सावधान रीवा! रेलवे स्टेशन पर गाड़ी रोकी तो समझो लुट गए; 10 सेकंड रुकने पर भी वसूला जा रहा पूरा टैक्स, गुंडागर्दी चरम पर : ठेकेदार के आगे बेबस हुआ रेल प्रशासन?

 
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ठेकेदार सत्येंद्र मिश्रा की दबंगई: सेकंडों में कट रही यात्रियों की जेब, पार्किंग स्टैंड बना 'वसूली का अड्डा'।

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा रेलवे स्टेशन, जो विंध्य का गौरव होना चाहिए, आज अपनी कुव्यवस्था के कारण बदनाम हो रहा है। यहाँ आने वाले यात्रियों का स्वागत मुस्कान से नहीं, बल्कि पार्किंग स्टैंड पर खड़े 'वसूली एजेंटों' की बदसलूकी से होता है। वाहन स्टैंड अब यात्रियों की सुविधा के लिए नहीं, बल्कि ठेकेदार की तिजोरी भरने का जरिया बन गया है।

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सेकंडों का खेल: पलक झपकते ही जेब साफ 
यहाँ का नियम कानून से नहीं, ठेकेदार की मर्जी से चलता है। अगर आप किसी को छोड़ने स्टेशन आए हैं और गाड़ी मात्र कुछ सेकंड के लिए भी रुकी, तो तुरंत पूरा पार्किंग शुल्क मांग लिया जाता है।

नो ग्रेस पीरियड: कायदे से कुछ मिनटों का समय ड्रॉप-ऑफ के लिए फ्री होना चाहिए, लेकिन यहाँ रुकते ही रसीद थमा दी जाती है।
अवैध वसूली: चाहे आप 10 सेकंड रुकें या 10 मिनट, पैसे पूरे वसूल किए जाते हैं।

ठेकेदार सत्येंद्र मिश्रा और दबंगई का साम्राज्य 
पार्किंग का ठेका सत्येंद्र मिश्रा के पास बताया जा रहा है। आरोप है कि उनके करिंदे यात्रियों से बात नहीं करते, बल्कि सीधे धमकाते हैं।

  • बदसलूकी: सवाल पूछने पर गाली-गलौज और डराना-धमकाना यहाँ आम बात है।
  • रसूख का दबाव: यात्रियों का कहना है कि ठेकेदार के कर्मचारी अपने रसूख की धौंस दिखाते हैं, मानो स्टेशन परिसर उनकी निजी जागीर हो।

यात्रियों की आपबीती: 'डकैती' जैसा अहसास 
स्टेशन आए एक यात्री ने बताया, "मैंने सिर्फ अपनी पत्नी को उतारने के लिए गाड़ी रोकी थी, अभी बैग निकाला भी नहीं था कि रसीद लेकर कर्मचारी खड़ा हो गया। विरोध करने पर चार लोग घेर कर खड़े हो गए।" कई अन्य यात्रियों ने इसे 'दिनदहाड़े डकैती' करार दिया है।

रेल प्रशासन की चुप्पी: मिलीभगत या मजबूरी? 
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह सब रेल प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है, फिर भी कोई कार्रवाई क्यों नहीं होती? सवाल यह उठता है कि क्या रेलवे के अधिकारी अंधे और बहरे हो चुके हैं? स्टेशन परिसर में हो रही इस खुली लूट की जानकारी डीआरएम (DRM) और स्टेशन मास्टर को क्यों नहीं है?

  • मौन का मतलब: प्रशासन की चुप्पी यह इशारा करती है कि या तो वे ठेकेदार से डरते हैं, या फिर इस काली कमाई का हिस्सा उन तक भी पहुँच रहा है।
  • क्या संरक्षण प्राप्त है? जनता के बीच यह धारणा बन गई है कि रेलवे के आला अधिकारी और ठेकेदार के बीच 'अघोषित गठबंधन' है।
  • शिकायत का असर शून्य: स्टेशन मास्टर से लेकर उच्च अधिकारियों तक कई शिकायतें की गईं, लेकिन ठेकेदार का लाइसेंस रद्द करना तो दूर, चेतावनी तक नहीं दी गई।

क्या कहते हैं नियम और कैसे रुक सकती है लूट? 
रेलवे के नियमों के अनुसार, पार्किंग स्टैंड पर रेट लिस्ट का बोर्ड होना अनिवार्य है और ड्रॉप-एंड-गो के लिए एक निश्चित समय सीमा होती है।

  • यात्रियों को हमेशा रसीद मांगनी चाहिए।
  • बदसलूकी होने पर रेल मदद (Rail Madad) ऐप या 139 पर तुरंत शिकायत दर्ज करनी चाहिए।
  • प्रशासन को सीसीटीवी कैमरों के जरिए इन वसूली एजेंटों की गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए।
  • वीडियो बनाएं: बदसलूकी होने पर तुरंत वीडियो रिकॉर्ड करें।
  • ट्वीट करें: रेल मंत्री और डीआरएम को टैग करके इस लूट का पर्दाफाश करें।

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