रीवा का 'VVIP' नरक: मार्तंड स्कूल और GDC कॉलेज के पास नशे का नंगा नाच, कोर्ट परिसर बना मयखाना; आखिर कलेक्टर SP मौन क्यों?

 
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ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले से एक ऐसी शर्मनाक तस्वीर उभरकर सामने आ रही है जो प्रदेश के 'सुशासन' के दावों को सरेआम चुनौती दे रही है। शहर का सबसे व्यस्त और प्रतिष्ठित क्षेत्र, जहाँ कमिश्नर कार्यालय, कलेक्ट्रेट, कोर्ट परिसर और दो-दो प्रतिष्ठित स्कूल (मार्तंड 1 और 2) सहित GDC कन्या महाविद्यालय स्थित है, आज अपराधियों और नशेड़ियों की 'शरणस्थली' बन चुका है।

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अल्टीमेटम का ढोंग और नगर निगम की 'महीना' सेटिंग
आज नगर निगम का अमला लाव-लश्कर के साथ मार्तंड स्कूल से अग्रसेन चौक तक पहुँचा। कार्रवाई के नाम पर दुकानदारों को 'शाम तक का अल्टीमेटम' दिया गया। लेकिन यह रीवा की जनता के साथ किया गया सबसे बड़ा मजाक है। स्थानीय नागरिकों का सीधा आरोप है कि रविंद्र शुक्ला जैसे निगम कर्मचारी केवल 'दिखावे' की कार्रवाई करते हैं ताकि वसूली की दरें बढ़ाई जा सकें।

नगर निगम की यह कार्रवाई सिर्फ एक रस्म अदायगी है। सवाल यह है कि जब अमला मौके पर पहुँचा, तो अवैध ठेलों को तुरंत जब्त क्यों नहीं किया गया? क्यों उन्हें शाम तक का समय दिया गया? क्या यह समय सामान हटाने के लिए था या 'सेटिंग' का लिफाफा पहुँचाने के लिए?

कोर्ट परिसर और GDC कॉलेज: दिन में कोरेक्स, रात में मयखाना 
हैरानी की बात है कि जहाँ न्याय की उम्मीद में हजारों लोग कोर्ट पहुँचते हैं, उसी कोर्ट गेट नंबर 3 और GDC कॉलेज के मुख्य गेट के पास दिनदहाड़े नशे का काला कारोबार चलता है।

दिन का हाल: हजारों की तादाद में कोरेक्स (Corex) पीने वाले युवा टोलियों में घूमते देखे जा सकते हैं।
शाम का हाल: जैसे ही सूरज ढलता है, यह पूरा इलाका 'ओपन एयर बार' में तब्दील हो जाता है। यहाँ शराबियों का ऐसा जमावड़ा लगता है कि कॉलेज जाने वाली छात्राओं और राहगीरों का निकलना दूभर हो जाता है।
सुरक्षा पर सवाल: क्या बगल में स्थित पुलिस और प्रशासन के बड़े अधिकारियों को कोरेक्स की बदबू और शराबियों का शोर सुनाई नहीं देता?

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शिक्षा के मंदिर पर नशे का साया: मार्तंड स्कूल का सच 
मार्तंड स्कूल क्रमांक 1 और 2 के 100 मीटर के दायरे में COTPA एक्ट के तहत किसी भी प्रकार के नशे की सामग्री बेचना अपराध है। लेकिन यहाँ न केवल गुटखा-सिगरेट, बल्कि ब्राउन शुगर (BS) और गांजा की पुड़िया खुलेआम बेची जा रही हैं। शिक्षा के मंदिर के बाहर नशे के सौदागर हमारे बच्चों का भविष्य निगल रहे हैं। क्या निगम आयुक्त और कलेक्टर साहब अपनी आँखों पर पट्टी बांधे हुए हैं?

एसपी ऑफिस के पास 'अंधेरगर्दी': चोरों की मंडली सक्रिय

हैरानी की बात है कि जहाँ जिले के सबसे बड़े पुलिस अधिकारी बैठते हैं, वहां दुकानों के ताले टूटना और बाइक चोरी होना आम बात हो गई है। व्यापारियों का कहना है कि यहाँ चोरों की पूरी मंडली बेखौफ घूमती है। सिविल लाइन और अमहिया पुलिस गश्त के नाम पर केवल खानापूर्ति करती है, जबकि हकीकत में चोरों को पुलिस का कोई डर नहीं रह गया है।

नशे का 'डेथ कॉरिडोर': कोरेक्स और ब्राउन शुगर का तांडव {

मार्तंड स्कूल से लेकर कोर्ट गेट और एसपी ऑफिस के आसपास का पूरा इलाका नशेड़ियों का अड्डा बन चुका है। यहाँ कोरेक्स और ब्राउन शुगर का नशा सरेआम किया जा रहा है।

  • अमहिया और सिविल लाइन की भूमिका: इन थानों की सीमा पर नशा माफिया अपनी जड़ें जमा चुके हैं। आरोप है कि पुलिस को सब पता है, लेकिन 'महीना' पहुँचने के कारण आँखें मूंद ली गई हैं।

  • सफेद जहर: ब्राउन शुगर जैसी जानलेवा ड्रग्स अब रीवा के युवाओं की रगों में घोली जा रही है, और प्रशासन केवल 'दिखावे' की कार्रवाई में व्यस्त है।

जीडीसी कॉलेज और मार्तंड स्कूल: असुरक्षित बेटियाँ

जीडीसी (GDC) कन्या महाविद्यालय और मार्तंड स्कूल के पास शराबियों और नशेड़ियों का जमावड़ा रहने से छात्राओं का निकलना दूभर हो गया है। शाम होते ही यहाँ असामाजिक तत्वों का जमावड़ा एसपी ऑफिस की सुरक्षा व्यवस्था पर तमाचा जड़ता है। जब पुलिस अपने ऑफिस के पास की बेटियों को सुरक्षा नहीं दे पा रही, तो पूरे जिले का क्या हाल होगा?

मौत को दावत देते अवैध गैस सिलेंडर: धमाके का इंतज़ार? 
इन अवैध गुमटियों और ठेलों पर न केवल नशा बिक रहा है, बल्कि सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाते हुए अवैध गैस सिलेंडरों का उपयोग धड़ल्ले से हो रहा है। भीड़भाड़ वाले इस स्कूल-कॉलेज क्षेत्र में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। एक दिन की कार्रवाई के बाद दूसरे दिन फिर वही स्थिति बन जाती है। आखिर प्रशासन किसी बड़े धमाके का इंतज़ार क्यों कर रहा है?

भ्रष्ट सिस्टम का चेहरा: वसूली के वीडियो वायरल, कार्रवाई शून्य 
रीवा की सड़कों पर चर्चा है कि नगर निगम का पूरा अमला 'महीना वसूली' के खेल में शामिल है। सोशल मीडिया पर कई बार वसूली के वीडियो वायरल हुए, लेकिन नतीजा 'ढाक के तीन पात' ही रहा। जब तक नगर निगम के भ्रष्ट कर्मचारियों की जेब गरम रहती है, तब तक इन अवैध गतिविधियों पर कोई आंच नहीं आती। यह सुशासन नहीं, बल्कि 'वसूली तंत्र' है।

सीएम मोहन यादव और जिला प्रशासन से 5 चुभते सवाल 

  • नगर निगम आयुक्त से: क्या आप केवल कुर्सी पर बैठकर फाइलों पर हस्ताक्षर करने के लिए हैं? क्या आपको सड़कों पर मची ये अराजकता दिखाई नहीं देती?
  • कलेक्टर रीवा से: क्या आपमें इतना साहस है कि आप एक शाम बिना सुरक्षा और लाव-लश्कर के इस रूट (मार्तंड स्कूल से अग्रसेन चौक) पर पैदल निरीक्षण करें?
  • पुलिस प्रशासन से: कमिश्नर ऑफिस और कोर्ट के बगल में 'नशे की मंडी' कैसे चल रही है? क्या नशा माफियाओं को राजनीतिक या पुलिसिया संरक्षण प्राप्त है?
  • भ्रष्ट कर्मचारियों पर: रविंद्र शुक्ला जैसे कर्मचारियों पर शिकायत और वीडियो वायरल होने के बाद भी निलंबन की कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
  • सरकार से: मुख्यमंत्री जी, क्या आपका 'बुलडोजर' सिर्फ गरीबों के घर चलता है? इन नशे के सौदागरों और भ्रष्ट निगम कर्मियों पर कब चलेगा?

जनता अब चुप नहीं रहेगी 
रीवा का यह वीवीआईपी इलाका आज प्रशासन की नाकामी का स्मारक बन चुका है। यदि 24 घंटे के भीतर इन अवैध ठेलों को स्थाई रूप से नहीं हटाया गया और नशे के अड्डों को ध्वस्त नहीं किया गया, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि प्रशासन और माफियाओं की मिलीभगत है। रीवा न्यूज़ मीडिया इस मुद्दे को तब तक उठाता रहेगा जब तक यहाँ की सड़कों पर हमारी बहन-बेटियाँ और छात्र सुरक्षित महसूस न करने लगें।

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