MP में शिक्षकों का 'नो ई-अटेंडेंस' आंदोलन: रीवा में शिक्षकों ने नेटवर्क समस्या को लेकर किया बड़ा प्रदर्शन, कमिश्नर से लगाई गुहार।

 
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ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) रीवा में शासकीय शिक्षकों के लिए अनिवार्य की गई ई-अटेंडेंस व्यवस्था ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। 21 अगस्त को जारी हुए इस आदेश के बाद शिक्षकों में असंतोष साफ देखा जा रहा है। पुरानी पेंशन बहाली संघ ने इस आदेश का कड़ा विरोध शुरू कर दिया है और इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है। सोमवार शाम, शिक्षक संघ के सदस्यों ने कमिश्नर कार्यालय पहुंचकर जमकर नारेबाजी की और अपनी समस्याओं को सामने रखा। शिक्षकों का कहना है कि यह फैसला जमीनी हकीकत को नजरअंदाज कर लिया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट की सुविधा बहुत कमजोर है, वहां हर रोज ई-अटेंडेंस दर्ज करना एक बड़ी चुनौती है।

सरकार का तर्क और आदेश की तारीख (Government's Logic and Order Date)
लोक शिक्षण के संयुक्त संचालक कार्यालय ने 21 अगस्त को एक आदेश जारी किया था, जिसमें सभी शासकीय शिक्षकों के लिए ई-अटेंडेंस को अनिवार्य कर दिया गया था। इस कदम के पीछे विभाग का तर्क यह था कि उन्हें लगातार शिक्षकों के स्कूल से अनुपस्थित रहने और देरी से आने की शिकायतें मिल रही थीं। ई-अटेंडेंस प्रणाली को इस समस्या को हल करने और स्कूल में शिक्षकों की उपस्थिति को ट्रैक करने के लिए एक प्रभावी तरीका माना गया था। इसका उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारना और स्कूलों में अनुशासन बनाए रखना था। हालांकि, यह आदेश जारी होते ही शिक्षकों के बीच नाराजगी फैल गई, जिन्होंने इसे अपने लिए एक बड़ी परेशानी बताया।

शिक्षक संघ का पक्ष: नेटवर्क और सर्वर की समस्या (Teachers' Union's Side: Network and Server Issues)
पुरानी पेंशन बहाली संघ के एक प्रमुख पदाधिकारी पुष्पेंद्र द्विवेदी ने इस आदेश का पुरजोर विरोध किया है। उन्होंने बताया कि ई-अटेंडेंस प्रणाली की सबसे बड़ी खामी ग्रामीण इलाकों में नेटवर्क की समस्या है। कई दूरदराज के क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्शन बहुत धीमा होता है या पूरी तरह से अनुपलब्ध होता है, जिससे शिक्षकों के लिए हर दिन अपनी उपस्थिति दर्ज करना असंभव हो जाता है। इसके अलावा, कई शिक्षकों के पास एंड्रॉइड फोन नहीं हैं जो इस ऐप को चलाने के लिए जरूरी हैं। सर्वर डाउन होने की समस्या भी एक आम बात है, जिससे समय पर अटेंडेंस दर्ज नहीं हो पाती है। संघ का कहना है कि इन तकनीकी चुनौतियों के कारण यह व्यवस्था पूरी तरह से अव्यवहारिक है।

कमिश्नर से प्रमुख मांगें (Main Demands to the Commissioner)
शिक्षक संघ ने कमिश्नर से अपनी समस्याओं को लेकर एक ज्ञापन सौंपा। इसमें उन्होंने मांग की कि विभागीय दबाव को देखते हुए ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता को तुरंत समाप्त किया जाए। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली शिक्षकों को बेवजह परेशान कर रही है और उनके काम को प्रभावित कर रही है। संघ का कहना है कि जब तक सभी स्कूलों में आवश्यक तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध नहीं हो जाता, तब तक इस तरह के आदेश लागू नहीं किए जाने चाहिए।

अन्य लंबित समस्याओं पर भी ध्यान देने की अपील (Appeal to Address Other Pending Issues as Well)
ई-अटेंडेंस के विरोध के साथ-साथ शिक्षक संघ ने कमिश्नर से कुछ अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी ध्यान देने की अपील की। इन मांगों में शामिल हैं:

  • लंबित क्रमोन्नति एरियर्स और डीए एरियर्स का भुगतान: शिक्षकों को लंबे समय से उनके बकाया राशि का इंतजार है, जिसे जल्द से जल्द जारी किया जाना चाहिए।
  • अवकाश के दिनों में बीएलओ कार्य: संघ ने मांग की है कि शिक्षकों द्वारा अवकाश के दिनों में किए गए बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) कार्यों को उनकी सर्विस बुक में दर्ज किया जाए, ताकि उन्हें इसका लाभ मिल सके।
  • लंबित अनुकंपा नियुक्तियों का निराकरण: कई शिक्षकों के परिवारों को अनुकंपा नियुक्ति का इंतजार है, जिसका समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए।

संघ ने कमिश्नर से सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और विकासखंड शिक्षा अधिकारियों की एक संभागीय बैठक बुलाने का अनुरोध किया है, ताकि शिक्षकों की इन सभी समस्याओं का जल्द से जल्द समाधान किया जा सके।

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