ब्राह्मणों के अपमान पर रीवा में 'चक्रव्यूह' तैयार: कल SP ऑफिस घेरकर मनीष पटेल की 'डिजिटल गुंडागर्दी' का अंत करेंगे प्रबुद्ध नागरिक
शिवेश गौतम, ऋतुराज द्विवेदी और वकीलों की फौज ने खोला मोर्चा। ब्राह्मण समाज के अपमान पर SP को सौंपा जाएगा ज्ञापन।
रीवा से राहुल द्विवेदी की रिपोर्ट। रीवा के सोशल मीडिया कलाकार मनीष पटेल, जो अक्सर अपनी बघेली कॉमेडी के लिए चर्चा में रहते हैं, इस बार एक गंभीर विवाद के जाल में फंस गए हैं। वैलेंटाइन डे (14 फरवरी) के नाम पर 'व्यूज' बटोरने के चक्कर में उन्होंने एक ऐसा वीडियो साझा किया, जिसने पूरे ब्राह्मण समाज की भावनाओं को झकझोर कर रख दिया है।

"ब्राह्मण लड़की पटाने के बाद" शीर्षक वाले इस कथित वीडियो के वायरल होते ही समाज का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मनीष पटेल द्वारा 'ब्राह्मण समाज' की गरिमा को ठेस पहुँचाने का मामला अब थानों से निकलकर जिले के सर्वोच्च पुलिस कार्यालय यानी SP ऑफिस तक पहुँच गया है।

अब यह लड़ाई केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रही, बल्कि रीवा के कानूनविदों और बुद्धिजीवियों ने इसे प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है। इस मामले में अब प्रबुद्ध वर्ग ने केवल विरोध नहीं, बल्कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की उन धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की है, जो सामाजिक वातावरण बिगाड़ने और जातिगत विद्वेष फैलाने के लिए बनाई गई हैं।
मनोरंजन या मानसिक दिवालियापन?
सोशल मीडिया पर इस वीडियो की कड़ी आलोचना हो रही है। ब्राह्मण समाज के युवाओं और प्रबुद्ध वर्ग का साफ कहना है कि किसी विशेष जाति की महिलाओं को 'टारगेट' करना कला नहीं, बल्कि मानसिक दिवालियापन है। लोगों का मानना है कि मनीष पटेल ने लोकप्रियता की भूख में सामाजिक समरसता और बघेली संस्कृति की गरिमा को दांव पर लगा दिया है।
सिविल लाइन थाने में हुई शिकायत, गिरफ्तारी की मांग
मामला तब और गरमा गया जब ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर रीवा के सिविल लाइन थाने में दस्तक दी। समाज के सदस्यों ने मनीष पटेल के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सिर्फ वीडियो डिलीट करना काफी नहीं है, बल्कि ऐसी सख्त सजा मिलनी चाहिए जो भविष्य में किसी भी 'कंटेंट क्रिएटर' के लिए नजीर बने।
थाने का रुख और पुलिस का आश्वासन
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, सिविल लाइन थाना पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि वीडियो की जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम पर मनीष पटेल की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक सफाई या माफीनामा सामने नहीं आया है, जिससे लोगों का गुस्सा और बढ़ रहा है।
इन धाराओं के तहत माँगी गई है कार्रवाई:
अधिवक्ताओं के समूह ने आवेदन में स्पष्ट किया है कि मनीष पटेल का कृत्य इन धाराओं के अंतर्गत दंडनीय है:
- BNS धारा 195 और 196: विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ना।
- BNS धारा 299: धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर आहत करना।
- BNS धारा 352 और 353: किसी विशिष्ट वर्ग, जाति या लिंग (महिला) को अपमानित करने और उनकी गरिमा को लक्षित करने वाले बयान या कृत्य।
अधिवक्ताओं का तर्क है कि मनीष पटेल ने जानबूझकर सामाजिक वातावरण को दूषित करने और वैमनस्यता फैलाने का कार्य किया है।
SP ऑफिस का घेराव: ये दिग्गज होंगे शामिल
रीवा के पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय का घेराव कर एक कड़ा कानूनी आवेदन सौंपा जाएगा। इस मुहिम में 50 से अधिक प्रबुद्ध नागरिक और अधिवक्ता शामिल हैं, जिनमें मुख्य रूप से शामिल रहेंगे:
- बी.के. माला: RTI एक्टिविस्ट।
- ऋतुराज द्विवेदी: संपादक, रीवा न्यूज मीडिया।
- शिवेश गौतम: लॉ एजेंसी के संचालक।
- वरिष्ठ अधिवक्ता: प्रदीप पांडेय, हरीश पांडेय, विवेक मिश्रा, तरुणेंद्र शेखर पांडेय, प्रदीप बघेल, अमित सिंह, कमलेश्वर तिवारी, राजेंद्र शर्मा और राममणि मिश्रा।
जाति और लिंग को लक्षित करने का आरोप
आंदोलनकारियों का कहना है कि मनोरंजन की आड़ में किसी विशेष जाति की महिलाओं को 'टारगेट' करना न केवल अनैतिक है, बल्कि यह कानूनी रूप से भी अपराध है। अधिवक्ताओं की टीम का मानना है कि मनीष पटेल ने अपने वीडियो के माध्यम से लिंग (Gender) और जाति (Caste) को आधार बनाकर घृणा फैलाने का प्रयास किया है, जिससे समाज का एक बड़ा वर्ग आहत है।
न्याय की मांग
रीवा के बुद्धिजीवियों का यह समूह अब प्रशासन से आर-पार की लड़ाई के मूड में है। उनकी स्पष्ट मांग है कि इन धाराओं के तहत तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाए और मनीष पटेल की गिरफ्तारी हो, ताकि भविष्य में कोई भी सोशल मीडिया के माध्यम से समाज में जहर न घोल सके।