"रीवा: मरीजों और उनके परिजनों के लिए असुरक्षित हुआ संजय गांधी अस्पताल, अपराधियों के हौसले बुलंद, प्रशासन चुप"

 
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ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) रीवा शहर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल, में बुधवार देर रात एक बार फिर अराजकता का माहौल देखने को मिला। एक ऐसी जगह, जिसे मरीजों और उनके परिजनों के लिए सुरक्षित माना जाता है, वहीं सुरक्षाकर्मियों को ही निशाना बनाया गया। अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात एक सुरक्षा गार्ड के साथ वॉर्ड बॉय ने बेरहमी से मारपीट की, जिससे गार्ड का सिर फट गया और वह बुरी तरह से घायल हो गया। यह घटना न केवल अस्पताल के भीतर के अनुशासन पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि कुछ कर्मचारियों के गैर-जिम्मेदाराना रवैये से मरीजों और उनके परिजनों की सुरक्षा भी खतरे में है।

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यह विवाद एक मामूली बात से शुरू हुआ, लेकिन देखते ही देखते इसने हिंसा का रूप ले लिया। घटना के बाद अस्पताल परिसर में कुछ समय के लिए तनाव का माहौल बन गया, जिसे शांत कराने के लिए अमहिया थाना पुलिस और अस्पताल चौकी पुलिस को मौके पर पहुंचना पड़ा। यह घटना रीवा शहर के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक चेतावनी है, जो बताता है कि यहां सुरक्षा व्यवस्था और कर्मचारियों के आचरण में सुधार की तत्काल आवश्यकता है।

भीड़ हटाने को लेकर हुआ विवाद, वार्ड बॉय ने फोड़ा सिर
अस्पताल में मारपीट क्यों हुई? घटना का शिकार हुए सुरक्षा गार्ड की पहचान राजेंद्र प्रसाद तिवारी के रूप में हुई है। उन्होंने बताया कि बुधवार की देर रात उनकी ड्यूटी अस्पताल के 3 नंबर आईसीयू में थी। आईसीयू के बाहर मरीजों के परिजनों की काफी भीड़ जमा थी, जिसे हटाने के लिए वह अपनी ड्यूटी निभा रहे थे। इसी दौरान, सौरभ त्रिपाठी और शिवम त्रिपाठी नाम के वार्ड बॉय वहां पहुंचे। घायल गार्ड का आरोप है कि सौरभ त्रिपाठी शराब के नशे में धुत था और आते ही गाली-गलौज करने लगा। जब राजेंद्र तिवारी ने उसे रोकने की कोशिश की, तो वार्ड बॉय ने अपना आपा खो दिया।

दोनों के बीच पहले कहासुनी हुई और फिर वार्ड बॉय ने डंडे से सुरक्षा गार्ड के सिर पर जोरदार हमला कर दिया। हमला इतना जबरदस्त था कि राजेंद्र तिवारी का सिर फट गया और खून बहने लगा। वह वहीं गिर पड़े और बुरी तरह से घायल हो गए। इस दौरान अस्पताल में मौजूद अन्य लोग और कर्मचारी भी इस घटना को देखकर दंग रह गए।

क्या यह पहली घटना है? सुरक्षाकर्मियों ने लगाए गंभीर आरोप
अस्पताल में सुरक्षा का क्या हाल है? यह घटना कोई पहली नहीं है। अस्पताल में कार्यरत अन्य सुरक्षाकर्मियों ने भी वार्ड बॉय के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला सुरक्षाकर्मी नीता शुक्ला ने बताया कि अस्पताल के कुछ वार्ड बॉय अक्सर नशे में धुत होकर अभद्र व्यवहार करते हैं। उन्होंने बताया कि कई बार इन वार्ड बॉय की शिकायत कंपनी प्रबंधन से की गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। नीता शुक्ला ने आरोप लगाया कि ये लोग न केवल पुरुष सुरक्षाकर्मियों से, बल्कि महिला सुरक्षाकर्मियों के साथ भी अभद्रता और गाली-गलौज करते हैं, जिससे उनके लिए ड्यूटी करना मुश्किल हो जाता है।

वॉर्ड बॉय अक्सर मरीजों के अटेंडरों के साथ भी मारपीट करते हैं- घायल गार्ड।

वॉर्ड बॉय अक्सर मरीजों के अटेंडरों के साथ भी मारपीट करते हैं- घायल गार्ड।

बुधवार की रात की घटना के बाद भी जब घायल साथी को पुलिस थाने ले जाने के लिए ऑटो से भेजा जा रहा था, तब वार्ड बॉय ने रास्ता रोककर ऑटो के सामने खड़े होकर विवाद किया। यह उनकी मनमानी और कानून का डर न होने को दर्शाता है। यह स्थिति अस्पताल के अनुशासन और कर्मचारियों की सुरक्षा पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाती है।

मरीजों के अटेंडरों के साथ भी मारपीट करते हैं वार्ड बॉय
वार्ड बॉय पर क्या कार्रवाई होगी? घायल गार्ड राजेंद्र तिवारी ने यह भी बताया कि अस्पताल के कुछ वार्ड बॉय सिर्फ सुरक्षाकर्मियों से ही नहीं, बल्कि अक्सर मरीजों के अटेंडरों के साथ भी मारपीट करते हैं। उनका कहना है कि यह उनकी रोजमर्रा की हरकत बन चुकी है, जिससे अस्पताल का माहौल हमेशा तनावपूर्ण बना रहता है। मरीज जो पहले से ही बीमारी और दर्द से जूझ रहे होते हैं, उनके परिजनों को भी इस तरह के व्यवहार का सामना करना पड़ता है।

यह स्थिति बताती है कि अस्पताल के भीतर एक अराजक माहौल बन चुका है, जहां कुछ कर्मचारी खुद को कानून से ऊपर समझने लगे हैं। इस तरह के आचरण से मरीजों का विश्वास भी अस्पताल से उठता जा रहा है। अस्पताल प्रशासन को इस मुद्दे पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि मरीजों और उनके साथ आए परिजनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

अस्पताल प्रबंधन और पुलिस की भूमिका: क्या होगी अगली कार्रवाई?
पुलिस ने क्या कार्रवाई की है? घटना की सूचना मिलने पर अमहिया थाना पुलिस और अस्पताल चौकी पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर किसी तरह विवाद को शांत कराया और घायल गार्ड के बयान दर्ज किए। पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है और जांच शुरू कर दी है। आरोपियों के खिलाफ मारपीट और सरकारी काम में बाधा डालने की धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

वहीं, इस गंभीर घटना पर अस्पताल अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा ने कहा कि पूरे मामले की गहनता से जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, सुरक्षाकर्मियों का कहना है कि पहले भी शिकायतें की गई हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे वार्ड बॉय के हौसले बुलंद हैं।

निष्कर्ष: अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था का बिगड़ता हाल
संजय गांधी अस्पताल में कौन सुरक्षित नहीं है? रीवा के संजय गांधी अस्पताल में हुई यह घटना एक गंभीर चेतावनी है। यह सिर्फ एक गार्ड पर हमला नहीं था, बल्कि यह दर्शाता है कि अस्पताल के भीतर अनुशासन और सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा चुकी है। जब अस्पताल के कर्मचारी खुद ही हिंसा पर उतर आते हैं, तो यह मरीजों और उनके परिजनों के लिए एक डरावना माहौल बनाता है। प्रबंधन को न केवल दोषी वार्ड बॉय पर कार्रवाई करनी चाहिए, बल्कि पूरे सुरक्षा और कर्मचारियों के आचरण की समीक्षा भी करनी चाहिए। मरीजों को उचित देखभाल और सुरक्षित वातावरण का अधिकार है,

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