500 CCTV और 5 दिन का डेरा: पुलिस ने रीवा से दबोचे कुलदीप पर हमला करने वाले 'हथौड़ा' गैंग के गुर्गे

 
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ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। भोपाल का शांत इलाका 'कोलार' 25 जनवरी 2026 की रात को गोलियों की गूँज और चीख-पुकार से दहल उठा। यहाँ रीवा के एक चर्चित हिस्ट्रीशीटर कुलदीप सिंह पर आधा दर्जन से अधिक नकाबपोश बदमाशों ने उस वक्त हमला कर दिया जब वह अपनी गर्लफ्रेंड और रिश्तेदारों के साथ कार में सवार था। यह हमला इतना बर्बर था कि बदमाशों ने हथौड़े और लोहे की रॉड से कुलदीप के हाथ-पैर छलनी कर दिए।

वारदात का घटनाक्रम: हथौड़े और रॉड से कैसे किया गया हमला?
25 जनवरी की रात, जब पूरा शहर गणतंत्र दिवस की तैयारियों की पूर्व संध्या में डूबा था, कोलार इलाके में दो कारों ने कुलदीप सिंह की गाड़ी को बीच सड़क पर घेर लिया। हमलावर पूरी तैयारी के साथ आए थे। उनके चेहरे नकाब से ढके थे और हाथों में हथौड़े, सब्बल और मोटे डंडे थे।

बदमाश इसी गाड़ी से हमला करने आए थे।

बदमाश इसी गाड़ी से हमला करने आए थे।

प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, बदमाशों ने पहले कुलदीप की कार में तोड़फोड़ की और फिर उसे खींचकर बाहर निकाला। कुलदीप को तब तक बेरहमी से पीटा गया जब तक वह बेहोश नहीं हो गया। उसके रिश्तेदारों, खासकर अशुमति सिंह ने जब बीच-बचाव की कोशिश की, तो उनके साथ भी मारपीट की गई। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी बिना नंबर की कारों से फरार हो गए।

SIT का गठन और 500 कैमरों की जांच: कैसे पकड़े गए आरोपी?
घटना की गंभीरता को देखते हुए भोपाल पुलिस ने तुरंत एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। चूंकि आरोपी नकाबपोश थे और गाड़ियाँ बिना नंबर की थीं, इसलिए यह पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती थी।

आरोपियों की तलाश में पुलिस 5 दिन से डेरा डाले हुए थी।

आरोपियों की तलाश में पुलिस 5 दिन से डेरा डाले हुए थी।
  • CCTV का जाल: पुलिस ने भोपाल से लेकर रीवा तक के रास्तों पर लगे करीब 500 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले।
  • 5 दिनों का डेरा: पुलिस की दो टीमें पिछले पांच दिनों से रीवा में सादे कपड़ों में डेरा डाले हुए थीं।
  • सफलता: अंततः मुखबिरों की सूचना और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने अनिल कुशवाह और अखिलेश पांडे को गिरफ्तार कर लिया।

अवैध खनन और वर्चस्व की जंग: हमले के पीछे की मुख्य वजह
पूछताछ के दौरान पकड़े गए आरोपियों ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। यह हमला किसी पुरानी रंजिश का नतीजा नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये के अवैध खनन (Illegal Mining) कारोबार पर कब्जे की लड़ाई थी।

रीवा के चोरहटा क्षेत्र में कुलदीप सिंह और सचिन कुशवाहा के बीच लंबे समय से खदानों के ठेके और वर्चस्व को लेकर विवाद चल रहा है। सचिन कुशवाहा, जो स्वयं को खदान ठेकेदार बताता है, इस क्षेत्र में अपना एकछत्र राज चाहता था। कुलदीप के जेल से बाहर आने के बाद, सचिन को लगा कि उसका कारोबार प्रभावित हो सकता है, इसीलिए उसने भोपाल में इस हमले की साजिश रची।

मास्टरमाइंड सचिन कुशवाह और उसके गुर्गे
पुलिस जांच में सामने आया है कि इस पूरी वारदात का मास्टरमाइंड सचिन कुशवाहा है। उसने अपने साथ पवन कुशवाहा, राहुल कुशवाहा, प्रवीण कुशवाहा, कुलदीप कुशवाहा, प्रांजल पाठक, सूरज, अनिल, अखिलेश और साकेत जैसे गुर्गों को मिलाया। इन सभी ने मिलकर योजना बनाई कि कुलदीप को भोपाल में ठिकाने लगाया जाए, ताकि रीवा पुलिस उन पर शक न करे। गिरफ्तार आरोपी अनिल और अखिलेश ने बताया कि मास्टरमाइंड के कहने पर ही उन्होंने कुलदीप के हाथ-पैर तोड़ने का काम किया ताकि वह भविष्य में खड़ा न हो सके।

कौन है कुलदीप सिंह? हिस्ट्रीशीटर का आपराधिक रिकॉर्ड
पीड़ित कुलदीप सिंह कोई साधारण व्यक्ति नहीं है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, वह रीवा के चोरहटा थाने का एक सूचीबद्ध हिस्ट्रीशीटर है।

आपराधिक मामले: कुलदीप पर हत्या के प्रयास, लूट, अवैध वसूली और मारपीट जैसे कुल 12 गंभीर मामले दर्ज हैं।
गैंगवार की स्थिति: रीवा में कुलदीप और सचिन के गुटों के बीच पहले भी कई बार झड़पें हो चुकी हैं, जिसके कारण दोनों पक्षों पर क्रॉस एफआईआर (Counter Cases) दर्ज हैं।

अस्पताल में जिंदगी की जंग और पुलिस की अगली कार्रवाई
फिलहाल कुलदीप सिंह भोपाल के बंसल अस्पताल में भर्ती है, जहाँ उसकी हालत गंभीर लेकिन स्थिर बताई जा रही है। उसके शरीर की कई हड्डियां टूट चुकी हैं। पुलिस ने उसके बयान दर्ज कर लिए हैं और फरार चल रहे मुख्य आरोपी सचिन कुशवाहा और उसके अन्य साथियों की तलाश में छापेमारी तेज कर दी है।

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