"CM साहब देखिये अपना 'सफेद' रीवा! अटल पार्क से होटलों तक नग्न खेल, क्या पुलिस की जेब गर्म है या वर्दी लाचार?"

 
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रीवा के होटलों में नकाबपोश युवाओं का अनैतिक खेल, क्या थाने की मिलीभगत से फल-फूल रहा है यह अवैध कारोबार? सीएम और प्रशासन से तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग।

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। जिसे विंध्य की शैक्षणिक राजधानी और संस्कृति का केंद्र माना जाता है, आज कुछ 'सफेदपोश' अपराधियों और 'भ्रष्ट' सिस्टम की वजह से बदनाम हो रहा है। शहर के रिहायशी इलाकों और विश्वविद्यालय सहित शहर के अन्य क्षेत्र में कुकुरमुत्तों की तरह उगे फर्जी होटल और गेस्ट हाउस अब केवल ठहरने की जगह नहीं, बल्कि अनैतिकता के अड्डे बन चुके हैं। नकाब पहनकर स्कूल-कॉलेज के लड़के-लड़कियों को पनाह दी जा रही है। सवाल यह है कि आखिर यह सब किसके संरक्षण में हो रहा है?

सीधा हमला: क्या थानों तक पहुँच रहा है 'महीना'? 
यह बात किसी से छिपी नहीं है कि बिना स्थानीय पुलिस की जानकारी के शहर के मोहल्लों में एक पत्ता भी नहीं हिलता। जब आम जनता को पता है कि किस मकान में 'बेडरूम आधारित अवैध ठिकाने' चल रहे हैं, तो क्या स्थानीय थानों (Police Stations) को इसकी भनक नहीं है?

आरोप लग रहे हैं कि इन अवैध संचालकों का सीधा तालमेल पुलिस के छोटे और मंझले अधिकारियों से है। क्या पुलिस का काम केवल चालान काटना है? या फिर इन अवैध ठिकानों से आने वाला 'मोटा कमीशन' पुलिस की आँखों पर पट्टी बाँध चुका है? रीवा की जनता अब चुप नहीं रहेगी। अगर कार्रवाई नहीं हो रही, तो इसका सीधा मतलब है कि थाने में पैसा जा रहा है।

अटल पार्क बना 'अवैध धंधे' का नया अड्डा: खुलेआम बांटे जा रहे विजिटिंग कार्ड 
अब तो और ज्यादा हद हो गई है! रीवा शहर का दिल कहे जाने वाले और परिवारों के टहलने की जगह 'अटल पार्क' में अब दलाल खुलेआम घूम रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि यहाँ आने वाले युवाओं और लोगों को बाकायदा विजिटिंग कार्ड (Visiting Cards) थमाए जा रहे हैं। इन कार्ड्स पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा होता है— "सबसे सस्ते और सुरक्षित रूम हमारे यहाँ उपलब्ध हैं।" क्या पुलिस की खुफिया विंग (Intelligence Unit) इतनी बेकार हो चुकी है कि सरेआम पार्क जैसी सार्वजनिक जगहों पर जिस्मफरोशी और अवैध कमरों की मार्केटिंग हो रही है? यह केवल व्यापार नहीं, बल्कि रीवा के भविष्य को दीमक की तरह चाटने की साजिश है।

बिना आधार कार्ड 'एंट्री': नाबालिगों की जिंदगी से खिलवाड़ 
शहर के कई तथाकथित होटलों में कानून की धज्जियाँ उड़ाना एक रूटीन बन गया है। कायदे से बिना वैध पहचान पत्र (Aadhar Card) के किसी को भी कमरा देना अपराध है, लेकिन रीवा में पैसा बोलता है।

नाबालिगों को पनाह: सबसे शर्मनाक और चिंताजनक बात यह है कि इन अवैध ठिकानों पर नाबालिग (Minor) लड़के-लड़कियाँ भी बेधड़क जा रहे हैं। बिना किसी जांच-पड़ताल के उन्हें कमरे मुहैया कराए जा रहे हैं।
कानून का डर खत्म: इन संचालकों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें न तो पुलिस का डर है और न ही समाज का। शहर के हर कोने में यह 'गंदा खेल' बेखौफ चल रहा है।

थानेदारों की चुप्पी पर गंभीर सवाल: आखिर हिस्सा कहाँ तक जा रहा है? 
जब शहर के हर गली-कूचे और मुख्य पार्क में यह धंधा फैल चुका है, तो क्या संबंधित थानों के टीआई (TI) और बीट गार्ड सो रहे हैं?

  • अगर पुलिस को खबर नहीं है, तो यह उनकी अक्षमता (Incompetence) है।
  • अगर खबर होने के बाद भी कार्रवाई नहीं हो रही, तो यह साफ तौर पर मिलीभगत और रिश्वतखोरी का मामला है।

सीधे तौर पर यह संदेश जा रहा है कि इन अवैध संचालकों ने सिस्टम को खरीद लिया है। बड़े अधिकारियों को अब एसी कमरों से बाहर निकलकर इन ठिकानों पर छापेमारी करनी होगी, वरना रीवा की जनता अब चुपचाप यह तमाशा नहीं देखेगी। मुख्यमंत्री जी, रीवा पुलिस के इन 'काले कारनामों' और ढीली व्यवस्था पर लगाम लगाइये!

इंस्टाग्राम पर 'ऑफर' और खुलेआम विज्ञापन
हद तो तब हो गई जब ये अवैध संचालक सोशल मीडिया, विशेषकर Instagram और WhatsApp पर खुलेआम 'प्राइवेसी' और 'सेफ स्टे' के नाम पर विज्ञापन दे रहे हैं। रीवा के युवाओं को गुमराह करने के लिए बाकायदा कोड वर्ड्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। साइबर सेल और स्थानीय पुलिस इन विज्ञापनों को देख कर भी अनदेखा क्यों कर रही है? क्या विज्ञापन चलाने वालों के आईपी एड्रेस ट्रैक करना पुलिस के बस में नहीं है, या वो करना नहीं चाहते?

नियमों की धज्जियाँ: न रजिस्टर, न आईडी, न सीसीटीवी 
नियमों के मुताबिक, किसी भी होटल या गेस्ट हाउस के लिए सराय एक्ट के तहत पंजीकरण अनिवार्य है। आगंतुक रजिस्टर में आधार कार्ड और सीसीटीवी फुटेज अनिवार्य है। लेकिन रीवा के इन 'अघोषित होटलों' में इनमें से किसी भी नियम का पालन नहीं होता।

बिना आईडी एंट्री: बिना पहचान पत्र के कमरा देना सीधे तौर पर सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।
नकाबपोश संस्कृति: नकाब पहनकर आने वालों को एंट्री देना इस बात का सबूत है कि यहाँ कुछ गलत हो रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी से सीधी गुहार 
रीवा की जनता सीधे मुख्यमंत्री (CM Madhya Pradesh) से मांग करती है कि इस 'गंदे खेल' को रोकने के लिए विशेष टास्क फोर्स का गठन किया जाए। रीवा का प्रशासन और स्थानीय पुलिस पूरी तरह से विफल साबित हुए हैं। अगर जल्द ही बड़े अधिकारियों और थाना प्रभारियों पर गाज नहीं गिरी, तो रीवा का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।

हमारी मांगें:

  • विश्वविद्यालय और रिहायशी क्षेत्रों के सभी गेस्ट हाउसों की तत्काल जांच हो।
  • जिन थानों के क्षेत्र में ये धंधे चल रहे हैं, वहां के थाना प्रभारियों को निलंबित किया जाए।
  • सोशल मीडिया पर अवैध विज्ञापन देने वालों पर एफआईआर दर्ज हो।
  • होटल के नाम पर चल रहे रिहायशी मकानों को तत्काल सील किया जाए।

प्रशासन जाग जाए, वरना जनता सड़क पर होगी 
रीवा की छवि को बचाने की जिम्मेदारी अब केवल अखबारों की नहीं, बल्कि हर नागरिक की है। प्रशासन को यह समझ लेना चाहिए कि जनता की चुप्पी को उनकी कमजोरी न समझा जाए। यदि पुलिस और विभाग के बड़े अधिकारी इस 'काले खेल' को नहीं रोकते, तो यह माना जाएगा कि भ्रष्टाचार की जड़ें ऊपर तक फैली हुई हैं। रीवा को 'अपराध का गढ़' बनने से रोकने के लिए आज ही प्रहार करना जरूरी है।

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