रीवा शिक्षा विभाग पुताई घोटाला : कमिश्नर की नींद खुली, कागजों पर पुत गए स्कूल और डकार लिए 28 लाख; DEO समेत 6 पर गिरेगी गाज, इन 6 दिग्गजों को थमाई गई नोटिस

 
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स्कूल मरम्मत के 28 लाख रुपए डकारने वाले अधिकारियों की उल्टी गिनती शुरू; फर्जी बिलों के सहारे ठेकेदार को किया गया था भुगतान।

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश के रीवा जिले में स्कूल शिक्षा विभाग के भीतर भ्रष्टाचार की एक ऐसी परत खुली है, जिसने पूरे प्रशासनिक महकमे को हिला कर रख दिया है। स्कूलों की मरम्मत और रंगाई-पुताई के लिए आए सरकारी बजट को अधिकारियों और ठेकेदारों ने मिलकर 'कुबेर का खजाना' समझ लिया। आलम यह रहा कि स्कूलों में एक ईंट तक नहीं लगी, लेकिन कागजों पर फर्जी बिल लगाकर 28 लाख 38 हजार 229 रुपए का भुगतान कर दिया गया। अब इस मामले में कमिश्नर ने सख्त रुख अपनाते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) समेत 6 जिम्मेदार अधिकारियों को नोटिस थमा दिया है।

अनुरक्षण मद में सेंध: कैसे हुआ भ्रष्टाचार का 'खेला'? 
लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा स्कूलों के कायाकल्प के लिए बजट जारी किया गया था। रीवा को कुल 55 लाख रुपए आवंटित हुए थे। भ्रष्टाचार की पटकथा यहीं से शुरू हुई। 20 सितंबर 2025 को तत्कालीन डीईओ ने बिना किसी भौतिक सत्यापन के ठेकेदार सत्यव्रत तिवारी को 28 लाख से अधिक की राशि का भुगतान कर दिया। जांच में पाया गया कि कई स्कूलों में काम या तो अधूरा था या हुआ ही नहीं था, लेकिन फर्जी 'पूर्णता प्रमाण पत्र' (Completion Certificate) तैयार कर सरकारी खजाना खाली कर दिया गया।

जांच कमेटी की रिपोर्ट: प्राचार्यों के बयानों ने खोली पोल 
जब घोटाले की शिकायत कमिश्नर तक पहुँची, तो JD (Joint Director) लोक शिक्षण ने एक विशेष जांच कमेटी बनाई। कमेटी की जांच में चौकाने वाले तथ्य सामने आए:

  • लिखित कबूलनामा: तीन स्कूलों के प्राचार्यों ने लिखित में स्वीकार किया कि उन्होंने कभी किसी 'पूर्णता प्रमाण पत्र' पर हस्ताक्षर ही नहीं किए। यानी अधिकारियों ने खुद ही फर्जी साइन कर भुगतान की फाइल आगे बढ़ा दी।
  • अधूरा कार्य: अन्य तीन स्कूलों में जब टीम पहुँची, तो वहां पुताई और मरम्मत का काम आधा-अधूरा मिला, जबकि भुगतान 100% किया जा चुका था।
  • लेखा अधिकारी की भूमिका: लेखा शाखा ने दस्तावेजों के परीक्षण में जानबूझकर ढिलाई बरती और फर्जी बिलों को 'ओके' करार दिया।

इन 6 चेहरों पर गिरी गाज: जवाब के बाद होगा निलंबन 
जेडी के जांच प्रतिवेदन के आधार पर कमिश्नर ने निम्नलिखित 6 लोगों को 3 दिन का अल्टीमेटम दिया है:

  • रामराज मिश्रा: जिला शिक्षा अधिकारी (DEO), रीवा।
  • नवीन श्रीवास्तव: तत्कालीन रमसा (RMSA) प्रभारी।
  • सुधाकर तिवारी: एपीसी (APC), जिला शिक्षा केंद्र।
  • पुष्पा पुसाम: तत्कालीन लेखा अधिकारी (वर्तमान में सहायक संचालक, जेडी कोष एवं लेखा)।
  • विनय मिश्रा: प्राचार्य, पीएम श्री स्कूल, गुढ़।
  • लक्ष्मीकांत मिश्रा: प्राचार्य, खैरा।

(नोट: दुआरी हाई स्कूल के तत्कालीन प्राचार्य सेवानिवृत्त होने के कारण फिलहाल इस सूची में शामिल नहीं हो सके हैं।)

इन स्कूलों के नाम पर डकारी गई राशि 
घोटाले की राशि इन 6 विद्यालयों के फर्जी कार्यों के नाम पर निकाली गई थी:

  • शासकीय हायर सेकेण्डरी स्कूल, पैपखरा
  • हाई स्कूल, दुआरी
  • पीएमश्री हायर सेकेण्डरी स्कूल, गुढ़
  • हायर सेकेण्डरी स्कूल, खैरा
  • हाई स्कूल, बर्रैया
  • हाई स्कूल, कन्या खटखरी

अब आगे क्या? FIR और निलंबन की तैयारी 
सतना और मैहर जिलों में भी इसी प्रकार के घोटाले में FIR दर्ज हो चुकी है। रीवा कमिश्नर के कड़े रुख को देखते हुए माना जा रहा है कि 3 दिन के भीतर जवाब संतोषजनक न मिलने पर इन सभी अधिकारियों को निलंबित किया जाएगा और पुलिस में धोखाधड़ी एवं सरकारी धन के गबन का आपराधिक मामला दर्ज कराया जाएगा।

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