Rewa में रात 11 बजे के बाद भी धड़ल्ले से बिक रही शराब! Amhiya के वायरल Video ने खोली आबकारी विभाग की पोल; क्या 'ऊपर' तक पहुँच रहा है पैसा?

 
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Rewa Liquor Scam: 11 बजे की डेडलाइन सिर्फ़ कागज़ों में, कौन चला रहा है 'शराब माफिया'?

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) मध्यप्रदेश के रीवा शहर में कानून और नियमों को एक बार फिर शराब माफिया (Liquor Mafia) के सामने घुटने टेकते देखा जा रहा है। आधिकारिक तौर पर रात 11 बजे शराब दुकानें बंद करने का शासनिक आदेश (Government Order) सिर्फ कागज़ों में सिमट कर रह गया है। ताजा और विस्फोटक मामला (explosive case) शहर के अमहिया क्षेत्र से सामने आया है, जहां एक शराब दुकान खुलेआम नियमों का मज़ाक उड़ाते हुए आधी रात के बाद तक बिक्री करती पाई गई। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह अवैध कारोबार आबकारी विभाग (Excise Department) की नाक के नीचे नहीं, बल्कि उनकी सीधी सहमति या मौन समर्थन से चल रहा है। उच्च अधिकारी क्यों चुप हैं इस पूरे खेल पर?

अमहिया का 'हाफ-शटर' सीक्रेट ऑपरेशन: वीडियो ने खोली पोल

Rewa में रात भर शराब कैसे बिकती है, अमहिया में शराब कौन बेच रहा है

अमहिया क्षेत्र की एक देशी-विदेशी शराब की दुकान पर देर रात अवैध बिक्री (illegal sale) का एक वीडियो इस समय चर्चा का विषय बना हुआ है। जानकारी के अनुसार, रात 11 बजे की समय-सीमा बीत जाने के बाद, दुकान का शटर आधा गिरा (half-shutter down) दिया गया था। यह 'हाफ-शटर ऑपरेशन' दुकान बंद दिखने का भ्रम पैदा करता है, जबकि अंदर का खेल बेरोकटोक जारी था। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि ग्राहकों को बाहर से बोतलें थमाई जा रही हैं और पैसे शटर के नीचे से अंदर लिए जा रहे हैं।

यह केवल अमहिया की कहानी नहीं है; यह रीवा की हर प्रमुख शराब दुकान का खुला रहस्य है। यह गतिविधि साबित करती है कि यह कोई आकस्मिक घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित व्यापारिक मॉडल (well-planned business model) है जो सीधे तौर पर सरकारी खजाने और कानून-व्यवस्था को चुनौती दे रहा है।

नियमों की धज्जियाँ और आबकारी की 'अदृश्य' जाँच
रात 11 बजे के बाद दुकान क्यों खुली, आबकारी विभाग क्या कर रहा है

आबकारी अधिनियमों और उच्च न्यायालयों (High Courts) के निर्देशों के अनुसार, सभी शराब दुकानों को रात 11 बजे सख्ती से बंद करना अनिवार्य है। लेकिन रीवा में यह डेडलाइन शायद सरकारी कर्मचारियों के सोने का समय तय करती है, न कि अवैध बिक्री पर रोक लगाने का।

सवाल यह है: आबकारी विभाग क्या कर रहा है जब उनके अधिकार क्षेत्र में खुलेआम नियमों का उल्लंघन हो रहा है? क्या विभाग के पास रात में निगरानी (night surveillance) के लिए कोई टीम नहीं है? या फिर ये टीमें सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ाती हैं? हकीकत यह है कि इन दुकानों के रात भर चलने का सीधा मतलब है कि विभाग को न केवल इसकी पूरी जानकारी है, बल्कि मोटा कमीशन (heavy commission) भी पहुँच रहा है। यह कमीशन ही लाइसेंसधारियों (license holders) को कानून तोड़ने की खुली छूट देता है।

स्थानीय लोगों का आक्रोश: अपराधों की जड़ 
देर रात शराब बिक्री पर रोक कैसे लगे, कौन जिम्मेदार, Law and Order Rewa

देर रात तक होने वाली शराब की बेरोकटोक बिक्री का खामियाजा शहर की कानून-व्यवस्था (Law and Order) और आम जनता भुगत रही है। स्थानीय रहवासियों का स्पष्ट आरोप है कि देर रात शराब पीने और पिलाने के कारण झगड़े, मारपीट और चोरी जैसी अपराधिक घटनाएँ (criminal incidents) बढ़ गई हैं।

  • बढ़ता डर: रात के समय महिलाओं और बुजुर्गों का बाहर निकलना असुरक्षित हो गया है।
  • सार्वजनिक उपद्रव: दुकानों के आसपास देर रात तक हंगामा और शोरगुल आम है।

लोगों की शिकायतें हवा में हैं और विभाग की ओर से कोई ठोस निरीक्षण (inspection) या दंडात्मक कार्रवाई (punitive action) देखने को नहीं मिलती। इससे यह धारणा मजबूत होती है कि यह नियम उल्लंघन सिर्फ कागजों में सिमटा हुआ है, और अपराधियों को खुला संरक्षण मिल रहा है।

उच्चाधिकारियों पर सीधा निशाना: क्या सिर्फ कागजों में चलता है शासन?
उच्च अधिकारी क्यों चुप हैं, कौन जिम्मेदार, Rewa Liquor Scam

यह स्थिति अब सिर्फ दुकान या स्थानीय आबकारी इंस्पेक्टर तक सीमित नहीं रह गई है। जब अमहिया जैसे मुख्य बाजार क्षेत्र में खुलेआम नियम तोड़े जा रहे हैं और वीडियो सार्वजनिक हो रहे हैं, तब भी आबकारी विभाग और जिले के जिम्मेदार अधिकारी गूंगी चुप्पी (mute silence) साधे हुए हैं। यह चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े करती है:

ज्ञान की कमी या अनदेखी? क्या जिले के आबकारी मुखिया को वास्तव में पता नहीं है कि रात 11 बजे के बाद क्या हो रहा है? या जानकर भी जानबूझकर अनदेखी (willful ignorance) की जा रही है?
संरक्षण का स्रोत? क्या यह अवैध कारोबार इतना शक्तिशाली है कि इसकी जड़ें ऊपरी प्रशासनिक स्तर (upper administrative level) तक फैली हुई हैं? कौन जिम्मेदार है इस पूरे अवैध खेल को संरक्षण देने के लिए?

यह चुप्पी न केवल प्रशासनिक अक्षमता (administrative incompetence) का प्रमाण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि इस अवैध व्यापार से होने वाला वित्तीय लाभ (financial gain) शायद इतना बड़ा है कि कानून की मर्यादा (sanctity of law) भी इसके आगे फीकी पड़ गई है। उच्चाधिकारियों को तत्काल नींद से जागकर (waking up) इस मामले पर ठोस और निर्णायक कार्रवाई (firm and decisive action) करनी होगी, अन्यथा यह माना जाएगा कि यह पूरा 'शराब खेल' ऊपर के आदेश से चल रहा है।

निष्कर्ष: कब जागेगी जिम्मेदार व्यवस्था?
रीवा का यह वायरल मामला अवैध बिक्री और प्रशासनिक मिलीभगत (administrative collusion) का एक स्पष्ट उदाहरण है। इस पूरे खेल को बंद करने के लिए सिर्फ एक शराब दुकान पर जुर्माना लगाना काफी नहीं है; व्यवस्था को बदलने (changing the system) की जरूरत है। तत्काल प्रभाव से आबकारी विभाग के उन अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए, जिनके क्षेत्र में यह अवैध व्यापार चल रहा है। जब तक उच्चाधिकारी अपनी कुर्सी की जिम्मेदारी नहीं समझेंगे और भ्रष्टाचार (corruption) पर सख्त लगाम नहीं लगाएंगे, तब तक रीवा में रात 11 बजे की डेडलाइन सिर्फ कागज़ों का बोझ बनी रहेगी, और शहर की कानून-व्यवस्था बिगड़ती रहेगी।

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