जब थमने वाली थीं सांसें, तब डॉ. त्रिपाठी की टीम ने कर दिखाया करिश्मा; रीवा में जटिल पेसमेकर प्रत्यारोपण सफल, डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल के विजन का कमाल
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। विंध्य क्षेत्र के चिकित्सा इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। रीवा स्थित सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के हृदय रोग विभाग ने एक बार फिर अपनी उत्कृष्टता सिद्ध की है। मऊगंज की एक 17 वर्षीय किशोरी, जो जन्मजात हृदय की गंभीर बीमारी से जूझ रही थी, उसे डॉक्टरों ने मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकाल लिया है।

मऊगंज की बेटी को मिला नया जीवन: केस की गंभीरता
मऊगंज निवासी युवती 'कन्जेनिटल कम्प्लीट हार्ट ब्लॉक' (Congenital Complete Heart Block) जैसी दुर्लभ और घातक स्थिति से पीड़ित थी। जब उसे अस्पताल लाया गया, तो उसकी हालत अत्यंत नाजुक थी। उसे बार-बार बेहोशी आ रही थी और वह कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा) की स्थिति में थी। ऐसी स्थिति में जीवन बचने की संभावनाएं बहुत कम होती हैं, लेकिन समय रहते विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी ने चमत्कार कर दिखाया।
डॉ. एस.के. त्रिपाठी और टीम का सफल ऑपरेशन
हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. एस.के. त्रिपाठी (DM Cardiology) ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल निर्णय लिया। आधुनिक कार्डियक कैथ लैब में किशोरी का पेसमेकर (Pacemaker) प्रत्यारोपण किया गया। यह एक जटिल प्रक्रिया थी, जिसे डॉ. त्रिपाठी और उनकी कुशल टीम ने पूरी सटीकता के साथ अंजाम दिया।
टीम के मुख्य सदस्य:
कैथ लैब टीम: श्री जय नारायण मिश्रा, सत्यम, सुमन, मनीष, सुधांशु, निकित, सोनाली और विजय।
नर्सिंग स्टाफ: सतेन्द्र एवं किशोर।
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के विजन का असर
इस बड़ी उपलब्धि का श्रेय प्रदेश के माननीय उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल की दूरगामी सोच को दिया जा रहा है। उनके प्रयासों से ही रीवा में दिल्ली-मुंबई जैसी उन्नत चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो पाई हैं। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल अब विंध्य के मरीजों के लिए वरदान साबित हो रहा है, जिससे उन्हें अब बड़े शहरों की ओर नहीं भागना पड़ता।
अस्पताल प्रबंधन की प्रतिक्रिया और टीम का उत्साह
संस्थान के डीन डॉ. सुनील अग्रवाल और सुपरइंटेंडेंट डॉ. अक्षय श्रीवास्तव ने इस सफल सर्जरी पर हर्ष व्यक्त किया है। उन्होंने डॉ. एस.के. त्रिपाठी और उनकी पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि ऐसी जटिल प्रक्रियाओं के सफल संचालन से जनता का विश्वास सरकारी स्वास्थ्य तंत्र पर और मजबूत हुआ है।