सफेदपोशों की शह पर रीवा में नशे का 'महाजाल'! वैध लाइसेंस और कोरियर की आड़ में युवाओं की रगों में घोला जा रहा जहर, गुजरात कनेक्शन से हड़कंप
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। विंध्य क्षेत्र का रीवा जिला अब नशे के सौदागरों के लिए एक अंतरराज्यीय ट्रांजिट पॉइंट बन चुका है। अब तक पुलिस की नजरें केवल उत्तर प्रदेश की सीमाओं पर टिकी थीं, जहाँ से नशीली कफ सिरप की तस्करी होती थी। लेकिन हालिया खुलासे ने रीवा पुलिस के भी होश उड़ा दिए हैं। अब नशे की खेप सीधे गुजरात के अहमदाबाद से रीवा पहुँच रही है, वो भी पूरी तरह 'कानूनी' दिखने वाले रास्तों से।
अहमदाबाद से रीवा: कोरियर का 'किलर' नेटवर्क
पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि नशे के सौदागरों ने अब आधुनिक और सुरक्षित तरीका अपना लिया है। गुजरात के अहमदाबाद स्थित एक बड़ी फार्मा कंपनी से नशीली टैबलेट की खेप कोरियर के माध्यम से मंगाई गई। तस्करों ने इस बार सड़कों के बजाय डाक और कोरियर सेवाओं का सहारा लिया ताकि पुलिस की चेकिंग से बचा जा सके।
सफेदपोश धंधा: मेडिकल लाइसेंस की आड़ में काला कारोबार
इस पूरे खेल की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि तस्करी के लिए वैध मेडिकल स्टोर लाइसेंस का इस्तेमाल किया गया। दस्तावेजों में इसे दवाओं की सामान्य सप्लाई दिखाया गया, ताकि कोई शक न कर सके। पुलिस को ऐसे सबूत मिले हैं जिनसे साफ होता है कि मेडिकल स्टोर संचालकों की मिलीभगत से यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है।
आरोपियों की पहचान: सरजीत और मयंक कुशवाहा पर शिकंजा
इस हाई-प्रोफाइल ड्रग मामले में पुलिस ने सरजीत कुशवाहा और मयंक कुशवाहा को मुख्य आरोपी के रूप में चिह्नित किया है। इन दोनों पर गुजरात से नशीली दवाओं की खेप मंगाने और उसे रीवा के स्थानीय बाजारों में खपाने की योजना बनाने का आरोप है। पुलिस अब इनके कॉल डिटेल्स और बैंक ट्रांजेक्शन खंगाल रही है ताकि इस नेटवर्क के 'असली आकाओं' तक पहुँचा जा सके।
जांच के घेरे में फार्मा कंपनियां और कोरियर एजेंसियां
थाना प्रभारी आशिष मिश्रा के नेतृत्व में पुलिस टीम इस सप्लाई चेन की हर कड़ी को जोड़ रही है।
- फार्मा कंपनी: अहमदाबाद की उस कंपनी की भूमिका की जांच हो रही है जिसने यह खेप भेजी।
- कोरियर सर्विस: क्या कोरियर कंपनी को इस प्रतिबंधित माल की जानकारी थी?
- लाइसेंस: किन मेडिकल स्टोर्स के नाम पर यह माल मंगाया गया, उनके लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
जमीनी हकीकत: कार्रवाई बड़ी या नशे का नेटवर्क?
भले ही पुलिस इसे बड़ी उपलब्धि मान रही हो, लेकिन रीवा के गली-मोहल्लों की स्थिति डरावनी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नशीली सिरप और गोलियां आज भी आसानी से उपलब्ध हैं। पुलिस की कार्रवाई अक्सर केवल 'करियर' (माल पहुँचाने वाले) तक सीमित रह जाती है, जबकि मुख्य सप्लायर और उन्हें संरक्षण देने वाले रसूखदार लोग सुरक्षित बच निकलते हैं।
स्थानीय मास्टरमाइंड: सबसे बड़ी चुनौती
जानकारों का मानना है कि जब तक रीवा में बैठे उन 'लोकल मास्टरमाइंड्स' को नहीं पकड़ा जाएगा, जो मेडिकल लाइसेंस मुहैया कराते हैं और माल को रिसीव करते हैं, तब तक यह धंधा बंद नहीं होगा। गुजरात या यूपी से माल मंगाना तो सिर्फ एक जरिया है, असली समस्या रीवा का वह स्थानीय तंत्र है जो इस जहर को युवाओं की रगों तक पहुँचाता है।