रीवा में 'जुगाड़' से नौकरी! सरकारी शिक्षक का वीडियो वायरल, योग्यता पर उठे सवाल, शिक्षा विभाग में हड़कंप

 
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ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) रीवा के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती और उनकी योग्यता हमेशा से चर्चा का विषय रही है। नियमानुसार, शिक्षकों का वेतनमान उनकी योग्यता और पद के आधार पर तय होता है। लेकिन, रीवा जिले के त्योंथर तहसील में सामने आए एक मामले ने पूरे शिक्षा विभाग को शर्मसार कर दिया है। बारी चौरा प्राथमिक विद्यालय में पदस्थ एक शिक्षक का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वे खुद यह स्वीकार करते दिख रहे हैं कि वे ठीक से पढ़-लिख नहीं सकते। यह घटना न सिर्फ उस शिक्षक की योग्यता पर, बल्कि पूरी भर्ती प्रक्रिया और शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

वायरल वीडियो से सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई
बारी चौरा प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक दिनेश द्विवेदी का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में ग्रामीण उनसे कक्षा 3 की किताब पढ़ने के लिए कहते हैं, लेकिन वे बच्चों की तरह अटक-अटक कर पढ़ पाते हैं। जब उनसे उनका नाम लिखने को कहा जाता है, तो वे वह भी ठीक से नहीं लिख पाते। ग्रामीणों का आरोप है कि दिनेश द्विवेदी पिछले कई सालों से इस स्कूल में पढ़ा रहे हैं और अगले दो साल में रिटायर भी होने वाले हैं, लेकिन उनकी शैक्षणिक योग्यता न के बराबर है। इस वीडियो में वे खुद यह स्वीकार करते हैं कि वे पढ़ने-लिखने में कमजोर हैं और उन्होंने 'जुगाड़' से नौकरी हासिल की है। यह वीडियो शिक्षा विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

ग्रामीणों के आक्रोश और गंभीर आरोप
ग्रामीणों ने इस मामले में कई गंभीर आरोप लगाए हैं। स्थानीय निवासी शिवम द्विवेदी ने बताया कि पूरे गांव में इस बात को लेकर गुस्सा है कि एक अयोग्य व्यक्ति को सरकारी शिक्षक की नौकरी कैसे मिल गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्कूल में अतिथि शिक्षक भी नियमित रूप से नहीं आते, जबकि हेडमास्टर दावा करते हैं कि वे रोज आते हैं। बच्चों ने खुद बताया कि अतिथि शिक्षक कभी-कभी ही आते हैं। इसके अलावा, हाजिरी रजिस्टर में शिक्षकों को सीएल (Casual Leave) दिए जाने का भी मामला सामने आया है, जो नियमों के खिलाफ है। इन सभी आरोपों ने स्कूल के प्रशासन और शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है।

प्रशासन ने दिए सख्त जांच के आदेश
वायरल वीडियो और ग्रामीणों के आरोपों के बाद मामला जिला शिक्षा अधिकारी रामराज मिश्रा तक पहुंचा। उन्होंने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। ग्रामीणों ने कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर शिक्षक दिनेश द्विवेदी की बौद्धिक क्षमता की जांच कराने और उन्हें तुरंत पद से हटाने की मांग की है। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी मांग की है कि अब तक उन्हें मिली सरकारी वेतन की वसूली की जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे स्कूल में ताला लगा देंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। यह मामला अब जांच के घेरे में है, और देखना होगा कि इस पर क्या कार्रवाई होती है।

क्या सरकारी भर्ती में योग्यता मायने नहीं रखती?
यह घटना सिर्फ एक शिक्षक की योग्यता का मामला नहीं है, बल्कि यह पूरी शिक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाती है। यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती सिर्फ कागजी तौर पर होती है और क्या उनकी वास्तविक योग्यता की जांच नहीं की जाती? अगर एक शिक्षक जो खुद ठीक से पढ़-लिख नहीं सकता, वह बच्चों को कैसे पढ़ाएगा? यह मामला दर्शाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता की कितनी अनदेखी की जाती है। इस तरह के मामले शिक्षा के स्तर को गिराते हैं और बच्चों के भविष्य को खतरे में डालते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
शिक्षक का नाम क्या है और वे कहां पदस्थ हैं?
शिक्षक का नाम दिनेश द्विवेदी है और वे रीवा जिले के त्योंथर के बारी चौरा प्राथमिक विद्यालय में पदस्थ हैं।

वायरल वीडियो में क्या दिखाया गया है?
वीडियो में शिक्षक दिनेश द्विवेदी कक्षा 3 की किताब पढ़ते हुए अटकते दिख रहे हैं और खुद स्वीकार करते हैं कि वे पढ़ने-लिखने में कमजोर हैं।

ग्रामीणों की मुख्य मांगें क्या हैं?
ग्रामीणों ने शिक्षक की जांच, उन्हें पद से हटाने और अब तक मिली सैलरी की वसूली की मांग की है।

प्रशासन ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
जिला शिक्षा अधिकारी रामराज मिश्रा ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

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