रीवा के दो कांड, एक ही हकीकत: कहीं हथौड़ों से कुचला सिर, कहीं किसानों को नंगा कर पीटा; क्या बेखौफ हो गए हैं अपराधी? पुलिस की सुस्ती ने जनता को दहलाया
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा के चोरहटा थाना क्षेत्र से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो सभ्य समाज को शर्मसार कर देती है। यहाँ बाईपास निर्माण से जुड़े रसूखदार ठेकेदार और उसके कारिंदों ने दो सगे भाइयों, जो पेशे से किसान हैं, पर जानलेवा हमला कर दिया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें लाठी-डंडों से लैस दर्जन भर बदमाश निहत्थे किसानों को सड़क पर दौड़ाते हुए दिखाई दे रहे हैं।

विवाद की वजह: खेत का नुकसान माँगा तो मिली मौत जैसी सजा
पीड़ित सच्चू तिवारी और रघु तिवारी (निवासी किटवारिया) का कसूर सिर्फ इतना था कि उन्होंने अपने खेत के नुकसान की भरपाई माँगी थी। दरअसल, उनके खेत के पास बाईपास का काम चल रहा है, जहाँ निर्माण कार्यों के दौरान किसानों की सिंचाई वाली पाइप तोड़ दी गई। जब किसानों ने इसका विरोध किया और मुआवजे की बात की, तो उन्हें साजिश के तहत शांति विलास कॉलोनी के गेट पर "समझौते" के लिए बुलाया गया।
साजिश और हमला: तीन गाड़ियों में आए 'मौत के सौदागर'
जैसे ही किसान भाई मौके पर पहुँचे, वहां पहले से घात लगाए बैठे प्रोजेक्ट मैनेजर आरिफ और उसके दर्जन भर साथियों ने उन्हें घेर लिया। तीन अलग-अलग गाड़ियों से आए इन बदमाशों ने सरेराह गुंडागर्दी शुरू कर दी। आरोप है कि हमलावरों ने सच्चू तिवारी के कपड़े फाड़कर उन्हें अर्धनग्न कर दिया और लाठी-डंडों से तब तक पीटा जब तक वे बेसुध नहीं हो गए।

हैरानी की बात यह है कि घटना शुक्रवार रात की है, लेकिन पुलिस का रवैया संदेहास्पद रहा। रविवार को जब घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आया, तब जाकर मामले ने तूल पकड़ा। परिजनों का आरोप है कि वे घंटों तक चोरहटा थाने में बैठे रहे, लेकिन पुलिस ने रसूखदारों के दबाव में एफआईआर दर्ज नहीं की। थक-हारकर पीड़ितों को एसपी कार्यालय की शरण लेनी पड़ी।
थाना प्रभारी का तर्क: मेडिकल रिपोर्ट का इंतज़ार
चोरहटा थाना प्रभारी आशीष मिश्रा का कहना है कि जाँच चल रही है। उनका तर्क है कि पीड़ित पक्ष जिन गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कराना चाहता है, उसके लिए मेडिकल रिपोर्ट अनिवार्य है। हालांकि, सवाल यह उठता है कि क्या बीच सड़क पर हुई इस नग्न गुंडागर्दी और वीडियो सबूत के बाद भी पुलिस को 'तथ्यों' की तलाश है?
इलाके में भारी दहशत, गिरफ्तारी की मांग
इस घटना के बाद से किटवारिया और आसपास के क्षेत्रों के किसानों में भारी आक्रोश है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या विकास के नाम पर ठेकेदारों को किसानों का खून बहाने की इजाजत मिल गई है? अगर जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं।