कलेक्टर की 'सर्जिकल स्ट्राइक': रीवा DEO दफ्तर में मची भगदड़, रजिस्टर जब्त; बाबूगीरी कर रहे गुरुजी दुम दबाकर भागे

 
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ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा की तेजतर्रार कलेक्टर प्रतिभा पाल ने एक बार फिर साबित कर दिया कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बुधवार को जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय में उस समय 'हाई-वोल्टेज ड्रामा' शुरू हो गया जब कलेक्टर अचानक अपनी टीम के साथ औचक निरीक्षण पर पहुँच गईं। कलेक्टर की गाड़ी देखते ही दफ्तर में अफरा-तफरी मच गई। जो कर्मचारी घंटों से चाय की चुस्कियों में मशगूल थे, उनके पसीने छूटने लगे।

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फाइलें खंगाली, रजिस्टर जब्त: भ्रष्टाचार पर सीधा प्रहार
कलेक्टर प्रतिभा पाल ने कार्यालय के हर कक्ष का निरीक्षण किया। निरीक्षण दल में मेहताब सिंह गुर्जर भी शामिल रहे। कलेक्टर ने स्थापना 1, 2, 3, 4, लेखा शाखा, कोर्ट और रमसा शाखा की फाइलों को खुद खंगाला।

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  • बड़ी कार्रवाई: कलेक्टर ने मौके पर ही मुलाजिमान रजिस्टर को जब्त कर लिया ताकि हाजिरी के खेल का पर्दाफाश हो सके।
  • लंबित फाइलें: महीनों से अटकी फाइलों को देख कलेक्टर ने कड़ी नाराजगी जताई और पूछा कि आखिर कर्मचारियों के जायज भुगतान क्यों रोके गए हैं?

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DEO कार्यालय में जांच करते अधिकारी

बाबू बने बैठे शिक्षकों में मची भगदड़
इस निरीक्षण का सबसे दिलचस्प और हैरान करने वाला पहलू यह रहा कि जैसे ही कलेक्टर ने दफ्तर में कदम रखा, बड़ी संख्या में 'अटैच शिक्षक' अपनी सीटें छोड़कर पीछे के दरवाजे से भागते नजर आए। ये वो शिक्षक हैं जिनकी नियुक्ति स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के लिए हुई थी, लेकिन ये साहब लोग रसूख के दम पर DEO दफ्तर में 'बाबूगिरी' कर रहे थे। अब इन सभी पर गाज गिरना तय है।

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लेन-देन और कमीशन का खेल: अब होगी जांच
सूत्रों के अनुसार, कलेक्टर को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि DEO कार्यालय भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है।

पैसे बिना काम नहीं: आरोप है कि बिना सुविधा शुल्क (लेन-देन) के फाइलों पर हस्ताक्षर नहीं होते।
भुगतान में जानबूझकर देरी: रिटायरमेंट और अन्य स्वत्वों के भुगतान को महीनों तक सिर्फ इसलिए लटकाया जाता है ताकि कर्मचारी परेशान होकर 'सेटिंग' करें।
शिक्षकों की मनमानी: दफ्तर में जमे शिक्षक अपने मूल कार्य को छोड़कर बाबू बने बैठे हैं।

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रीवा न्यूज़ मीडिया का सवाल - कब सुधरेगा सिस्टम?
कलेक्टर प्रतिभा पाल की इस कार्रवाई ने शिक्षा विभाग के निकम्मे अधिकारियों की नींद उड़ा दी है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या यह जांच अंजाम तक पहुँचेगी? क्या भ्रष्ट बाबुओं और कामचोर शिक्षकों को वापस स्कूलों में भेजा जाएगा? रीवा न्यूज़ मीडिया  इस पूरी जांच पर अपनी नजर बनाए हुए है।

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