डॉक्टर गायब, मरीज भूखे और दवाइयां गोल! कलेक्टर प्रतिभा पाल ने बैकुंठपुर CHC का सिस्टम हिलाया

 
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ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा जिले की प्रशासनिक मुखिया, कलेक्टर प्रतिभा पाल अपने सख्त तेवरों के लिए जानी जाती हैं। बुधवार को एक बार फिर उनका यह रूप तब देखने को मिला जब वे अचानक बैकुंठपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) जा पहुँचीं। बिना किसी पूर्व सूचना के हुए इस निरीक्षण से पूरे अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

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बैकुंठपुर स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों की मनमानी पर कैसे लगी लगाम?
अस्पताल का मुख्य उद्देश्य जनता को स्वास्थ्य सुविधाएं देना है, लेकिन बैकुंठपुर CHC की तस्वीर कुछ और ही बयां कर रही थी। जब कलेक्टर प्रतिभा पाल अस्पताल परिसर में दाखिल हुईं, तो उन्हें कई केबिन खाली मिले। ड्यूटी पर तैनात होने के बजाय जिम्मेदार डॉक्टर और कर्मचारी अपनी कुर्सी से गायब थे।

कलेक्टर ने मौके पर ही उपस्थिति रजिस्टर (Attendance Register) तलब किया। जाँच में पाया गया कि डॉ. ओमप्रकाश पिडिहा, श्यामशरण यादव, सुजीत जायसवाल और अरुण तिवारी ड्यूटी के समय मौजूद नहीं थे। इस पर कलेक्टर ने गहरी नाराजगी जताते हुए तत्काल प्रभाव से इनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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अस्पताल में दवाओं का स्टॉक और रजिस्टर मेल न खाने पर क्या बोले अधिकारी?
अस्पताल के निरीक्षण के दौरान एक और गंभीर मामला सामने आया—दवाओं की कालाबाजारी या रिकॉर्ड में हेराफेरी का संदेह। जब कलेक्टर ने फार्मेसी और स्टोर रूम का जायजा लिया, तो दवाओं के भौतिक स्टॉक (Physical Stock) और कागजी रिकॉर्ड में जमीन-आसमान का अंतर मिला।

रजिस्टर में दर्ज दवाएं गायब थीं और जो दवाएं मौजूद थीं, उनका सही हिसाब-किताब नहीं रखा गया था। इस गड़बड़ी को देखते हुए कलेक्टर ने तुरंत संबंधित स्टॉक रजिस्टर को जब्त करने का आदेश दिया और इसकी सूक्ष्म जाँच के लिए एक टीम गठित करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि दोषियों पर एफआईआर (FIR) तक की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

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मरीजों की सुविधा और वार्डों की स्थिति का हाल कैसा था?
कलेक्टर प्रतिभा पाल ने केवल कागजों की जाँच नहीं की, बल्कि वे सीधे मरीजों के बीच पहुँचीं। उन्होंने पीएनसी (Post Natal Care) वार्ड और जनरल वार्ड का भ्रमण किया। वहां भर्ती महिलाओं और अन्य मरीजों से उन्होंने सीधा संवाद किया और पूछा कि क्या उन्हें समय पर दवाएं और डॉक्टर मिल रहे हैं?

  • ब्लड प्रेशर की जाँच: कलेक्टर ने अपनी उपस्थिति में गर्भवती महिलाओं का बीपी (Blood Pressure) चेक करवाया ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उपकरण काम कर रहे हैं और स्टाफ को सही प्रक्रिया पता है।
  • टीकाकरण की स्थिति: उन्होंने टीकाकरण रजिस्टर की जाँच की और उपस्थित महिलाओं से पूछा कि क्या उन्हें लगने वाले सभी इंजेक्शन मुफ्त दिए गए हैं या नहीं।
  • मरीजों ने इस दौरान कई छोटी-बड़ी शिकायतें कलेक्टर के सामने रखीं, जिस पर उन्होंने मौके पर मौजूद स्वास्थ्य अधिकारियों को तत्काल सुधार के आदेश दिए।

रसोई में ताला और भूखे मरीज: पोषण आहार में लापरवाही क्यों?
निरीक्षण के दौरान सबसे चौंकाने वाला खुलासा अस्पताल की रसोई (Kitchen) में हुआ। मरीजों ने शिकायत की थी कि उन्हें समय पर भोजन और सुबह का नाश्ता नहीं दिया जा रहा है। जब कलेक्टर रसोई का निरीक्षण करने पहुँचीं, तो वहां खाना तैयार ही नहीं था। निर्धारित मैन्यु के अनुसार मरीजों को मिलने वाला पोषण आहार नदारद था।

इस पर कलेक्टर ने कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि सरकार मरीजों के भोजन के लिए बजट देती है, फिर यह खाना उन्हें क्यों नहीं मिल रहा? उन्होंने भोजन व्यवस्था के ठेकेदार और संबंधित पर्यवेक्षक के विरुद्ध सख्त एक्शन लेने को कहा।

प्रशासनिक अमले की मौजूदगी में हुई कड़ी कार्रवाई का संदेश
इस औचक निरीक्षण के दौरान कलेक्टर के साथ जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) मेहताब सिंह गुर्जर और एसडीएम (SDM) दृष्टि जायसवाल भी मौजूद रहीं। जिले के आला अधिकारियों की एक साथ मौजूदगी ने स्पष्ट कर दिया कि रीवा प्रशासन अब सुस्त व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए "जीरो टॉलरेंस" की नीति पर काम कर रहा है।

अचानक हुई इस कार्रवाई ने जिले के अन्य स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारियों की भी नींद उड़ा दी है। बैकुंठपुर की इस कार्रवाई से यह संदेश गया है कि अगर आप सरकारी सेवा में हैं, तो आपको अपनी जिम्मेदारी निभानी ही होगी।

स्वास्थ्य सेवाओं के कायाकल्प की जरूरत
बैकुंठपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का यह मामला केवल एक अस्पताल की कहानी नहीं है, बल्कि यह व्यवस्था की उन कमियों को दर्शाता है जिन्हें सुधारने की सख्त जरूरत है। कलेक्टर प्रतिभा पाल की इस पहल से न केवल लापरवाह कर्मचारियों में डर पैदा होगा, बल्कि आम जनता का सरकारी तंत्र पर विश्वास भी बढ़ेगा। अब देखना यह है कि जप्त किए गए रजिस्टरों की जाँच के बाद क्या बड़े खुलासे होते हैं।

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