गए,17 प्राचार्य, बीईओ और ठेकेदारों पर मुकदमा दर्ज।
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। मैहर जिले के रामनगर क्षेत्र में सरकारी स्कूलों की सूरत बदलने के लिए सरकार ने करोड़ों का बजट जारी किया था। उद्देश्य था—स्कूलों की मरम्मत, पार्किंग शेड और साइकिल स्टैंड का निर्माण। लेकिन बीईओ रामनगर और 17 प्राचार्यों की नियत कुछ और ही थी। उन्होंने मिलकर ऐसी साजिश रची कि बिना एक ईंट लगाए पूरी राशि तीन निजी कंपनियों के खातों में ट्रांसफर कर दी गई। यह सीधा-सीधा सरकारी खजाने पर डाका था।
जांच कमेटी का खुलासा: कागजों पर हुआ निर्माण
जब भ्रष्टाचार की बू मैहर कलेक्टर तक पहुँची, तो उन्होंने एसडीएम शिव प्रकाश मिश्रा के नेतृत्व में एक जांच दल भेजा। जांच में पाया गया कि स्कूलों में कोई लघु निर्माण या मरम्मत हुई ही नहीं थी। बीईओ ने अपने आहरण अधिकारों का गलत इस्तेमाल किया और प्राचार्यों ने फर्जी बिलों पर अपनी सील-सिक्के लगा दिए। जांच टीम ने पाया कि यह कोई छोटी-मोटी चूक नहीं, बल्कि 4 करोड़ 37 लाख रुपए का संगठित अपराध है।
FIR की गाज: 22 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज
इस महाघोटाले के उजागर होते ही हड़कंप मच गया। कमिश्नर ने पहले बीईओ को सस्पेंड किया, फिर 13 प्राचार्यों को लाइन हाजिर कर दिया गया। लेकिन असली कार्रवाई 8 फरवरी 2026 को हुई जब रामनगर पुलिस ने BNS की धारा 316/2, 316/5, 61/2, और 318/2 के तहत मामला दर्ज किया। आरोपियों में प्रभारी बीईओ, भृत्य, 17 प्राचार्य और 3 बड़ी सप्लाई कंपनियां शामिल हैं।
ये हैं घोटाले के मुख्य किरदार (बिना शीट के विवरण)
इस भ्रष्टाचार की आग में कई बड़े नाम झुलस गए हैं। एफआईआर में मुख्य रूप से बीईओ संतोष कुमार सिंह और भृत्य विनोद कुमार पटेल का नाम शामिल है। इसके अलावा जिन स्कूलों के प्राचार्यों और शिक्षकों पर मुकदमा हुआ है उनमें:
- हाई स्कूल बड़वार के संकर्षण प्रसाद पाण्डेय
- मनकहरी के राजेश कुमार साकेत
- देवराजनगर के रामलखन रावत
- छिरहाई के रामाधार वर्मा
- गोविंदपुर के मथुरा प्रसाद वर्मा
- देवरा मोलहाई की रजनी पुरवार
- सगौनी के रविन्द्र सिंह
- गोरसरी के प्राचार्य गुलजार सिंह टेकाम
इसके अलावा मड़वार, सुलखंमा, मिरगौती, कंदवारी, मझटोलवा, हर्रई, देवदहा, मर्यादपुर और गुजारा स्कूलों के प्रमुखों पर भी कानून का शिकंजा कसा है।
ठेकेदार कंपनियों में वाणी इन्फ्रास्ट्रक्चर (भोपाल), श्रीमहाकाल ट्रेडर्स (सतना) और श्री रुद्र इंटरप्राइजेज (मैहर) को भ्रष्टाचार का मुख्य सहभागी बनाया गया है।
रीवा में क्यों छाया है सन्नाटा?
मैहर और सतना में जहाँ कलेक्टर ने 24 घंटे में आरोपियों को जेल भेजने की तैयारी कर ली, वहीं रीवा प्रशासन पूरी तरह निष्क्रिय नजर आ रहा है। रीवा में भी 28 लाख का घोटाला पकड़ा गया था। जांच रिपोर्ट में भ्रष्टाचार साबित हो चुका है, लेकिन कमिश्नर कार्यालय में यह रिपोर्ट 'डंप' पड़ी है। यहाँ के भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने के लिए रसूखदारों का दबाव काम कर रहा है। जनता सवाल पूछ रही है कि क्या रीवा का कानून अलग है?
वसूली या सिर्फ कागजी कार्रवाई?
यह घोटाला शिक्षा विभाग के मुंह पर एक तमाचा है। अब देखना यह है कि क्या पुलिस इन आरोपियों से जनता के टैक्स के 4.37 करोड़ रुपए वसूल कर पाएगी? यदि इन पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो सिस्टम पर से आम जनता का भरोसा उठ जाएगा।