रीवा मेडिकल कॉलेज में 'मुन्नाभाई' कांड: 145 नंबर वाली 547 का स्कोरकार्ड लेकर पहुंची, डीन ने मामला दबाया

 
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रीवा मेडिकल कॉलेज में फर्जीवाड़े का पर्दाफाश: 145 नंबर वाली छात्रा 547 का स्कोरकार्ड लेकर पहुंची, तीन कर्मचारियों की सिफारिश

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) रीवा का श्याम शाह मेडिकल कॉलेज एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार किसी अच्छी वजह से नहीं। एक फर्जी छात्रा ने MBBS में एडमिशन लेने का असफल प्रयास किया, जिसका खुलासा होने के बाद कॉलेज में हड़कंप मच गया। यह छात्रा 145 नंबर लाने के बावजूद 547 अंकों का फर्जी स्कोरकार्ड लेकर पहुंची थी। हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर फर्जीवाड़े में कॉलेज के ही तीन कर्मचारियों ने उसकी सिफारिश की थी, जिनमें से एक बाबू पहले भी लोकायुक्त के जाल में फंस चुका है।

फर्जीवाड़े का तरीका और खुलासा (How the Fraud Was Committed and Exposed)

जिस छात्रा ने यह फर्जीवाड़ा किया, उसका नाम एंजल तिवारी बताया जा रहा है, जो रीवा की कैलाशपुरी की रहने वाली है। NEET UG 2025 की परीक्षा में उसके वास्तविक अंक सिर्फ 145 थे, जबकि उसका ऑल इंडिया रैंक 109115 और एमपी स्टेट रैंक 14399 था। इन कम अंकों के बावजूद, उसने एक दूसरे अभ्यर्थी के अलॉटमेंट फॉर्म में हेरफेर करके अपना नाम और फर्जी अंक (547) डालकर एडमिशन लेने की कोशिश की।

फर्जीवाड़ा करने के लिए उसने किसी दूसरी छात्रा के स्कोरकार्ड में बदलाव किया, जिसे वह जानती थी कि वह रीवा मेडिकल कॉलेज में एडमिशन नहीं लेने वाली थी। इस फर्जी स्कोरकार्ड के साथ, वह कॉलेज की एडमिशन कमेटी के पास पहुंची। उसने इतना हंगामा और दबाव बनाया कि कमेटी को स्क्रूटनी शुरू करनी पड़ी। इस दौरान, कॉलेज के तीन बाबुओं ने भी उसके पक्ष में सिफारिश की, जिससे उसका हौसला और बढ़ गया।

लेकिन उसकी चाल तब नाकाम हो गई जब एडमिशन कमेटी ने ऑनलाइन NMC (National Medical Commission) से उसका अलॉटमेंट लेटर निकलवाया। छात्रा द्वारा दिए गए नाम से कोई भी अलॉटमेंट लेटर नहीं निकला। जैसे ही यह सच्चाई सामने आई, छात्रा तुरंत वहां से फरार हो गई।

फर्जीवाड़े के पीछे कौन? (Who Is Behind the Fraud?)

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मेडिकल कॉलेज के ही तीन कर्मचारियों ने इस फर्जी छात्रा का साथ दिया था। इन कर्मचारियों के दबाव के कारण ही एडमिशन कमेटी के सदस्य भी शुरू में गुमराह हो गए थे। यह घटना कॉलेज के अंदरूनी भ्रष्टाचार को उजागर करती है। यह सवाल उठता है कि क्या ये कर्मचारी पहले से ही ऐसे फर्जीवाड़े में शामिल थे और क्या यह पहली बार नहीं हुआ है?

डीन की चुप्पी और लापरवाही पर सवाल (Questions on the Dean's Silence and Negligence)

जब एडमिशन कमेटी ने इस पूरे मामले की जानकारी डीन डॉ. सुनील अग्रवाल को दी, तो उन्होंने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। इतनी बड़ी धोखाधड़ी का मामला सामने आने के बावजूद, उन्होंने न तो पुलिस में कोई शिकायत दर्ज कराई और न ही कोई FIR कराई। छात्रा के सभी दस्तावेज कॉलेज के पास होने के बावजूद, डीन का यह रुख बेहद लापरवाही भरा है। उनकी चुप्पी से यह मामला दब सकता है, जिससे भविष्य में ऐसे और फर्जीवाड़े हो सकते हैं। इस घटना से कॉलेज प्रशासन की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ रहे हैं।

पहले भी हो चुके हैं ऐसे मामले (Similar Cases Have Occurred Before)

यह पहली बार नहीं है जब श्याम शाह मेडिकल कॉलेज में इस तरह के फर्जीवाड़े सामने आए हैं। सालों पहले भी कई फर्जी छात्रों को यहां प्रवेश दिया गया था, जिन्हें बाद में "मुन्नाभाई" कहकर पकड़ा गया था और कॉलेज से बाहर कर दिया गया था। ऑनलाइन प्रक्रिया के कारण इस बार यह धोखाधड़ी शुरुआती चरण में ही पकड़ में आ गई, वरना शायद इतिहास फिर से दोहराया जाता।

आगे क्या? (What's Next?)

फिलहाल, छात्रा फरार है और डीन ने इस मामले को दबा दिया है। इस घटना से यह साफ हो गया है कि ऐसे फर्जीवाड़े को रोकने के लिए सिर्फ ऑनलाइन प्रक्रिया काफी नहीं है, बल्कि सख्त कानूनी कार्रवाई और कॉलेज के अंदर बैठे भ्रष्ट कर्मचारियों पर भी लगाम लगाना जरूरी है। अगर डीन जल्द ही इस मामले पर कार्रवाई नहीं करते हैं, तो शायद इस तरह के मामले फिर से सामने आएंगे।

FAQ
Q1: रीवा मेडिकल कॉलेज में फर्जीवाड़े का मामला क्या है?
A: एक छात्रा ने 145 नंबर लाने के बावजूद 547 अंकों का फर्जी स्कोरकार्ड दिखाकर MBBS में एडमिशन लेने का प्रयास किया।

Q2: इस मामले में छात्रा का नाम क्या है?
A: छात्रा का नाम एंजल तिवारी है, जो रीवा की कैलाशपुरी की रहने वाली है।

Q3: क्या इस फर्जीवाड़े में कोई और भी शामिल था?
A: हां, कॉलेज के तीन कर्मचारियों ने इस फर्जी छात्रा की सिफारिश की थी।

Q4: पुलिस में शिकायत क्यों नहीं दर्ज कराई गई?
A: कॉलेज के डीन डॉ. सुनील अग्रवाल ने इस मामले को दबा दिया और पुलिस को कोई जानकारी नहीं दी।

Q5: क्या पहले भी कॉलेज में ऐसे मामले हुए हैं?
A: हां, सालों पहले भी कई फर्जी छात्रों को इस कॉलेज में प्रवेश दिया गया था, जिन्हें बाद में पकड़ा गया था।

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